व्यक्ति विशेष: दुर्गा शक्ति नागपाल और वो 41 मिनट

By: | Last Updated: Saturday, 3 August 2013 4:58 AM
vyakti vishesh

दिल्ली से करीब सत्तर किलोमीटर दूर ग्रेटर नोएडा मे एक गांव कादलपुर है. कीचड़ से सनी गलियां, भिनभिनाती मक्खियां और थोडी-थोडी दूरी पर बने छितरे हुए मकान. कादलपुर गांव भी देश के एक आम गांव की तरह ही कुछ दिनों पहले तक गुमनामी की जिंदगी जी रहा था. लेकिन 27 जुलाई को जब कादलपुर गांव में मस्जिद की दीवार गिरी तो इसकी गूंज लखनऊ में बैठे मुख्यमंत्री अखिलेश य़ादव ने भी सुनी, और फिर उसी रात ग्रेटर नोएडा की एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल पर भी निलंबन की गाज गिर पडी.

एसडीएम दुर्गा शक्ति पर बगैर सोचे समझे धार्मिक स्थल की दीवार गिराने से इलाके में सांप्रदायिक माहौल खराब करने का आरोप लगा और उन्हें उनके पद से हटा दिया गया. युवा अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन ने देश की राजनीति में भी उफान ला दिया है. लेकिन जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव निलंबन को लेकर अपनी जिद पर अडे हैं. वहीं दूसरी तरफ उनके विरोधी इसको लेकर सैकडों सवाल खडे कर रहे हैं. लेकिन क्या इस निलंबन के पीछे का सच.

आखिर कौन हैं ये दुर्गा शक्ति नागपाल और क्यों इस अधिकारी के निलंबन को लेकर  देश भर में इतना बवाल मचा हुआ है. ये जानने के लिए आपको झांकना होगा 27 जुलाई 2013 से पहले के वक्त में. जब ग्रेटर नोएडा में एसडीएम के पद पर आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल तैनात थी.

खनन माफिया के छुड़ा दिए छक्के

जुलाई 2013 में एसडीएम दुर्गा शक्ति ग्रेटर नोएडा में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पहली बार सुर्खियों में आई थीं. एक हफ्ते के अंदर ही दुर्गा शक्ति ने 50 से ज्यादा रेत से भरे डंपरों को जब्त कर रेत माफिया के बीच खौफ पैदा कर दिया था. इसी दौरान अवैध खनन के मामले में ओमेंद्र खारी नाम के एक शख्स पर भी उन्होने शिकंजा कसा था.

ओमेंद्र खारी ये नाम आप याद रखिए, क्योंकि आगे आपको बताएंगे दुर्गा शक्ति के निलंबन से ओमेंद्र खारी का कनेक्शन क्या है. लेकिन पहले बात दुर्गा के ऑपरेशन खनन की.

खुद दुर्गा शक्ति ने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि,“देखिए इल्लीगल सैंड माइनिंग ज्यादातर यमुना और हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में हो रही है. तो इसकी दो तीन तरह की शिकायतें हमें ये मिलती है एक तो पर्यावरण को बहुत नुक्सान पहुंचाया जा रहा है. दरबदर खोदने से जो सैंड हैं उसका नुकसान होता है. रेवेन्यू लास हो रहा है गर्वमेंट को साथ ही साथ लोगों के खेतों में भी इसका नुक्सान हो रहा है. वो वहां खेती बाडी नहीं कर पाते हैं और उस इलाके से जब डंपर गुजरते हैं तो उस इलाके से रेत गिराते हुए जाते हैं तो उससे भी उनकी फसल को नुकसान पहुंचता है.”

27 जुलाई से पहले तक एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल का ग्रेटर नोएडा में सक्रिय रेत माफिया के खिलाफ ऑपरेशन अपने ऊरज पर था. लेकिन 27 जुलाई को अचानक अवैध खनन के खिलाफ उनकी इस मुहिम को ब्रेक लग गया. वो कैसे  ये भी बताएंगे आपको आगे लेकिन पहले सुनिए दुर्गा शक्ति की जुबानी यमुना और हिंडन नदी से रेत लूटने वाले डकैतों की आगे की कहानी. दुर्गा शक्ति के मुताबिक,”ये बहुत ज्यादा बडे पैमाने पर हो रहा है यहां और ज्यादातर अर्ली मार्निंग या देर रात को होता है दिन में ये कम होता है. औऱ बहुत ज्यादा डंपर हैं जो दिल्ली से एनसीआर से कनेक्टेड हैं तो यहां से इनके लिए ले जाना काफी आसान है. अभी पिछले हफ्ते में ही हमने तीन रेड करी थी जिसमें हमने लगभग तीस डंपर पकडे थे औऱ पच्चीस छब्बीस लोगों को अंदर किया है मुकदमें दर्ज हुए हैं और आने वाले समय में और होता रहेगा.”

