आखिर क्यों बढ़ता जा रहा है UPSC विवाद?

By: | Last Updated: Friday, 25 July 2014 8:40 AM
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नई दिल्ली: भारतीय संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सर्विसेज  परीक्षा को पास करना, देश की सबसे ऊंची सरकारी नौकरी पाने का जरिया है. लगभग हर आम भारतीय के दिल में यह सपना आकार लेता है. चाहें उत्तर भारत हो या दक्षिण भारत, देश के हर हिस्से के लोग एक बार यूपीएससी यानी सिविल सर्विसेज को पास कर एक खास मुकाम पाना चाहते हैं.

यूपीएससी सिलेबस बदलने को लेकर विवाद बढता जा रहा है. सड़क से लेकर संसद तक हंगामा हुआ है.  परीक्षा के लिए कल एडमिट कार्ड जारी होने के बाद से ही बवाल शुरू हो गया है. संसद का घेराव करने जा रहे छात्रों को पुलिस ने रोक दिया है. रास्ते में 100 से ज्यादा छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया है. कुछ छात्रों की जबरन पिटाई की गई है. एक छात्र को तो बस में खुद एडिशनल सीपी एसबीएस त्यागी ने पीटा है. त्यागी ने कानून हाथ में लेते हुए छात्र की पिटाई की है.

 

राज्यसभा में कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने बयान देते हुए कहा है कि एडमिट कार्ड आने से पैटर्न का फैसला नहीं हो जाता.

 

इससे पहले लोकसभा और राज्यसभा में ये पूरा मामला उठा. सदन की कार्यवाही भी स्थगित कर दी गई. राज्यसभा में जेडीयू सांसद शरद यादव और लोकसभा में कांग्रेस की सांसद रंजीता रंजन ने मामला उठाया. विरोधी पार्टी का कहना है कि हिंदी भाषियों के साथ अनदेखी हो रही है.

 

सरकार का जवाब

केंद्रीय कार्मिक एवं लोक शिकायत राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के अभ्यर्थियों को भाषा के आधार पर मुश्किलें नहीं झेलनी पड़ेगी. उनका यह बयान यूपीएससी के अभ्यर्थियों के गुरुवार को मुखर्जी नगर में हिंसा पर उतारू होकर एक बस, पुलिस के वाहन और एक मोटरबाइक में आग लगा देने के बाद आया है.

 

पुलिस ने इस मामले में 20 लोगों को गिरफ्तार किया है और कई लोगों को हिरासत में लिया है.

 

मंत्री ने संसद के बाहर संवाददाताओं से कहा, “सरकार को छात्रों के साथ पूरी सहानुभूति है और इस बात को लेकर सरकार का रवैया बिल्कुल स्पष्ट है कि किसी भी हालत में विशेषकर भाषा के आधार पर छात्रों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. हम जल्द ही इसका समाधान ढूंढ लेंगे.”

 

यूपीएससी परीक्षा में शामिल होने वाले ये अभ्यर्थी सिविल सर्विस एप्टीट्यूड टेस्ट (सीसैट) को मानविकी विषयों और हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए पक्षपातपूर्ण करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

 

सरकार ने राजधानी में अभ्यर्थियों के विरोध को देखते हुए इस विवाद के संबंध में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है.

 

UPSC विवाद: एडमिट कार्ड जारी होने के बाद बवाल, संसद भवन का घेराव करने वाले छात्रों की पिटाई

 

उन्होंने कहा, “हम अभ्यर्थियों से शांति बनाए रखने का अनुरोध करेंगे, क्योंकि सरकार भी इस मुद्दे पर चिंतित है. मुद्दे पर फैसला समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा.”

 

प्रदर्शन उस वक्त तेज हो गया, जब यूपीएससी ने 24 अगस्त को होने वाली प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र जारी किया.

 

मंत्री ने यह भरोसा भी दिलाया कि प्रवेश पत्र को इस बात का संकेत नहीं मानना चाहिए कि यह तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट को प्रभावित करेगा.

 

छात्रों की मांग

हाल ही में यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने वाले हिंदीभाषी छात्र पिछले कई दिनों से इस परीक्षा के बदले हुए पैटर्न को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. इन छात्रों की मांग है कि सी-सैट यानी सिविल सर्विसेज एप्टिट्यूड टेस्ट को खत्म कर परीक्षा में पुराने पैटर्न को लागू किया जाए. इन छात्रों का कहना है कि सी-सैट के आने से हिंदी भाषी छात्रों के लिए परीक्षा पास करने में काफी मुश्किलें आ रही हैं. अंग्रेजी को पास करने की अनिवार्यता हिंदी भाषी छात्रों के लिए परीक्षा पास करने में रोड़े अटका रही है.

 

हिंदी माध्यम के छात्रों के आंदोलन का असर, सरकार ने की सिविल सर्विसेज परीक्षा टालने की सिफारिश 

अधर में परीक्षा?

