UPSC विवाद: कल तक हो सकता है यूपीएससी परीक्षा में सीसैट विवाद पर फैसला

By: | Last Updated: Saturday, 2 August 2014 2:41 AM

नई दिल्ली: सूत्रों के मुताबिक खबर है कि यूपीएससी परीक्षा पर छात्रों को जितेंद्र सिंह ने भरोसा दिया है कि रविवार तक इस पर सरकार कोई फैसला ले लेगी. यूपीएससी परीक्षा से सी-सैट हटाने की मांग को लेकर सरकार को सौंपी गई अरविंद वर्मा कमेटी की रिपोर्ट पर आज सरकार में चर्चा संभव है. कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह वरिष्ठ मंत्रियों से चर्चा कर सकते हैं.

 

सूत्रों के मुताबिक वर्मा कमेटी की रिपोर्ट में यूपीएसी के सिलेबस में बदलाव की सिफारिश नहीं की गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जो पैटर्न लागू किया गया था वो सोच समझ कर किया गया था.

 

यूपीएससी परीक्षा पर वर्मा कमेटी की रिपोर्ट के बाद दिल्ली के मुखर्जी नगर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. छात्रों के संभावित प्रदर्शन को देखते हुए मुखर्जीनगर इलाके में धारा 144 लागू है.

 

आपको बता दें कि एस के खन्ना कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सिविल सेवा का पैटर्न 2011 से बदला गया. इसके तहत प्रारंभिक परीक्षा में सीसैट यानी सिविल सर्विसेज एप्टिट्यूड टेस्ट नाम का एक नया पेपर जोड़ दिया गया. 200 नंबर के नए सीसैट पेपर से अंग्रेजी और एप्टिट्यूड का टेस्ट लिया जाने लगा. सीसैट के पेपर में ढाई-ढाई नंबर के कुल 80 सवाल होते हैं जिसमें से 8 सवाल अंग्रेजी कॉम्प्रिहेंशन के होते हैं जबकि 32 सवालों के जरिए रीजनिंग, अंकगणित और फैसले लेने की क्षमता आंकी जाती है.

 

आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि सी सैट के 40 सवाल अंग्रेजी में होते हैं और उनका हिंदी अनुवाद समझने लायक नहीं होता. ऐसे में अंग्रेजी माध्यम वालों को तो नंबर मिल जाते हैं लेकिन उन्हें नुकसान होता है.

 

अगर साल 2011 से पहले की सिविल सर्विसेज परीक्षा नतीजों पर नजर डालें तो साल 2008 में चुने जाने वाले छात्रों में आर्ट्स के 30 फीसदी थे और इंजीनियरिंग से आने वाले भी 30 फीसदी थे.

 

साल 2009 में आर्ट्स के 33 फीसदी छात्र चुने गए जबकि इंजीनियरिंग के 40 फीसदी लेकिन साल 2011 में सीसैट लागू होने आर्ट्स के सिर्फ 15 फीसदी छात्र चुने गए थे जबकि इंजीनियरिंग पढ़कर आए छात्रों की तादाद 50 फीसदी यानी तीन गुना ज्यादा थी.

 

सीसैट का विरोध करनेवाले छात्र इन आंकड़ों को सामने रखकर दावा करते हैं कि एप्टीट्यूड टेस्ट का पेपर ऐसा सेट किया जाता है कि इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के छात्र उसे आसानी से सॉल्व कर लते हैं लेकिन आर्ट्स के छात्र पिछड़ जाते हैं . अब यहां पर सवाल उठता है कि क्या छात्रों को ये तय करने का हक मिलना चाहिए कि वो किस तरह की परीक्षा देंगे ?

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: upsc_CSAT
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017