माल्या केस: जेटली का राहुल पर पलटवार, कवात्रोकी के भागने पर आपका क्या है ख्याल?

By: | Last Updated: Thursday, 10 March 2016 4:47 PM
Vijay Mallya issue raised in Parliament

नई दिल्ली : विजय माल्या के फरार होने पर राज्यसभा में कांग्रेस और सरकार के बीच तूतू-मैंमैं हुई. कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार ने माल्या को भगाया तो जेटली ने कहा कि यूपीए सरकार ने माल्या को मालदार बनाया.

माल्या को लेकर राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा सरकार ने क्यों भागने दिया. माल्या को फर्स्ट क्लास से इंग्लैंड भेजा गया. मोदीजी की फेयर एंड लवली स्कीम का फायदा उठाकर भागा माल्या.

इसके जवाब में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि माल्या को उस समय लोन दिया गया जब उनकी बैंक अकाउंट अच्छी स्थिति में नहीं थे. इसके साथ ही उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि यूपीए के शासनकाल में ही माल्या पर मेहरबानी हुई है.

साथ ही उन्होंने कहा कि यूपीए को माल्या के मुद्दे पर सोचना चाहिए. वित्तमंत्री ने पूछा कि आखिर 2009 में NPA होने के बाद भी माल्या पर मेहरबानी क्यों हुई. जेटली ने राहुल को क्वात्रोची की भी याद दिलाई.

माल्या तो उड़ चुके हैं लेकिन देश में अब उनके भागने की वजह तलाशी जा रही है. नौ हजार करोड़ के बैंक डिफॉल्टर माल्या को एयरपोर्ट पर रोकने के लिए नहीं सिर्फ बताने का लुक आउट नोटिस जारी किया गया था. यही वजह है कि विजय माल्या 2 मार्च को जेट एय़रवेज के विमान से लंदन चले गए.

विजय माल्या के खिलाफ सीबीआई ने जुलाई 2015 में आईडीबीआई बैंक लोन मामले में खुद ही भ्रष्टाचार और आपराधिक षडयंत्र की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था. सीबीआई को शक है कि आईडीबीआई बैंक से लोन पास करवाने के लिए माल्या ने 16 करोड़ की घूस दी. तीन महीने बाद अक्टूबर 2015 में माल्या के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी और इसी के बाद सीबीआई ने माल्या के खिलाफ लुकआऊट नोटिस जारी कर दिया था.

लुक आऊट नोटिस एक इंटरनल सर्कुलर की तरह होता है जिसमें जांच एजेंसी को किसी शख्स के बारे में जैसी जानकारी चाहिए होती है उस हिसाब से जारी किया जाता है इसमें उसे रोकने से लेकर गिरफ्तारी तक शामिल है.

लुकआउट नोटिस सीधे एय़रपोर्ट इमीग्रेशन विभाग को भेजा जाता है औऱ उसमें जिस शख्स को रोका जाना होता है उसके बारे में जानकारीदेते हुए निर्देश दिए जाते हैं. जैसे एयरपोर्ट के भीतर घुसने से रोक दिया जाए, विमान में ना चढने दे, शख्स के आने पर सूचना दें, चुपके से जानकारी दें इसके साथ ही हिरासत में ले लें ताकि भागने ना पाए.

एयरपोर्ट इमीग्रेशन विभाग आईबी यानि इंटेलीजेंस ब्यूरो के अधीन आता है. आईबी सूत्रों के मुताबिक विजय माल्या के बारे में जो सर्कुलर जारी किया गया था उसमें केवल उनके एय़रपोर्ट पर आने की सूचना देने को कहा गया था. दो मार्च को जब विजय माल्या दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे तो इमीग्रेशन अधिकारियो ने सीबीआई को इसकी सूचना दी और अगला निर्देश पूछा लेकिन सीबीआई ने उऩ्हे रोकने को नहीं कहा औऱ माल्या लंदन चले गए. यानी आईबी की सूचना के बावजूद सीबीआई ने माल्या को जानबूझकर जाने दिया

सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कैमरे पर आए बिना सफाई दी है कि विजय माल्या से आईडीबीआई बैंक घोटाले में दो बार पूछताछ की जा चुकी है औऱ फिलहाल सीबीआई को उनकी जरूरत नहीं थी लिहाजा उन्हें रोकने के बारे में नहीं कहा गया औऱ भविष्य में जरूरत पडने पर उन्हें फिर पूछताछ के लिए बुलाया जायेगा. ये नोटिस पिछले साल जारी किया गया था. हमें किसी बैंक ने उनके यहां हुए घोटाले की सूचना नहीं दी है ऐसे में माल्या को कैसे रोका जा सकता था.

इस मामले में सीबीआई ने आपसी तालमेल की साफ कमी नजर आती है क्योंकि विजय माल्या केवल नौ सौ करोड रुपये के मामले में ही आरोपी नहीं है और जब सीबीआई आईडीबीआई बैंक मामले में सूमोटो लेकर मुकदमे दर्ज कर सकती है तो उसने और बैंको के मामले में सुमोटो क्यों नहीं लिया.

ईडी ने आईडीबीआई बैंक के दो अधिकारियों को समन भी जारी कर दिया है. अब भले इस बात की जांच हो रही है कि विजय माल्या किसकी लापरवाही से भागे लेकिन हकीकत यही है कि माल्या सरहद पार चैन से हैं और देश में संसद से सड़क तक नौ हजार करोड़ के इस कर्जदार पर संग्राम हो रहा है.

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