छात्रों के प्रदर्शन और बढ़ते विवाद को देखते हुए केंद्र सरकार ने मंगलवार को यूपीएससी से प्रारंभिक परीक्षा आगे बढ़ाने को कहा था. सरकार के मुताबिक परीक्षा के जब तक यूपीएससी परीक्षा के सिलेबस और पैटर्न को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाने तक परीक्षा को पोस्टपोन कर अगले महीने आयोजित करवाया जाए. सरकार ने यूपीएससी से परीक्षा को आगे बढ़ाते वक्त देश के हर तबके का ध्यान रखने और मामले की रिपोर्ट आने का हवाला दिया था.

 

यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा 24 अगस्त को होनी है.

 

क्या था मामला?

इससे पहले यूपीएससी के छात्रों के साथ ही एबीवीपी के कार्यकर्ताओं यूपीएससी ऑफिस के बाहर सी-सैट को खत्म करने की मांग करते हुए प्रदर्शन भी किया था. उनका कहना है कि सा-सैट पैटर्न के आने से हिंदी भाषी छात्रों को नुकसान हो रहा है.

 

पहले क्या कहा था सरकार ने?

मंगलवार को छात्रों के एक समूह ने भी कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात की. जितेंद्र सिंह ने एबीपी न्यूज़ से कहा कि उन्होंने तीन सद्सयीय जांच कमेटी से जल्द से जल्द रिपोर्ट देने की बात कही है. उन्होंने भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से खुद को कोई भी मानसिक और शारीरिक नुकसान न पहुंचाने की भी अपील की. मंत्री के मुताबिक अधिकारियों ने भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से मुलाकात की और उनसे भूख हड़ताल खत्म करने को कहा.

 

हिंदी माध्यम के छात्रों के आंदोलन का असर, सरकार ने की सिविल सर्विसेज परीक्षा टालने की सिफारिश

 

मंत्री के मुताबिक भाषा के आधार पर किसी के भी साथ अन्याय नहीं होना चाहिए. सरकार इस बात का समर्थन नहीं करती है.

 

राजनीतिक पार्टियों का रुख

लालू यादव की पार्टी आरजेडी औक कांग्रस के लोकसभा सदस्यों ने भी इस मामले को जीरो ऑवर में लोकसभा मं उठाया था. लेकिन स्पीकर सुमित्रा महाजन ने आरजेडी सांसद राजेश रंजन और पप्पू यादव द्वारा दिए गए नोट्क को यह कहकर खारिज कर दिया कि इस मुद्दे पर एडजर्नमेंट मोशन नहीं लाया जा सकता.

 

यूपीएससी विवाद एक नजर में-

 

  • 2011 में सिविल सर्विसेज परीक्षा का पैटर्न बदला गया.

  • वैकल्पिक विषय की जगह सी-सैट का पैटर्न लाया गाया.

  • सी-सैट के आने पर आरोप है कि उसमें अंग्रेजी भाषा को क्वालिफाई करना अनिवार्य कर दिया गया.

  • हिंदी भाषी छात्रों का आरोप है कि सी-सैट के आने से उनका नुकसान हो रहा है और वे सिविल सर्विसेज के लिए क्वालिफाई नहीं कर पा रहे हैं.

  • छात्रों के मुताबिक सी-सैट में अंग्रेजी क्वालिफाई करना अनिवार्य होता है जबकि प्रश्नपत्र में अंग्रेजी का जो अनुवाद हिंदी में होता है वो सरल हिंदी न होकर बहुत ही जटिल होता है.

  • पिछले कई दिनों से यूपीएससी की तैयारी कर रहे हिंदी भाषी छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं और कुछ भीख हड़ताल पर भी हैं.

  • सरकार ने इस मामले पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट आने तक यूपीएससी से परीक्षा टालने को कहा है. फिलहाल इस परीक्षा के लिए 24 अगस्त की तारीख तय की गई है.

  • यूपीएससी विवाद के बढ़ते जाने से राजनीतिक पार्टियों ने भी इस मुद्दे पर राजनीति शुरु कर दी है.

  • आरजेडी, कांग्रेस और एसपी ने मामले को संसद में उठाकर सरकार से यूपीएससी परीक्षा को हिंदी भाषी छात्रों के हितों को ध्यान में रखने की मांग की है.

  • सरकार ने छात्रों से भूख हड़ताल खत्म करने की बात कही है.

  • यूपीएससी छात्रों के इस प्रदर्शन में एबीवीपी जैसे छात्र संगठन भी आगे आ गए हैं. एबीवीपी के नेतृत्व मे यूपीएससी के मुख्यालय पर भी प्रदर्शन किया गया.

  • यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्रों के सामने इस बात का संकट उत्पन्न हो गया है कि आखिर वह किस पैटर्न को ध्यान में रखकर परीक्षा की तैयारी करें?

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