... तो फिर वीके सिंह ने वेश्या किसे कहा?

By: | Last Updated: Thursday, 9 April 2015 10:34 AM
vk singh controversy

नई दिल्ली: मीडिया को वेश्या कहने वाले विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने अपने बयान पर सफाई देते हुए प्रेस कांउसिल ऑफ इंडिया को चिट्ठी लिखी है . वीके सिंह ने कहा है कि उन्होंने जो कहा वो मीडिया में सबके लिए नहीं था. बल्कि उन्होंने अपनी टिप्पणी किसी खास के लिए की थी . चिट्ठी में वीके सिंह ने कहा है- 2012 से ही मीडिया के कुछ खास लोग मुझे निशाना बना रहे हैं . मीडिया के कुछ लोग न सिर्फ झूठी खबरें छापते हैं बल्कि उस संस्थान को भी नुकसान पहुंचाया जिसका नेतृत्व मैं बतौर सेना प्रमुख कर रहा था . ये सब कुछ यूपीए सरकार के दौरान हुआ .

 

यूपीए सरकार का मुझे बदनाम करने और अपना एजेंडा था . इस दौरान कुछ लोग मौके का फायदा उठाने के लिए यूपीए सरकार के मुखपत्र की तरह काम करने की कोशिश की . जब मैंने इनके खिलाफ लड़ाई लड़ी और अपना बचाव किया तो मीडिया के कुछ लोगों ने मुझे और मेरी छवि को नुकसान पहुंचाने के उम्मीद में और आक्रमक और कड़ा रूख कर खबरें छापीं . पिछले आम चुनाव के बाद, केंद्र में सरकार बदल गई, लेकिन ऐसे हमले बिना रोक-टोक के जारी रहे.

 

मीडिया को लेकर सफाई और अपनी बातों में वीके सिंह ने आगे लिखा- आज मीडिया की विश्वसनीयता दांव पर है. अगर मीडिया की अपनी अंदरूनी नजर रखने की संस्था प्रभावकारी नहीं हुई तो इन समस्याओं के हाथ से बाहर जाने का खतरा है .

 

पूर्व सेना प्रमुख और विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह सरकार की किरकिरी कराने का कोई मौका नहीं छोड़ते. पहले विवादित बयान देते हैं. फिर मुकर जाते हैं. और मूड बदलने पर खत्म हो चुके मुद्दे पर भी तंज कसकर उसे जिंदा कर देते हैं. उनके इन कारनामों पर जब मीडिया ने उंगली उठाई तो वीके सिंह ने मीडिया को वेश्या तक कह दिया . सवाल ये है कि सरकार ऐसे मंत्री को आखिर निकालती क्यों नहीं?

 

ये देश के विदेश राज्य मंत्री हैं जो जिम्मेदारियों को रोमांच से नापते हैं. यमन में मौत के मुंह में फंसे भारतीयो को निकाला जा रहा है लेकिन जनरल वीके सिंह इसकी तुलना पाकिस्तानी दूतावास में हुए कार्यक्रम से कर रहे हैं.

 

जनरल वीके सिंह से रोमांच पर सवाल नहीं हुआ था लेकिन उन्हें सरकार की किरकिरी और विवादों में रहने की आदत सी हो गई है. वो करते कुछ हैं और फिर कहते कुछ हैं. ताजा विवाद भी उनकी इसी आदत के चारों तरफ चक्कर काट रहा है.

 

दरअसल वीके सिंह को यमन में फंसे भारतीयों के बचाव अभियान की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है. मौत के मुंह से लोगों को बचाने के इस अभियान की मुश्किल को लेकर जब वीके सिंह से सवाल हुआ तो उन्होंने इस अभियान को ना सिर्फ रोमांचकारी बताया बल्कि इसकी तुलना अपने विवादित पाकिस्तानी दूतावास के कार्यक्रम से कर दी और वीके सिंह का ये बयान जब मीडिया में सुर्खियां बना तो मीडिया को ही गाली दे दी. वीके सिंह ने टाइम्स नाउ डिजास्टर हैशटैग के साथ ट्वीट करते हुए लिखा दोस्तों आप presstitutes से क्या उम्मीद कर सकते हैं. पिछली बार अर्नब ने E को O समझ लिया था.

 

इस पर जब एबीपी न्यूज ने टाइम्स नाउ के संपादक अर्नब गोस्वामी से उनकी राय पूछी तो उन्होंने कहा ये घटिया बयान है, एक मंत्री ऐसा बयान कैसे दे सकता है. उनकी बात करे तो अच्छा नहीं करे तो बुरा. बीजेपी इसे वीके सिंह की निजी राय बताते हुए बयान से किनारा कर रही है.

