जानें- क्या होता है लुकआउट नोटिस, कैसे भाग निकले माल्या

By: | Last Updated: Friday, 11 March 2016 1:45 PM
Vijay Mallya: Know all about Lookout Notice

नई दिल्ली: 9 हजार करोड़ लेकर चंपत हो चुके उद्योगपति विजय माल्या ठाठ से लंदन में रह रहे हैं. वहां से ट्वीट करके सफाई दे रहे हैं. मीडिया को धमका रहे हैं. बैंकों को पता नहीं कि उनका पैसा कब कैसे मिलेगा. माल्या के पूरे विवाद में सीबीआई सबसे बड़ी दोषी बनकर सामने उभर रही है.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 2 मार्च को सीबीआई को पता था कि विजय माल्या लंदन जा रहे हैं. एयरपोर्ट से इमिग्रेशन ने सीबीआई को बताया भी था कि माल्या जा रहे हैं लेकिन सीबीआई ने कहा था कि जाने दो. सीबीआई के जाने दो वाले रवैये के पीछे एक और कहानी सामने आई है. कहानी ये है कि सीबीआई ने अक्टूबर में माल्या के नाम लुकआउट नोटिस यानी देश से जाते समय पकड़ लेने का नोटिस जारी किया था लेकिन एक महीने बाद नंवंबर में वो नोटिस वापस ले लिया था.

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लुक आउट नोटिस में बदलाव कर कहा गया कि अगर विजय माल्या देश से बाहर जाने की कोशिश करें तो सीबीआई को जानकारी दी जाए और ये भी बताया जाए कि वो कहां गए हैं. सीबीआई को 2 मार्च को ये पता चला था लेकिन सीबीआई ने कहा था- जाने दो.

विजय माल्या के खिलाफ सीबीआई ने जुलाई 2015 में आईडीबीआई बैंक लोन मामले में खुद ही भ्रष्टाचार और आपराधिक षडयंत्र की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था… सीबीआई को शक है कि आईडीबीआई बैंक से लोन पास करवाने के लिए माल्या ने 16 करोड़ की घूस दी.. तीन महीने बाद अक्टूबर 2015 में माल्या के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी और इसी के बाद सीबीआई ने माल्या के खिलाफ लुकआऊट नोटिस जारी कर दिया था.

अब आपको बताते हैं कि लुक आउट नोटिस क्या होता है-

  • लुक आऊट नोटिस एक इंटरनल सर्कुलर की तरह होता है जिसमें जांच एजेंसी को किसी शख्स के बारे में जैसी जानकारी चाहिए होती है उस हिसाब से जारी किया जाता है इसमें उसे रोकने से लेकर गिरफ्तारी तक शामिल है.
  • लुकआउट नोटिस सीधे एय़रपोर्ट इमीग्रेशन विभाग को भेजा जाता है औऱ उसमें जिस शख्स को रोका जाना होता है उसके बारे में जानकारीदेते हुए निर्देश दिए जाते हैं… जैसे-
  • एयरपोर्ट के भीतर घुसने से रोक दिया जाए, विमान में ना चढने दे
  • शख्स के आने पर सूचना दें
  • चुपके से जानकारी दें
  • हिरासत में ले लें ताकि भागने ना पाए

एयरपोर्ट इमीग्रेशन विभाग आईबी यानि इंटेलीजेंस ब्यूरो के अधीन आता है. आईबी सूत्रों के मुताबिक विजय माल्या के बारे में जो सर्कुलर जारी किया गया था उसमें केवल उनके एय़रपोर्ट पर आने की सूचना देने को कहा गया था. दो मार्च को जब विजय माल्या दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे तो इमीग्रेशन अधिकारियो ने सीबीआई को इसकी सूचना दी और अगला निर्देश पूछा लेकिन सीबीआई ने उऩ्हे रोकने को नहीं कहा औऱ माल्या लंदन चले गए.

यानी आईबी की सूचना के बावजूद सीबीआई ने माल्या को जानबूझकर जाने दिया. सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कैमरे पर आए बिना सफाई दी है कि ‘विजय माल्या से आईडीबीआई बैंक घोटाले में दो बार पूछताछ की जा चुकी है औऱ फिलहाल सीबीआई को उनकी जरूरत नहीं थी लिहाजा उन्हें रोकने के बारे में नहीं कहा गया औऱ भविष्य में जरूरत पडने पर उन्हें फिर पूछताछ के लिए बुलाया जायेगा. ये नोटिस पिछले साल जारी किया गया था. हमें किसी बैंक ने उनके यहां हुए घोटाले की सूचना नहीं दी है ऐसे में माल्या को कैसे रोका जा सकता था.’

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इस मामले में सीबीआई ने आपसी तालमेल की साफ कमी नजर आती है क्योंकि विजय माल्या केवल नौ सौ करोड रुपये के मामले में ही आरोपी नहीं है और जब सीबीआई आईडीबीआई बैंक मामले में सूमोटो लेकर मुकदमे दर्ज कर सकती है तो उसने और बैंको के मामले में सुमोटो क्यों नहीं लिया.

ईडी ने आईडीबीआई बैंक के दो अधिकारियों को समन भी जारी कर दिया है. अब भले इस बात की जांच हो रही है कि विजय माल्या किसकी लापरवाही से देश छोड़कर गए लेकिन हकीकत यही है कि माल्या सरहद पार चैन से हैं और देश में संसद से सड़क तक नौ हजार करोड़ के इस कर्जदार पर संग्राम हो रहा है.

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Web Title: Vijay Mallya: Know all about Lookout Notice
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