कभी सिर पर ढोती थी मैला, अब ब्रिटेन में आवाज बुलंद करेंगी ऊषा

By: | Last Updated: Monday, 6 April 2015 2:55 PM
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नई दिल्ली: राजस्थान में सिर पर मैला ढोने का काम कर चुकी और धर्मार्थ संगठन ‘सुलभ इंटरनेशनल’ की मदद से अपने जीवन में बदलाव लाने वाली एक महिला को इस सप्ताह ब्रिटेन के एक सम्मेलन को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया है.

 

ऊषा चमार बुधवार को ‘स्वच्छता और भारत में महिला अधिकार’ विषय पर पोर्ट्समाउथ विश्वविद्यालय में ‘ब्रिटिश एसोसिएशन आफ साउथ एशियन स्टडीज’ के वाषिर्क सम्मेलन में लोगों को संबोधित करेगी.

 

इस महिला ने नयी दिल्ली से एयर इंडिया के विमान में सवार होने से पहले कहा, ‘‘इस तरह के महत्वपूर्ण सम्मेलन में शामिल होने के लिए ब्रिटेन जाना सपना सच होने जैसा है.’’

 

अलवर शहर की हजूरीगेट हरिजन कालोनी की रहने वाली उषा भारत से बाहर अब तक की सबसे लंबी यात्रा पर बीएबीएएस सम्मेलन में ब्रिटेन के शीर्ष शिक्षाविदों और नीतिनिर्माताओं से मिलेगी.

 

सुलभ इंटरनेशनल के एक प्रवक्ता ने कहा कि उषा सिर पर मैला ढोने का काम करती थी और उसे ‘अछूत’ माना जाता था लेकिन सुलभ इंटरनेशनल ने उसका पुनर्वास किया. अब वह मैला ढोने की पुरानी परंपरा के उन्मूलन के लिए प्रेरणा के तौर पर काम कर रही है.

 

उषा की दस साल की उम्र में शादी हो गई थी और उसे आजीविका के लिए परिवार की पीढ़ियों पुरानी कुप्रथा को ढोने के लिए मजबूर होना पड़ा.

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