 

लेकिन वीके सिंह और बीजेपी दोनों को ये मालूम होना चाहिए कि एक मंत्री का कुछ पर्सनल नहीं होता. वीके सिंह अपने ट्विटर पेज पर जो कुछ साझा करते हैं उसे आधिकारिक माना जाता है. विदेश राज्य मंत्री वीके का अकांउट वेरीफाइड है. ट्विटर पर वीके सिंह जो कहते हैं वो सिर्फ उनके 4 लाख से ज्यादा फॉलोअर तक नहीं जाता बल्कि मीडिया के जरिए पूरे देश तक जाता है. वीके सिंह को अगर ये समझ नहीं आता तो उन्हें ट्विटर पर अलग से एक पर्सनल अकाउंट बना लेना चाहिए. जहां सिर्फ उनकी निजी राय को जगह मिलेगी.

 

लेकिन ये बात उन्हें ना अब समझ में आ रही है और ना ही तब समझ में आई थी. जब 23 मार्च को वीके सिंह दिल्ली में पाकिस्तान दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए थे. कार्यक्रम शाम 7 बजे शुरू हुआ था. वीके सिंह मंच पर भी नजर आए और मेहमानों के साथ कहकहे भी लगाए और एक घंटे के भीतर वहां से बिना कुछ खाए पिए निकल गए. रात 10 बजे उनका पहला ट्वीट आया फिर ट्वीट्स की सीरीज आ गई जिसने हड़कंप मचा दिया था. वीके सिंह ने कार्यक्रम में जाने को मजबूरी बताया था.

 

एक मंत्री की मजबूरी का रोना विवाद बन गया. सरकार वीके सिंह के इस रुख पर नाराज हुई तो वीके सिंह अपने ट्वीट पर सफाई देने सामने आ गए. औऱ साफ-साफ मुकर गए. तब तो  विदेश राज्य मंत्री अपने बयान से मुकर गए थे लेकिन अब पाकिस्तान कार्यक्रम के बाद किए गए अपने ट्वीट्स में दर्ज duty or disgust के तजुर्बे को एक बार फिर से मुहर लगाते ही दिख रहे हैं.

 

वीके सिंह के ताजा बयान से ऐसा भी लग रहा है जैसे उन्हें अपने काम में मन नहीं लग रहा. मानो जबरदस्ती से उनसे काम करवाया जा रहा है. वीके सिंह एक बार फिर इस अभियान को पाकिस्तान दूतावास की तुलना में कम रोमांचकारी बताकर अपनी सरकार की मंशा पर ही सवाल उठा रहे हैं.

 

अब जब विवाद इतना बढ़ गया है तब भी वीके सिंह बाज नहीं आ रहे . अपने बयान के बचाव में उन्होंने फिर मीडिया पर सवाल उठाते हुए ट्वीट किया है कि मेरे साधारण से बयान का मतलब अगर मीडिया ने ये निकाला कि मेरा यमन जाना पाक दिवस कार्यक्रम में जाने से कम रोमांचकारी है तो ऐसी विकृत मानसिकता से भगवान ही बचाए .

 

इससे पहले भी वीके सिंह अपने बयानों से सरकार की किरकिरी करते रहे हैं. झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने मुख्यमंत्री की शपथ लेने के तुरंत बाद हाथ में झाड़ू उठा ली थी और वो पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा बने थे. रघुबर दास के इस काम की तारीफ खुद प्रधानमंत्री मोदी ने की थी.

 

प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर लिखा कि असाधारण प्रयास… रघुबरदास जी ने ऑफिस के पहले ही दिन स्वच्छ भारत अभियान में हिस्सा लिया… उनका काम काफी प्रेरणा देने वाला है. लेकिन मोदी सरकार के ही विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने स्वच्छता अभियान पर सवाल उठा दिए. वीके सिंह ने ट्विटर पर लिखा कि हमारे स्वच्छता अभियान का लक्ष्य है करना… ना कि फोटो खिंचवाना… लेकिन अधिकतर सिर्फ फोटो पर ही केंद्रित हैं… इस मानसिकता को निकालना आवश्यक है.

 

लेकिन जब बयान पर बवाल हुआ तो वीके सिंह ने सफाई भी देते हुए कहा कि कुछ लोग बेवजह उत्तेजित हो रहे हैं मेरा ट्वीट गाजियाबाद के उन लोगों के लिए है जो मेरा झाडू पकड़कर फोटो ना खिंचाने को उछाल रहे हैं.

 

वीके सिंह के हाथ में तब झाड़ू ना रहा हो लेकिन अब उन्हें ये समझना चाहिए उनके हाथ में विदेश राज्य मंत्री जैसी बड़ी जिम्मेदारी है. ऐसे में विदेश राज्य मंत्री जैसे पद पर रहते हुए अगर वीके सिंह अपने पद की गरिमा नहीं समझते. सरकार के फैसलों का सम्मान नहीं करते. अपने काम पर यकीन नहीं करते और तो और सरकार की छवि से पहले खुद की छवि का ख्याल ज्यादा रखते हैं. तो फिर मंत्रिमंडल में बने क्यों हैं आखिर मोदी सरकार ऐसे मंत्री को निकाल क्यों नहीं देती.

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