क्या है किराए पर मिलने वाली पुलिस चौकी का वायरल सच?

क्या है किराए पर मिलने वाली पुलिस चौकी का वायरल सच?

ये बात खटकने वाली है कि आखिर पुलिस चौकी में एक भी पुलिसकर्मी क्यों नहीं दिख रहा?आखिर पुलिस चौकी का इतना बुरा हाल कैसे हो सकता है? पुलिस चौकी की देखरेख क्यों नहीं की गई है?

By: | Updated: 05 Oct 2017 09:21 PM
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक तस्वीर वायरल हो रही है. इस तस्वीर में दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में पुलिस चौकी को किराए पर चढ़ा दिया गया है. सोशल मीडिया पर हर तरफ इस तस्वीर की चर्चा हो रही है.

क्या है दावा?

दावा है कि बस्ती जिले के हर्रैया इलाके की पुलिस चौकी को किराए पर चढ़ा दिया गया है. रात को यहां एम्बुलेंस चालक सोते हैं और दिन में पुलिस चौकी लगती है. इतना ही नहीं, दावा ये है कि चौकी को एम्बुलेंस चालकों को किराए पर देकर पुलिस हर महीने ऊपरी कमाई कर रही है.

इस दावे से नाराज लोग फेसबुक पर लिख रहे हैं, ‘’जब पूरा कानून ही ठेके पर उठा हुआ है तो चौकी किराए पर उठ जाए, कोई बड़ी बात है क्या?’’

सच का पता लगाने जब एबीपी न्यूज़ उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के हर्रैया इलाके पहुंचा तो पता चला कि वायरल तस्वीर हर्रैया के महुघाट चौराहे पर बनी पुलिस चौकी की है. इमारत में सबसे ऊपर पुलिस चौकी लिखा हुआ था, लेकिन बाकी का लिखा मिट चुका था. ऐसा लग रहा था जैसे बहुत वक्त से इमारत की देखरेख नहीं हुई है.

दोनों दरवाजों पर ताला लटका था और आसपास कोई भी पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था. ये बात खटकने वाली थी कि आखिर पुलिस चौकी में एक भी पुलिसकर्मी क्यों नहीं दिख रहा?आखिर पुलिस चौकी का इतना बुरा हाल कैसे हो सकता है? पुलिस चौकी की देखरेख क्यों नहीं की गई है?

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दो साल से यहां एंबुलेंस वाले आते हैं- स्थानीय लोग

स्थानीय लोगों से जब वायरल तस्वीर और उसको लेकर किए जा रहे दावे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया, ‘’पुलिस चौकी है तो लेकिन पुलिसवाले बैठते नहीं है. ताला भी उन्हीं का लगा है, लेकिन कोई भी खोल सकता है.’’ उन्होंने बताया, ‘’पुलिस चौकी किराए पर है या नहीं ये मालूम नहीं है, लेकिन रोज शाम को दो एंबुलेंस आती है और यहां पर लोग सोते हैं. दो साल से यहां एंबुलेंस वाले आते हैं.’’

एएसपी नरेन्द्र सिंह ने बताई चौंकाने वाली बात

पुख्ता जानकारी के लिए जब एएसपी नरेन्द्र सिंह से इस दावे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया, ‘’वहां पर पुलिस विभाग की कोई चौकी नहीं है, वो सरकारी जमीन है.  जनसहयोग से एक दो कमरे चेकिंग और बरसात से बचने के उद्देश्य से बनाए गए हैं.’’ उन्होंने आगे बताया, ‘’इमारत जर्जर और खतरनाक हो गई है. कोई पुलिसकर्मी चेकिंग के लिए भी नहीं जाता. इस जर्जर भवन में कोई भी बैठ सकता है और रुक सकता है.’’

क्या एंबुलेंस वालों से रुकने का पैसा लिया जाता है?

क्या एंबुलेंस वालों से रुकने का पैसा लिया जाता है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘’ऐसा कुछ भी नहीं है, किसी तरह का पैसा नहीं लिया जाता. ना तो हमारा भवन है ना ही पुलिस विभाग का. हो सकता है एंबुलेंस वाले कभी रुक गए हों. किराए वाली बात नहीं है. उसकी चाभी भी पुलिस के पास नहीं है.’’

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झूठा साबित हुआ है दावा

पड़ताल में सामने आया कि तस्वीर में दिख रही इमारत अस्थाई पुलिस चौकी थी जिसका अब इस्तेमाल नहीं होता है. कोई भी आकर इमारत में रुक सकता है. रुकने के लिए किसी तरह का पैसा नहीं लिया जाता. इसलिए हमारी पड़ताल में पुलिस चौकी के किराए पर चढ़ने वाला झूठा साबित हुआ है.

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