जानें- क्या है सीएम योगी आदित्यनाथ के 20 घंटे जागने का राज ?

By: एबीपी न्यूज़ | Last Updated: Monday, 20 March 2017 9:11 AM
जानें- क्या है सीएम योगी आदित्यनाथ के 20 घंटे जागने का राज ?

गुल मोहम्मद खान बगल के बनासकांठा जिले के वडगाम तालुका के पसवादर गांव में एक मुस्लिम परिवार में जन्मे थे. गुल मोहम्मद के पूर्वज पठान थे और अफगानिस्तान से आकर गुजरात के इस हिस्से में बसे थे. गुल मोहम्मद खान बचपन से ही हिंदू दर्शन और अध्यात्म में रुचि दिखाने लगे थे. उनके पिता असीम खान भी नाथ संप्रदाय के संतों की इज्जत किया करते थे. ऐसे में किशोरवस्था पूरी होते-होते गुल मोहम्मद नाथ संप्रदाय के संत बालकनाथजी के काफी करीब आ गये और आगे चलकर बालकनाथ जी से दीक्षा लेकर ही नये अवतार में आये, बन गये गुलाबनाथ. यही गुलाबनाथ आगे चलकर नाथ संप्रदाय के विसनगर मंदिर के गादीपति भी बने और साठ साल तक इस जिम्मेदारी को निभाते रहे.

लखनऊ: योगी आदित्यनाथ रोज़ाना सिर्फ तीन से चार घंटे ही सोते हैं. सुबह तीन बजे उठ जाना और रात करीब 12 बजे तक जागते रहना. इस दौरान कामों की फेहरिस्त भी बड़ी लंबी होती है.  ज़ाहिर है बगैर पूरी नींद लिए ऐसी दिनचर्या बेहद मुश्किल है. कम नींद में काम चलाने और खुद को स्वस्थ रखने लिए योगी आदित्यनाथ एक बेहद खास योग करते हैं.

योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के लगातार पांचवे सांसद बने और अब यूपी के सीएम बन चुके हैं. ज़ाहिर है इतने बड़े जनाधार वाले नेता की दिनचर्या भी आसान नहीं होगी. उन्हें बेहद करीब से जाननों वालों के मुताबिक योगी आदित्यनाथ रोज़ाना सिर्फ तीन से चार घंटे ही सोते हैं.

अब सवाल ये है कि आखिर इतनी कम नींद से वो अपना काम कैसे चलाते हैं. इसका जवाब है योग. योगी आदित्यनाथ रोज़ाना नियम से हठ योग करते हैं. जानकारों के मुताबिक हठ योग करने वालों को तीन-साढ़े तीन घंटे की गहरी नींद भी पर्याप्त होती है.

यानि हठयोग के ज़रिए योगी आदित्यनाथ अपने आप को स्वस्थ रखते हैं और इतनी कम नींद लेने के बावजूद उनके शरीर पर इसका कोई असर नहीं पड़ता.

क्या है हठ योग ?

हठ योग कई योगासनों का मिश्रण है. जिसे नियम से करना ही हठ योग कहलाता है. यानि शरीर, मन और मष्तिष्क के संतुलन का नाम है हठ. इसका अविवाहित होने या संत होने से कोई लेना देना नहीँ है.  हठ ‘ह’  व ‘ठ’ दो शब्दों से मिलकर बनता है. ‘ह’ का अर्थ होता है ‘सूर्य’ और ‘ठ’ का अर्थ ‘चंद्र’ है. हठ योग इन दोनों शब्दों का संयोजन है. हिन्दू संस्कृति में माना जाता है की खुद भगवान शिव ने इस योग को दिया है.

कोई भी कर सकता है हठयोग

यह योग मन और प्राण में छिपी अनंत शक्तियों का विकास करने वाला है. नौकरी करने वाले या यहां तक की गृहस्थ जीवन में रह रहे लोग भी इसे अपनाकर इसका लाभ प्राप्त कर सकते है. इस योग के सात अंग बताए गए हैं जैसे की षट्कर्म, आसन, मुद्रा, प्रत्याहार, प्राणायाम, ध्यान और समाधि. हठयोग में करीब 12 आसन रोज करने होते हैं. सूर्य नमस्कार और प्राणायाम भी हठयोग में शामिल होता है. हठयोग करने के लिए किसी पर भी पाबंदी नहीं है. शरीर,मन और मष्तिष्क के संतुलन का नाम ही हठयोग है.

हठ योग के सात अंग के बारे में जानें

षटकर्म- षटकर्म का अर्थ होता है छः कर्म. षट्कर्म हठयोग में बतायी गयी छः क्रियाएँ हैं. यह आसन हमारे शरीर में शक्ति की वृद्धि करते हैं. इनसे हमारे अंदर सुख और शांति का समावेश होता है.

आसन- सुखपुर्वक और स्थिरतां से जिसमे बैठ सके वही उप्युक्त आसन कहलाता है. यह आसान स्वास्थ्य लाभ और शारीरिक व्याधि से मुक्ति के लिए किये जाते है. इसे करने से शरीर से कई विकारों का विनाश हो जाता है.

प्राणायाम- प्राणायाम का अर्थ प्राण पर नियंत्रण होता है. इसे कई लोग “कुम्भक” के नाम से भी जानते है. मन और इंद्रियों पर नियंत्रण पाने के लिए यह व्यायाम आव्यशक है. प्राणायाम की सिद्धियों से प्रत्याहार की प्राप्ति होती है.

मुद्रा- यह आसान मन को आत्मा के साथ संयुक्त करने में सहायता करता है. मुद्रा का अभ्यास योग्य मार्गदर्शक के उपस्थिति में ही किया जाना चाहिए. इसके अलावा आसन और प्राणायाम दोनो क्रियाओं के परिपुर्ण होने के बाद ही मुद्रा मे प्रवेश करना चाहिए.

प्रत्याहार- प्रत्याहार में इंद्रियों को साधा जाता है. और जब इनकी ज़रुरत होती है तभी इनका प्रयोग करते है. जितना हो सके हम इनको शांत रखते है. प्रत्याहार में मन को साधना होता है. इसमें हम इंद्रियों के मालिक बनने लगते है.

ध्यानासन- शरीर में शक्तियों का समावेश करने और सामंजस्य बनाने, इसके अतिरिक्त मन को शांति और आलौकिक आनंद से परिपूर्ण करने में ये आसन फायदेमंद होते है.

समाधि- ऋषि मुनीओं ने ऐसी आध्यात्मविध्या ढुंढ निकली है जिससे व्यक्ति सुख शान्ति का अनुभव कर सकता है, जो कभी खत्म नहीं होती. इसी सिद्धांत को समाधि में बताया गया है.

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First Published: Monday, 20 March 2017 7:52 AM

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