अगर हम सड़कों पर नमाज़ नहीं रोक सकते, तो थानों में जन्माष्टमी भी नहीं रोक सकते: CM योगी

अगर हम सड़कों पर नमाज़ नहीं रोक सकते, तो थानों में जन्माष्टमी भी नहीं रोक सकते: CM योगी

‘’मुझे एक बात को लेकर बहुत हैरानी हो रही थी. कहा गया था कि कांवड के दौरान कोई माइक कोई लाउडस्पीकर नहीं बजेगा. तो मैंने कहा वह कांवड यात्रा है या शव यात्रा है? अगर कांवड यात्रा में ढोल, नगारे, चीमटे और डमरु नहीं बजेगा, लोग नाचेंगे गाएंगे नहीं तो फिर वह कांवड यात्रा कैसे हुई?''

By: | Updated: 17 Aug 2017 10:40 AM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक स्थलों और कांवड़ यात्रा के दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल, सड़कों पर नमाज़ पढ़ने और पुलिस थानों में जन्माष्टमी मनाने को लेकर बड़ा बयान दिया है. सीएम योगी ने ने कहा है कि अगर ईद के दिन सड़क पर नमाज पढ़ने पर रोक नहीं लग सकती तो थानों में जन्माष्टमी मनाने पर भी रोक नहीं लग सकती. यही नहीं कांवड़ यात्रा के दौरान लाउडस्पीकर बजाने की छूट की वकालत करते हुए योगी ने कहा कि अगर रोक लगनी है तो हर धर्मस्थल पर लगे.


सीएम योगी कल आरएसएस की केशव संवाद पत्रिका के विशेषांक का लोकार्पण कर रहे थे. सीएम योगी ने इस दौरान पूर्व सपा सरकार को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा, ‘’सड़क पर ईद की नमाज नहीं रोक सकते तो थानों, पुलिस लाइन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने पर रोक लगाने का हक नहीं है.’’


योगी ने कहा, ‘’मुझे एक बात को लेकर बहुत हैरानी हो रही थी. कहा गया था कि कांवड के दौरान कोई माइक कोई लाउडस्पीकर नहीं बजेगा. तो मैंने कहा वह कांवड यात्रा है या शव यात्रा है? अगर कांवड यात्रा में ढोल, नगारे, चीमटे और डमरु नहीं बजेगा, लोग नाचेंगे गाएंगे नहीं तो फिर वह कांवड यात्रा कैसे हुई?'' उन्होंने कहा, ''यूपी के अंदर कावंड के दौरान लाउडस्पीकर बजाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगेगा. मैं आदेश देता हूं कि कांवड यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश होनी चाहिए.''


वहीं, अंत्योदय पर योगी ने कहा, ‘’अंत्योदय के लिए पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने पांच दशक पहले जिन मूल्यों और मुद्दों को सामने रखा, देश और प्रदेश सरकार उनका अनुसरण करते हुए मजबूती से आगे बढ़ रही है. अंत्योदय देश, दुनिया की चुनौतियों से जुड़ा ऐसा मुद्दा है जो हर देश, काल और परिस्थिति में शाश्वत है.’’


उन्होंने कहा, ‘’प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जन-धन योजना में अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के बैंक खाते इसीलिए खुलवाए क्योंकि उनके पास पंडित दीनदयाल की अंत्योदय की सोच थी.’’

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