क्या आईएएस बनने के लिए अंग्रेजी जरूरी है?

By: | Last Updated: Friday, 25 July 2014 12:47 PM
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नई दिल्ली : यूपीएससी सिलेबस बदलने को लेकर विवाद बढता जा रहा है . सड़क से लेकर संसद तक आज हंगामा हुआ. सरकार ने संसद में कहा कि यूपीएससी की कमेटी की रिपोर्ट एक हफ्ते में आएगी तब इस पर फैसला लिया जाएगा. बड़ा सवाल ये है कि क्या आईएएस बनने के लिए अंग्रेजी जरूरी है?

 

UPSC विवाद(यहां पढ़ें अब तक की पूरी खबर): एडमिट कार्ड जारी होने के बाद बवाल, संसद भवन का घेराव करने वाले छात्रों की पिटाई

 

यूपीएससी सिविल सेवा की तैयारी करने वाले ये छात्र संसद का घेराव करने जा रहे थे . पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया . नतीजा हुआ कि सड़क से लेकर संसद तक हंगामा हुआ .

 

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विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने राज्यसभा में साफ किया कि एडमिट कार्ड आने का ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि पैटर्न पर फैसला हो गया है . सरकार ने यूपीएससी की कमेटी की रिपोर्ट आने तक इंतजार के लिए कहा है .

 

राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि कमेटी बनाई है. एक हफ्ते में रिपोर्ट आ जाएगी. एडमिट कार्ड मतलब पैटर्न नहीं है.

 

CSAT का विवाद

 

सीसैट यानी सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट के पेपर में 80 सवाल पूछ जाते हैं. हर सवाल के लिए ढाई नंबर मिलते हैं. इनमें 40 सवाल कॉम्प्रिहेंशन यानी प्रसंग से होते हैं. जिन पर ऑब्जेक्टिव यानी वैकल्पिक सवाल पूछे जाते हैं. छात्रों का आरोप है कि इन सवालों का हिंदी में अनुवाद इतना कठिन होता है कि समझ नहीं आता है. इसके अलावा आठ सवाल अंग्रेजी में ही पूछे जाते हैं छात्रों का ये भी आरोप है कि प्राथमिक परीक्षा में इसके जरिए अंग्रेजी थोपी जा रही है.

 

 

जितेंद्र सिंह का कहना है कि 22 नंबर का होता है जो दसवीं का होता है. इसके अलावा 32 सवाल रीजनिंग, अंकगणित और डिसीजन मेकिंग के होते हैं जो छात्र का एप्टीट्यूड जांचने के लिए दिए जाते हैं.

 

कैसे शुरू हुआ CSAT का विवाद ?

2010 से पहले प्रीलिम्स यानी प्राथमिक परीक्षा में सामान्य अध्ययन यानी जीएस 150 नंबर का होता था और दूसरा पेपर वैकल्पिक होता था जिसे छात्र अपनी मर्जी से चुनते थे. लेकिन 2011 की परीक्षा से पैटर्न बदला और यूपीएससी ने जीएस 200 नंबर का कर दिया और दूसरा पेपर सीसैट ला दिया. जिसमें अंग्रेजी से लेकर एप्टीट्यूड टेस्ट होने लगा. जिस पर विवाद है . विरोधी पार्टी के नेताओं का कहना है कि हिंदी भाषी छात्रों के साथ भेदभाव हो रहा है.

 

इससे पहले छात्रों ने जब आंदोलन किया था तब कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने उन्हें भरोसा दिया था कि विवाद निपटने तक परीक्षा नहीं होगी . लेकिन एडमिट कार्ड बंटने के बाद छात्र खुद पर काबू नहीं कर सके . नतीजा हुआ कि गुरुवार की रात दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में छात्रों ने हंगामा किया . प्रधानमंत्री ने इस मामले की पूरी जानकारी मंत्री से ली है . और जल्द मामले को निपटाने के लिए कहा है . 24 अगस्त को यूपीएससी की प्रवेश परीक्षा होनी है .

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