माल्या पर सीबीआई ने गलती मानी, अब कहा-गलती से जारी हो गया था विदेश जाने से रोकने वाला नोटिस

By: | Last Updated: Friday, 11 March 2016 7:32 PM
Vijay Mallya to appear soon?

नई दिल्ली: उद्योगपति विजय माल्या पर शिकंजा कसता जा रहा है. इस बीच बढ़ी खबर ये है कि सीबीआई ने विजय माल्या पर आतंरिक जांच बिठा दी है. जांच इस बात की हो रही है कि उस लुक आउट नोटिस को क्यों बदला गया? लुक आउट नोटिस यानी जिसके जरिए किसी शख्स के विदेश जाने की जानकारी एयरपोर्ट से संबंधित एजेंसी को दी जाती है. माल्या के खिलाफ लुकआउट नोटिस को लेकर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई ने गलती मान ली है. सीबीआई ने कहा है कि माल्या को विदेश जाने से रोकने वाला नोटिस गलती से जारी हो गया था.

उद्योगपति विजय माल्या की मुश्किलें बढ़ गई हैं क्योंकि मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय ने माल्या को 18 मार्च को ईडी में पेश होने के नोटिस जारी कर दिए हैं. माल्या की कंपनी के दो बड़े अधिकारियों से पूछताछ के बाद आईडीबीआई बैंक के पूर्व सीएमडी योगेश अग्रवाल समेत चार औऱ लोगों को नोटिस जारी करने जा रहा है. उधर माल्या के खिलाफ सीबीआई दव्रारा लुक आऊट नोटिस एक महीने में बदलने का राज गहराता जा रहा है क्योंकि सीबीआई उस पर अधिकारिक तौर पर बोलने को कुछ तैयार नहीं है औऱ सीबीआई में आतंरिक तौर पर जांच की जा रही है कि ये नोटिस किसी दवाब या लालच में तो नहीं बदला गया.

दो मार्च को दिल्ली से लंदन गए उद्योगपति विजय माल्या की मुश्किलें बढ गई है. आईडीबीआई बैंक घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन आफ मनी लांड्रिग एक्ट के तहत माल्या को नोटिस जारी कर दिया है. ये नोटिल उनके आफिस औऱ उऩके ईमेल पर भेजा गया है.

पीएमएलए के तहत नोटिस माल्या के लिए मुश्किले इस लिए भी बढा सकता है कि यदि माल्या वापस भारत ना लौटना चाहे तो ईडी कानूनी तौर पर लंदन से उन्हे वापस भेजने को कह सकता है औऱ इंटरपोल के जरिए नोटिस भी जारी करा सकता है. सूत्रों का कहना है कि इस नोटिस के बाद माल्या वापस आ सकते हैं.

1103 4pm fb promoप्रवर्तन निदेशालय ने इस बारे में इसी साल जनवरी महीने में मुकदमा दर्ज किया था और इस संबंध में आज आईडीबीआई बैंक के दो अधिकारियों समेत किंगफिशर कंपनी के सीएफओ ए रघुनाथन औऱ माल्या की दूसरी कंपनी के पूर्व सीएफओ को पूछताछ के लिए मुंबई आफिस बुलाया गया था.

ईडी सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के दौरान अनेक अहम जानकारियां सामने आई हैं जिनके आधार पर आईडीबीआई बैंक के पूर्व सीएमडी योगेश अग्रवाल समेत बैंक के चार औऱ अधिकारियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया जायेगा. पूछताछ के दौरान ईडी अधिकारियों ने जानना चाहा कि आखिर किस सिफारिश के आधार पर कंपनी की माली हालत ठीक ना होने के वावजूद बैंक से लोन मिला.

सूत्रों ने बताया कि माल्या की कंपनी के सीएफओ रघुनाथन ने इस बारे में माल्या औऱ आईडीबीआई बैंक के तत्कालीन सीएमडी योगेश अग्रवाल के बीच हुई बातचीत का खुलासा भी किया है साथ ही किन बैंक अधिकारियों के सहयोग से ये लोन पास हुआ उनके नाम भी पूछताछ के दौरान सामने आए हैं. इन अधिकारियों को अगले सप्ताह पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है.

उधर सीबीआई ने विजय माल्या के नोटिस से जुडे तमाम दस्तावेज मुंबई कार्यालय से दिल्ली मुख्यालय मंगाए है जिनके आधार पर जांच की जा रही कि कही ये नोटिस किसी दवाब या लालच में तो नहीं बदले गए.

