बीजेपी ने गिनाए वो तीन कारण जिसकी वजह से लगा राष्ट्रपति शासन!

By: | Last Updated: Monday, 28 March 2016 11:45 AM
Uttarakhand crisis: Arun Jaitley says Uttarakhand’s Harish Rawat Government was unconstitutional

नई दिल्ली: बहुमत परीक्षण की तय तारीख से एक दिन पहले उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने पर कांग्रेस भड़क गई है. कांग्रेस इसे असंवैधानिक बताते हुए कोर्ट में जाने की बात कह रही है. वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली तीन तर्कों का हवाला देकर राष्ट्रपति शासन के फैसले को सही ठहरा रहे हैं.

कपिल सिब्बल सवाल उठाया है कि बहुमत परीक्षण से एक दिन पहले राष्ट्रपति शासन की हड़बड़ी क्यों ? उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के पीछे कांग्रेस ने मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाया. तो जवाबी हमले के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली खुद मोर्चे पर उतर आए.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि उत्तराखंड में लगातार संविधान का उल्लंघन हो रहा था. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की मोदी सरकार की सिफारिश के पीछे तीन कारण गिनाए.

जेटली के मुताबिक 18 मार्च को वित्त विधेयक पेश करने के दौरान 9 विधायकों की खिलाफत के बाद ही हरीश रावत सरकार अल्पमत में आ गई थी.

जेटली के मुताबिक उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल ने वित्त विधेयक पर मत विभाजन की मांग को खारिज कर उसे पास बताना भी असंवैधानिक कदम था.

जेटली का दूसरा तर्क था. उत्तराखंड में वित्त विधेयक पर सरकार के मंत्री और विधायकों का अविश्वास जताने के मतलब ये वित्त विधेयक पास नहीं हुआ था, इस लिहाज से एक अप्रैल से उत्तराखंड सरकार के पास सरकारी खर्च करने का अधिकार ही नहीं बचता है, जो सबसे बड़ा संवैधानिक संकट है.

जेटली का तीसरा तर्क था कि खरीद-फरोख्त का कथित स्टिंग सामने आने के बाद हरीश रावत नैतिक रूप से भी सरकार में रहने का अधिकार खो चुके थे.

वित्त मंत्री अरुण जेटली के तमाम आरोपों के जवाब में कांग्रेस ने उत्तराखंड के राज्यपाल को 18 मार्च को भेजी गई बीजेपी को वो चिट्ठी दिखाई. जिसमें कांग्रेस के नौ बागी विधायकों के नाम भी थे. कपिल सिब्बल ने कांग्रेस विधायकों के इस कदम को पार्टी से स्वैच्छिक इस्तीफा ठहराया…और कहा-दलबदल कानून के तहत ये बागी विधायक तभी अयोग्य साबित हो गए थे.

कांग्रेस ने स्टिंग के आधार पर उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने को भी बचकाना और असंवैधानिक करार दिया.

राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए केंद्र पर हमला बोलते हुए कांग्रेस ने कहा कि वह अदालत में फैसले को चुनौती देगी. साथ ही दर्शाएगी कि नरेंद्र मोदी सरकार पार्टी द्वारा शासित सभी राज्यों में सरकारों को ‘अस्थिर’ करने में लगी हुई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि राष्ट्रपति शासन उत्तराखंड में सदन में शक्ति परीक्षण से एक दिन पहले लगाया गया. क्योंकि केंद्र जानती था कि मुख्यमंत्री हरीश रावत अपना बहुमत साबित करने में सक्षम होंगे.

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘हम अदालतों का दरवाजा खटखटाएंगे. हम राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर करेंगे और इसे वापस लिए जाने की मांग करेंगे.’ उन्होंने कहा, ‘हम अदालत में उन्हें कानून बताएंगे.’ उनके अनुसार ‘हम अदालत को दर्शाएंगे कि केंद्र सरकार में बैठे लोग ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ की अपनी नीति की वजह से कांग्रेस शासित प्रत्येक राज्य को अस्थिर करने के लिए जिम्मेदार हैं.’ सिब्बल ने कहा, ‘मैं हैरान हूं कि कोई सरकार जो लोकतंत्र और संविधान में विश्वास करती है वो किसी पार्टी की विरासत को समाप्त करने की कोशिश करेगी.’

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी खरीद-फरोख्त की कला में सिद्धहस्त है. वरिष्ठ अधिवक्ता उच्चतम न्यायालय में अरूणाचल प्रदेश मामले में अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को वहां उठाएंगे और अदालत से कहेंगे कि केंद्र अन्य राज्यों में भी उस मॉडल को दोहराएगा. केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली का नाम लिए बिना उनपर हमला करते हुए सिब्बल ने कहा कि लोग उन लोगों को नहीं बख्शेंगे जो कानून के विद्वान हैं और तब भी फैसला किया. जेटली ने ऐसा समझा जाता है कि कल रात राष्ट्रपति को राष्ट्रपति शासन लगाने की कैबिनेट की सिफारिश के पीछे के तर्क के बारे में कल देर रात राष्ट्रपति को जानकारी दी थी.

सिब्बल ने कहा, ‘संवैधानिक तंत्र की विफलता क्या है. क्या राज्य में कोई दंगा हुआ था. कौन कहेगा कि (उत्तराखंड विधानसभा में) वित्त विधेयक पारित हुआ है या नहीं. विधानसभा अध्यक्ष या जेटली.’ उन्होंने कहा, ‘तब वे कहेंगे कि एक स्टिंग था. पहले आप फर्जी स्टिंग करते हैं और तब राष्ट्रपति शासन लगाते हैं.’

कपिल सिब्बल ने सीधा आरोप लगाया कि बीजेपी…अरुणाचल की तहत हर उस राज्य में तख्तापलट करने की कोशिश में है, जहां कांग्रेस की सरकार है.

बीजेपी के तर्कों को खारिज करते हुए कांग्रेस अब राष्ट्रपति शासन के फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में है. दावा ये है कि कोर्ट में मोदी सरकार का ये फैसला नहीं ठहर पाएगा.

…तो ऐसे बन सकती है बीजेपी की सरकार?

कांग्रेस के बागी विधायक हरक सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड में अभी चुनाव होने में सात-आठ महीने बाकी हैं. बीजेपी ने अगर सरकार बनाने की पहल की तो हम उनका साथ देंगे. हरक सिंह रावत ने कहा कि हमने राष्ट्रपति शासन की मांग नहीं की थी, लेकिन कोई विकल्प नहीं था. हरक सिंह ने आरोप लगाया कि हरीश रावत की सरकार में माफियाओं का दबदबा था.

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, मैं उत्तराखंड के हर निवासी से पूछना चाहता हूं कि ये राज्य अब जनसेवा, नीतियों और प्लानिंग से चलेगा या फिर स्टिंग और दल बदल से? उत्तराखंड के पूर्व सीएम और कांग्रेस के बागी विधायक विजय बहुगुणा ने राष्ट्रपति शासन लगाने का किया स्वागत. उन्होंने कहा कि हरीश रावत ने किसी की नहीं सुनी.

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में जश्न मनाया गया. कार्यकर्ताओं को बीजेपी सरकार बनने की उम्मीद है. हरीश रावत ने राष्ट्रपति शासन को लोकतंत्र और संविधान की हत्या बताया. मोदी सरकार पर उत्तराखंड में दल-बदल करवाने का आरोप लगाया.

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Web Title: Uttarakhand crisis: Arun Jaitley says Uttarakhand’s Harish Rawat Government was unconstitutional
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