मशहूर शायर और गीतकार निदा फाजली नहीं रहे

By: | Last Updated: Monday, 8 February 2016 2:48 PM
Urdu Poet Nida Fazli  passes away

मुंबई: मशहूर शायर और गीतकार निदा फाजली का सोमवार की सुबह 11.30 बजे निधन हो गया है. वे 78 साल के थे और काफी दिनों से बीमार थे.

निदा फाजली उर्दू और हिंदी दुनिया के अज़ीम शायरों और गीतकारों में शुमार होते थे और उनके गीत हरेक की जुबान पर गुनगुनाए जाते हैं.

प्रतिगतिशील वामपंथी आंदोलन से जुड़े रहे निदा फाजली को हर तबके से प्यार मिला और उनके गीतों को हरेक ने पसंद किया.

निदा फाजली का जन्म 1938 में दिल्ली में हुआ और ग्वालियर में पढ़ाई लिखाई हुई. उनके पिता भी शायर थे. बंटवारे के बाद उनके पिता पाकिस्तान चले गए, लेकिन निदा फाजली ने भारत की मिट्टी को ही अपना वतन बनाने का फैसला किया.

यूं तो निदा फाजली ने शायरी के कैनवस पर अपने अनेक गीतों और गज़लों से बॉलीवुड और साहित्य की दुनिया को बड़ा खजाना दिया, लेकिन आपको बता दें कि ‘कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता’ जैसी शाहकार लाइन के खालिक़ भी निदा फाजली ही हैं.

जीवन का सफर

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साल 1964 में नौकरी की तलाश में निदा फाजली मुंबई गए और फिर वहीं के होकर रह गए. उन्होंने अपने शुरुआती करियर के दौरान धर्मयुग और बिलिट मैगजीन के लिए लिखा. तभी उनके लिखने के अंदाज ने फिल्मी दुनिया के दिग्गजों को कायल किया और फिर बॉलीवुड से जो रिश्ता बना हमेशा कायम रहा. फाजली मुशायरों की भी शान रहे हैं.

निदा फाजली ने गज़ल और गीतों के अलावा दोहा और नज़्में भी लिखी हैं और लोगों ने जमकर सराहा है. उनकी शायरी की एक खास खूबी ये रही है कि उनके अ’शार में फारसी शब्दों के बजाय देशी शब्दों और जुबान का इस्तेमाल बहुत ही उमदा तरीके से किया गया है.

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Web Title: Urdu Poet Nida Fazli passes away
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