12000 करोड़ रुपये से होगा काशी का कायाकल्प

By: | Last Updated: Sunday, 2 November 2014 2:21 PM

नई दिल्ली: भीड़-भाड़ और गंदगी से भरी देश की प्राचीन नगरी वाराणसी को एक धरोहर नगरी के रूप में विकसित करने में 11,800 करोड़ रुपये (दो अरब डॉलर) खर्च होने का अनुमान है. यह अभी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा क्षेत्र है.

 

शहरी विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि 12 लाख की आबादी वाले इस शहर के विकास की परिकल्पना के तहत गंगा में नदी में क्रूज चलाई जाएगी, एक भोजपुरी फिल्म नगरी बसाई जाएगी, एक अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक और दार्शनिक संस्थान स्थापित किया जाएगा.

 

अधिकारी ने कहा कि योजना की लांचिंग 25 दिसंबर के आसपास करने की योजना है. यह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी का जन्म दिन है. मोदी जो 100 स्मार्ट शहर बनाना चाहते हैं, उनमें वाराणसी एक महत्वपूर्ण शहर है.

 

राजनैतिक और प्रशासनिक लापरवाही के कारण वाराणसी की हालत दयनीय हो चुकी है. चारो ओर गंदगी और अस्तव्यस्तता का माहौल है. सड़क पर गाय-भैंसे चलती रहती हैं. अधिकतर घाट गंदे और असुरक्षित हैं.

 

11,800 करोड़ रुपये की योजना मोदी के सामने पेश की जा चुकी है. योजना के तहत केंद्र सरकार 2,082 करोड़ रुपये का योगदान करेगी और उत्तर प्रदेश की सरकार 1,488 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जबकि शेष 8,230 करोड़ रुपये का निवेश निजी और विदेशी कंपनियां करेंगी.

 

योजना के तहत श्मशान स्थलों का आधुनिकीकरण होगा, पारंपरिक संरचनाओं का जीर्णोद्धार होगा. काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास के क्षेत्र का आधुनिकीकरण होगा. प्रस्ताव में 24 घंटे बिजली, पानी आपूर्ति, ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और उपरिगामी मार्ग भी शामिल है.

 

अधिकारी ने कहा कि शहर में ई-लर्निग स्कूल, विधवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर, 100 एकड़ क्षेत्र में जैविक उद्यान और विश्वस्तरीय स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा.

 

शहर में संगीत और नृत्य, साहित्य और कविता के लिए अकादमिक केंद्र, पौर्वात्य भाषा स्कूल भी प्रस्तावित है. अधिकारी के मुताबिक, 15 दिसंबर तक योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल जाएगी.

 

योजना पांच से सात साल में पूरी हो सकती है. मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि इसे अंजाम देने की जिम्मेवारी स्थानीय शहरी और नगरपालिका निकाय की है.

 

अधिकारी ने कहा कि उपरिगामी मार्ग, वर्षाजल निकास, अवजल निकास प्रणाली, स्टेडियम और गंगा तथा घाटों की सफाई का काम सितंबर 2019 तक पूरा होना है.

 

मेट्रो रेल तथा सैटेलाइट टाउनशिप जैसी परियोजना की पूर्णता सितंबर 2021 तक हो सकती है.

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