वर्जीनिया वुल्फ, मलाला और बीबीपुर की औरतें : अधिकारों की नयी जंग

By: | Last Updated: Sunday, 13 July 2014 6:46 AM

जींद: देश की राजधानी दिल्ली से करीब 100 किलोमीटर दूर हरियाणा के जींद जिले के इस छोटे से गांव में पार्वती, सुमित्रा , सुनीता और कमला नाम की महिलाएं नारी मुक्ति की एक नयी जंग का सबक सीखने जा रही हैं . इन्होंने वीरांगना के रूप में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम तो बहुत सुना है लेकिन अब ये ‘‘ए रूम आफ वन्स ओन’’ की क्रांतिकारी नारीवादी लेखिका वर्जीनिया वुल्फ से लेकर महिला शिक्षा की अंतरराष्ट्रीय पैरोकार बनकर उभरी मलाला युसूफजई को भी पढ़ेंगी .

 

कन्या भ्रूण हत्या और ऑनर कीलिंग के लिए बदनाम राज्य हरियाणा के इस गांव में समाज को इन कुप्रथाओं के खिलाफ खड़ा करने का बीड़ा उठाने वाले युवा सरपंच 30 वर्षीय सुनील जागलान ने ‘भाषा’ को बताया कि गांव में महिलाओं के लिए विशेष रूप से एक पुस्कालय स्थापित किया जा रहा है .

 

पुस्तकालय का उद्घाटन आगामी बुधवार को राष्ट्रीय वालीवाल टीम की खिलाड़ी पूनम सिवाच द्वारा किया जाएगा.

 

उन्होंने बताया कि इस पुस्तकालय के लिए स्त्रियों के अधिकारों , उनकी समस्याओं , स्त्री विमर्श तथा उनकी मुक्ति संबंधी विषयों पर आधारित करीब ढाई हजार पुस्तकें मंगायी गयी हैं .

 

इन ढाई हजार पुस्तकों में 19वीं सदी की महान नारीवादी ब्रिटिश लेखिका वर्जीनिया वुल्फ की ‘‘अ रूम आफ वन्स ओन’’ से लेकर तस्लीमा नसरीन की ‘‘औरत के हक में’’ , महात्मा गांधी द्वारा लिखित ‘‘विवाह समस्याएं अर्थात स्त्री जीवन’’ , हिंदी लेखिका मैत्रेयी पुष्पा की ‘‘आज की नारी’’और प्रभा खेतान की ‘‘बाजार के बीच , बाजार के खिलाफ’’ प्रमुख हैं .

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Web Title: VERJINIA_WULF_MALALA
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