मोदी तक सम्मन पहुंचाने वाले के लिए 10,000 डॉलर के इनाम की पेशकश

By: | Last Updated: Saturday, 27 September 2014 3:41 AM
USD 10,000 reward for serving summons to Modi

न्यूयॉर्क: वर्ष 2002 में गुजरात में हुए दंगों के सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज कराने वाले नागरिक अधिकार संगठन ने भारतीय प्रधानमंत्री तक अदालत के सम्मन पहुंचाने वाले को 10,000 डॉलर का इनाम देने की घोषणा की है.

 

न्यूयॉर्क में रहने वाले कानूनी सलाहकार गुरपतवंत सिंह पन्नुन ने कल यहां संवाददाताओं को बताया कि “अमेरिकन जस्टिस सेंटर” (एजेसी) ने अगले दो दिनों में शहर में मोदी के विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान अदालत के सम्मन उन तक (मोदी तक) पहुंचाने वाले को 10,000 डॉलर का इनाम देने की पेशकश की है.

 

यह इनाम उस व्यक्ति को दिया जाएगा जो मोदी को सम्मन देगा और सबूत के तौर पर तस्वीर और वीडियो ला कर देगा. यह तस्वीर या वीडियो इस बात का प्रमाण होगी कि उस व्यक्ति ने मोदी तक अदालत का सम्मन पहुंचा दिया.

 

समूह ने मोदी को सम्मन देने के लिए कुछ लोगों को भाड़े पर नियुक्त भी किया है.

 

इस समूह का कहना है कि जो कुछ किया जा रहा है वह न्यू यार्क के कानून के अनुसार किया जा रहा है जिसके मुताबिक, यह काम कम से कम 10 फुट की दूरी से भी किया जा सकता है और संबद्ध व्यक्ति पर ‘‘दस्तावेज फेंके भी जा सकते हैं.’’ इस प्रक्रिया को इस तरह माना जाएगा कि सम्मन दिया जा रहा है.

 

मोदी के खिलाफ सम्मन बृहस्पतिवार को दक्षिणी जिले न्यू यॉर्क की अमेरिकी संघीय अदालत (यूएस फेडरल कोर्ट) ने वर्ष 2002 में गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों में उनकी कथित भूमिका को ले कर जारी किये हैं. तब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. ये सम्मन मोदी के खिलाफ एजेसी और गुजरात में गोधरा दंगों की हिंसा से प्रभावित दो अन्य लोगों द्वारा दायर मुकदमे के सिलसिले में जारी किए गए हैं. यह मुकदमा “एलियन टॉर्ट क्लेम्स एक्टर” और “टॉर्चर विक्टिम प्रोटेक्शन एक्ट” के तहत दायर किया गया है.

 

क्षतिपूर्ति और दंडात्मक कार्रवाई की मांग करने वाली 28 पन्नों की शिकायत में मोदी पर मानवता के खिलाफ अपराध करने, न्यायेत्तर हत्याएं करने, पीड़ितों (अधिकतर मुस्लिम) को प्रताड़ित करने और उन्हें मानसिक एवं शारीरिक आघात पहुंचाने के आरोप हैं.

 

मोदी के अमेरिका आगमन से उन पर “एलियन टॉर्ट क्लेम्स एक्ट” और “टॉर्चर विक्टिम प्रोटेक्शन एक्ट” के तहत आरोप लगाने का विशेष अवसर मिल गया.

 

ये कानून इसलिए लागू किए गए ताकि मानवाधिकारों के हनन के पीड़ित, अमेरिका के बाहर अपराध होने पर भी अपने आरोपियों के खिलाफ न्याय की गुहार लगा सकें.

 

एजेसी के अध्यक्ष जोसेफ व्हाइटिंगटन ने कहा कि मोदी तक सम्मन पहुंचाना आसान नहीं होगा, लेकिन यह वर्ष 2002 के दंगा पीड़ितों के लिए प्रतीकात्मक विजय होगी.

 

पन्नुन ने कहा ‘‘प्रधानमंत्री के रूप में मोदी को उन कार्यो के लिए छूट होगी जो उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर किये लेकिन उन कार्यो के लिए यह छूट नहीं होगी जो उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर किए जिस समय दंगे हुए थे.

 

सम्मन के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इर्द गिर्द सुरक्षा का कड़ा घेरा

न्यूयॉर्क: भारत ने आज बिल्कुल स्पष्ट कर दिया कि पांच दिन की अमेरिका यात्रा पर यहां पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘इर्द गिर्द सुरक्षा का कड़ा घेरा’ है और इस बात का सवाल ही नहीं उठता कि कोई उन्हें सम्मन दे सके तथा मामले में कार्रवाई जारी है.

 

अमेरिका की एक संघीय अदालत द्वारा मोदी के खिलाफ गुजरात में 2002 के सांप्रदायिक दंगों में कथित भूमिका के लिए सम्मन जारी किए जाने के एक दिन बाद भारत की यह कड़ी प्रतिक्रिया आई है.

 

व्हाइट हाउस ने हालांकि इस मुद्दे को कमतर करते हुए इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी है. इसके प्रेस सचिव जोश एर्नेस्ट ने कहा कि इसका (कानूनी वाद) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा पर कोई असर नहीं पड़ने जा रहा. उन्होंने यह भी कहा कि सरकारों के वर्तमान प्रमुखों को अमेरिका में रहने के दौरान निजी संरक्षा प्राप्त है जिसका मतलब है कि कानूनी वाद शुरू करने के लिए उन्हें निजी तौर पर कोई भी दस्तावेज सौंपा या दिया नहीं जा सकता है.

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