माल्या के नोटिस औऱ विदेश जाने को लेकर सीबीआई चारो तरफ से घिरी हुई है सीबीआई पर आरोप है कि माल्या के विदेश जाने की सूचना मिलने के बाद भी उसने माल्या को बदली हुई परिस्थितयों में नहीं रोका जबकि बैंक उसके खिलाफ कोर्ट जा रहे थे औऱ माल्या भी अपनी संपत्ति बेच कर विदेश जाने की बात कर रहे थे. दिलचस्प यह भी है कि माल्या जिस दिन दो मार्च को दिन में पौने दो बजे दिल्ली एय़रपोर्ट से लंदन जा रहे थें ठीक उसी समय सीबीआई निदेशक मुंबई में हो रही कांफ्रेस में माल्या के केस का हवाला देकर बैंक अधिकारियों की क्लास कर रहे थे कि उन लोगों ने सीबीआई को अपने साथ हुए घोटाले की शिकायत क्यों नही की?

क्या माल्या को सरकार ने भगाया?

विजय माल्या के विदेश भागने पर बवाल मचा हुआ है. कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि माल्या से फेयर एंड लवली स्कीम के लिए सीक्रेट डील में माल्या को भगाया गया. कांग्रेस ने सीबीआई पर माल्या को भगाने का आरोप लगाया है. सवाल ये है कि क्या माल्या को सरकार ने भगाया?

नौ हजार करोड़ के कर्जदार उद्योगपति विजय माल्या के देश से भागने के पीछे कांग्रेस फेयर एंड लवली स्कीम का हवाला दे रही है.. दरअसल काले धन को सफेद करने के लिए सरकार की योजना को राहुल गांधी ने फेयर एंड लवली स्कीम कहकर ताना कसा था जिसमें जुर्माना भरकर काला धन सफेद करने का मौका दिया गया है…कांग्रेस का आरोप है कि माल्या पर शिकंजा कसने की बजाए सरकार ने ढिलाई बरती और जब कई एजेंसियां माल्या के खिलाफ जांच कर रही थी तब भी उसे देश में ही रोकने की कोशिश नहीं की गई.

सिर्फ सरकार ही नहीं सीबीआई को भी कांग्रेस ने कटघर में खड़ा किया है.. कांग्रेस का आरोप है कि सीबीआई ने एक महीने के भीतर लुक आउट नोटिस बदल दिया जिसकी वजह से माल्या आसानी से भाग निकले.

विजय माल्या के खिलाफ सीबीआई ने जुलाई 2015 में आईडीबीआई बैंक लोन मामले में खुद ही भ्रष्टाचार और आपराधिक षडयंत्र की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था. सीबीआई को शक है कि आईडीबीआई बैंक से लोन पास करवाने के लिए माल्या ने 16 करोड़ की घूस दी.. तीन महीने बाद अक्टूबर 2015 में माल्या के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी और इसी के बाद सीबीआई ने माल्या के खिलाफ लुकआऊट नोटिस जारी कर दिया था जिसे एक महीने बाद आसान कर दिया गया.

एबीपी न्यूज ने गुरुवार को ही बताया था कि सीबीआई की लापरवाही से माल्या देश छोड़ने में कामयाब हो गया क्योंकि एयरपोर्ट पर जो लुकआउट नोटिस दिया गया था उसमें सिर्फ जानकारी देने की बात कही गई थी.

एयरपोर्ट इमीग्रेशन विभाग आईबी यानि इंटेलीजेंस ब्यूरो के अधीन आता है.. आईबी सूत्रो के मुताबिक विजय माल्या के बारे में जो सर्कुलर जारी किया गया था उसमें केवल उनके एय़रपोर्ट पर आने की सूचना देने को कहा गया था दो मार्च को जब विजय माल्या दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे तो इमीग्रेशन अधिकारियो ने सीबीआई को इसकी सूचना दी और अगला निर्देश पूछा लेकिन सीबीआई ने उऩ्हे रोकने को नहीं कहा औऱ माल्या लंदन चले गए.

देश से भागने की खबर को बकवास बताते हुए माल्या ने सफाई दी है कि मैं एक अतंर्राषट्रीय कारोबारी हूं.. भारत से बाहर अक्सर यात्रा करता हूं..मैं भारत से भागा नहीं हूं और न ही भगोडा हूं.. ये सब बकवास है.. भारत के सांसद के तौर पर मैं कानून का सम्मान करता हूं और उसका पालन करता हूं..

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