तीन पूर्व पीएम के दामादों को सरकार ने लिखी चिट्ठी, विदेश दौरे पर जाने से पहले जानकारी देने का निर्देश

By: | Last Updated: Tuesday, 23 September 2014 4:47 AM
VVIP Security

नई दिल्ली: तीन पूर्व पीएम राजीव गांधी, मनमोहन सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी के दामादों के साथ पूर्व पीएम एच डी देवगौड़ा को अपनी विदेश यात्रा का सारा ब्यौरा सरकार को बताना होगा. उन्हें ये बताना होगा कि उनकी यात्रा निजी है या सरकारी. विदेश किसी के बुलावे पर जा रहे हैं तो बताना होगा कि किसने बुलाया और कहां रहेंगे.

 

वीवीआईपी को ऐसी कई जानकारी देने के लिए दिल्ली पुलिस ने चिट्ठी भेजी है. जिन लोगों को चिट्ठी भेजी है उसमें प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा औऱ उनकी सास मॉरीन वाड्रा का भी नाम है.

 

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के दामाद रंजन भट्टाचार्य को भी चिट्ठी भेजी गई है. पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के दामाद आईपीएस अशोक पटनायक, प्रोफेसर विजय तनखा और उनके दो बेटों को भी चिट्ठी भेजी गई है.

 

कुल दस वीवीआईपी को विदेश यात्रा पर जाने से पहले विदेश यात्रा का पूरा ब्यौरा सुरक्षा एजेंसियो को मुहैया कराना पडेगा. केन्द्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर इन दस वीआईपीज को दिल्ली पुलिस ने पत्र औऱ प्रोफार्मा दोनो भेजा है.

 

वीवीआईपीजी सुरक्षा के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब देश के पूर्व प्रधानमत्रियों के परिजनों को लिखित रूप में निर्देश दिया गया है कि वो विदेश यात्रा पर जाने के पहले लिख कर बताए कि विदेश में वो किस के बुलावे पर जा रहे हैं, वहां वो किस जगह रहेगें, उनकी यात्रा व्यक्तिगत है या सरकारी.

 

सूत्रों के अनुसार इसी महीने जिन लोगों को लिखित रूप में पत्र और प्रोफार्मा दिया गया है उनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दामाद आईपीएस अधिकारी अशोक पटनायक और प्रोफेसर विजय तनखा समेत उनके बेटे रोहन पटनायक माधव तनखा और राघव तनखा के नाम शामिल है.

 

इसके अलावा प्रियंका गांधी के पति राबर्ट वाड्रा और प्रियंका गांधी की सास मयूरीन वाड्रा के नाम भी शामिल है. इन नामों में पूर्व प्रधानमंत्री एच डी दैवगौडा औऱ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दामाद रंजन भट्टाचार्य औऱ पोती निहारिका के नाम भी शामिल है.

 

केन्द्रीय गृह मंत्रालय के दस्तावेज में कहा गया है कि विदेशों में वीवीआईपीज की सुरक्षा के मद्देनजर ये कदम उठाया जा रहा है. इन लोगों दवारा विदेश यात्रा की सूचना दिए जाने पर वहां की सरकार से इनकी सुरक्षा सुनिश्चित कराने को कहा जायेगा लेकिन अगर यात्रा व्यक्तिगत औऱ पन्द्रह दिनों से ज्यादा होगी तो सुरक्षा का पूरा खर्च बुलाने वाली संस्था या वीआईपी को उठाना होगा.

 

सुरक्षा की ये कवायद साल 2002 से ही लागू करने की कोशिश की जा रही थी लेकिन इस साल इसे अमलीजामा पहनाया गया है. सूत्रों का कहना है कि वीवीआईपी अपने जाने की सूचना नहीं देते जिसके कारण कभी भी सुरक्षा सकंट खडा हो सकता है.

 

सुरक्षा के इन दस्तावेजों में कहा गया है कि राबर्ट वाड्रा बिना किसी को बताए विदेश चले जाते हैं और अपने किसी भी सुरक्षा अधिकारी को नहीं बताते जिससे सुरक्षा एजेंसियो के सामने असमंजस की स्थिति खडी हो जाती है कि वीआईपी प्रोट्क्टी आखिर कहां गया.

 

देश के दूसरे राज्यों की पुलिस को भी वीआईपीज विदेश यात्रा संबंधी जानकारी मुहैया कराने को कहा गया है लेकिन उसे अभी तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है.