आलोचना और सवाल उठाए जाने की असहनशीलता है: उपराष्ट्रपति

By: | Last Updated: Monday, 11 January 2016 9:16 AM
vice president gives another statement on intolerance

नयी दिल्ली: देश में असहिष्णुता को लेकर चल रही बहस के बीच उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा है कि इन दिनों लोग अपनी आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं. ‘‘अतार्किक आस्था एवं विश्वासों” पर बरसते हुए उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि समाज में ‘‘आलोचना और सवाल उठाए जाने की असहनशीलता’’ है, जिसमें असहमति जाहिर करने वाले लोगों का बहिष्कार कर दिया जाता है या उनकी हत्या कर दी जाती है . देश में ‘असहनशीलता’ पर चल रही बहस के बीच उप-राष्ट्रपति ने यह टिप्पणी की है .

यहां ‘‘वैज्ञानिक सोच: ज्ञान आधारित समाज की पूर्व शर्त’’ के विषय पर एक परिचर्चा का उद्घाटन करते हुए अंसारी ने कहा कि अवैज्ञानिक पूर्वाग्रहों और आदतों पर आधारित अतार्किक आस्था एवं विश्वास, संदेहास्पद नींव अब भी कायम हैं .

‘‘आलोचना एवं सवाल उठाए जाने की असहनशीलता’’ होने का दावा करते हुए अंसारी ने कहा, ‘‘तथ्यों से मिथकों को, पौराणिक कथाओं से इतिहास को, वैज्ञानिक तौर पर सत्यापित तथ्यों से विश्वास को अलग करने की कोशिश कर इन पर लगातार हमले किए जा रहे हैं . और तो और, रहस्य को वैज्ञानिक कहा जा रहा है और अंधविश्वास को संस्कृति कहा जा रहा है .’’

उप-राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे रवैयों ने ‘‘अक्सर अप्रिय एवं हिंसक मोड़ ले लिया है, किताबें प्रतिबंधित की गई हैं या उन्हें प्रसार से वापस ले लिया गया है . पुस्तकालयों को जला दिया गया . असहमति जाहिर करने वाले लोगों का बहिष्कार किया गया या उन्हें जान से मार दिया गया . सामाजिक शांति भंग की गई और नागरिकों पर हिंसा की गई .’’ अंसारी ने कहा, ‘‘इन सभी मामलों में आम धारणा ये है कि सवाल करने से भावनाएं आहत होंगी, मौजूदा व्यवस्था को नुकसान होगा, सामाजिक व्यवस्था बाधित होगी या यह कमजोर पड़ जाएगी .’’

अंसारी ने कहा कि यहां तक कि वैज्ञानिक भी ऐसे चलनों के आगे झुक जाते हैं जिनसे वैज्ञानिक सोच को नुकसान होता है . उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली युवा मस्तिष्क में इस सोच का संचार करने के लिए पर्याप्त रूप से प्रभावी नहीं है . उप-राष्ट्रपति ने कहा कि नवाचारों और वैज्ञानिक शोध के पोषण और उन्हें बनाए रखने की पूर्व शर्त समाज में वैज्ञानिक सोच की स्वीकार्यता है . उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सही माहौल और ढांचा तैयार करने की जरूरत है .

अंसारी ने कहा, ‘‘हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में वैज्ञानिक सोच की कमी अक्सर देखी जाती है . हमारे पारिवारिक जीवन में हम सवाल स्वीकार नहीं करते . ज्यादातर माता-पिता को नहीं पसंद होता है कि उनके बच्चे सवाल करें . स्कूलों में नर्सरी से लेकर हाई स्कूल तक शिक्षक बच्चों द्वारा सवाल करने पर बरस पड़ते है.’’

उप-राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में सवालों को गुस्ताखी माना जाता है और समझा जाता है कि छात्र शिक्षक के ज्ञान पर संदेह कर रहा है .’’ उन्होंने कहा कि हमारे सामाजिक रीति-रिवाजों, विरासत में मिली परंपरा और आस्था के मामलों में भी ऐसी सोच झलकती है.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: vice president gives another statement on intolerance
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: hamid ansari Intolerance vice president
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017