एसडीएम दुर्गा शक्ति ने अपनी पद की शक्ति के सहारे इलाके में सक्रिय रेत माफिया को धूल चटा रखी थी. लेकिन अपने इस पद पर उन्हें आए हुए अभी महज दस महीने ही बीते थे कि उनके करियर को अचानक एक झटका लगा. क्योकि 27 जुलाई को आधी रात के करीब ग्रेटर नोएडा के कलेक्टर ने दुर्गा शक्ति नागपाल के हाथों में उनके निलंबन का आदेश थमा दिया था. महज 28 साल की उम्र में दुर्गा शक्ति ग्रेटर नोएडा की एसडीएम बनी थी और सिर्फ  10 महीने बाद ही अचानक उन्हे पद से हटा दिया गया. लेकिन दुर्गा शक्ति के इस निलंबन से सूबे की सियासत में ही बवाल मच गया. दुर्गा के निलंबन के पीछे क्या कोई खेल था उसकी भी बात आगे करेंगे लेकिन पहले बात दुर्गा शक्ति नागपाल की. कौन है दुर्गा और कहां से आकर वो राजनीति की दुनिया में खड़ा कर गई रेत का ये तूफान.

कौन हैं दुर्गा शक्ति नागपाल

दरअसल दुर्गा शक्ति की कामयाबी की कहानी करीब नौ साल पहले उस वक्त शुरु होती है जब इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्नीकल यूनिवर्सिटी फॉर वूमेन में उन्होंने बी टेक कंप्यूटर साइंस में एडमिशन लिया था. उन दिनों की दुर्गा शक्ति कैसी थी, क्या था उनकी जिंदगी का मकसद औऱ क्या था उनका गोल.

इस बारे में खुद दुर्गा के टीचर ने किया खुलासा किया है. डॉक्टर ए के महापात्रा के मुताबिक,”दुर्गा  बीटेक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की स्टूडेंट थी .वो मुझे  exactly m not able to remember पर वो 2007 बैच 2003 टू 07 पासआउट बैच में थी. वो बहुत ही अच्छी स्टूडेंट थी , बहुत ही इंटेलीजेंट, सोबर एंड डाउन टु अर्थ स्टूडेंट थी.”

इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्नीकल यूनिवर्सिटी फॉर वूमेन में दुर्गा को कंप्यूटर पढाने वाली कल्पना को आज भी दुर्गा की वो सादगी याद है. “she was really a brilient student , हर तरह से बहुत होशियार एक दम वो बहुत ही सिंपल, जमीन से जुड़ी हुई u know बिल्कुल सीधासाधा व्यक्तित्व उनका और उस टाइम पर भी झलकता था कि हां ये आगे जाकर कुछ करेंगी और कुछ बनेगी.”

पढाकू और प्रतिभाशाली दुर्गा शक्ति की तस्वीर आज भी उनके टीचर्स के जहन में साफ है. क्योकि मैकेनिकल एंड ऑटोमेशन इंजीनियरिंग में एडमिशन लेने वाली दुर्गा को उनके बेहतरीन प्रदर्शन की वजह से बी टेक कंप्यूटर साइंस के कोर्स में अपग्रेड कर दिया गया  था.

पढाई के मैदान में दुर्गा शक्ति के इस पहले शक्ति परीक्षण की कहानी भी सुनिए उन्ही की टीचर की जुबानी. प्रोफेसर रानू के मुताबिक,”जहां तक मुझे याद है क्योंकि पूरा एक साल मैंने दोनो कोर्सेज उसको पढ़ाए हैं . बहुत सिंपल, बहुत डोसाइल बहुत फोकस लड़की थी और पूरा फर्स्ट इयर जब वो हमारे साथ थी तो उसका  जो पर्फाफार्मेंस थी use to be very good . as u can see कि अपग्रेड हुई है . m sure कि उसने सबकुछ अपनी रिस्पॉंसबिलिटी  जो निभाई है  वो ठीक से निभाई होगी within her limits , she would never cross boundries bcoa she was very deci[plined , she was a hosteler i still remember और  हॉस्टल में उसकी जूनियर्स बोलती थी कि बहुत सिंसेयर है हर चीज उनको गाइड करना , उनको बताना कि कैसे क्या रिफर करो तो एक बहुत बढ़िया टाइम रहा है यहां पर . academicly very strong .”

 साल 2007 में बी टेक में ग्रेजुएशन करने के बाद दुर्गा शक्ति ने अपने पिता के उस सपने को साकार करने की ठानी जो उन्होने अपनी बेटी के लिए देखा था. दुर्गा के पिता उन्हें क्लास वन आफिसर बनाना चाहते थे. लिहाजा कॉलेज का हॉस्टल छोडने के बाद दुर्गा शक्ति ने दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में एक कमरा किराए पर लिया और जुट गई सिविल सर्विसेज की तैयारी में.

दो साल की कड़ी मेहनत के बाद साल 2009 में दुर्गा शक्ति इंडियन रेवेन्यू सर्विसेज के लिए चुनी भी गई. लेकिन उनकी मंजिल तो आईएएस थी. लिहाजा दुर्गा कमर कस कर दोबारा और ज्यादा तैयारी के साथ सिविल सर्विसेज के इम्तिहान में बैठी और इस बार किस्मत ने भी उन्हें निराश नहीं किया. साल 2010 में चुने गए 875 आईएएस उम्मीदवारों की लिस्ट में दुर्गा ने बीसवां रैंक हासिल किया.

दुर्गा शक्ति नागपाल का जन्म और उनकी परवरिश दिल्ली में ही हुई है. उनके पिता भी भारतीय सांख्यिकी सेवा में अधिकारी है. लेकिन मसूरी में आईएएस की ट्रेनिंग के बाद जब दुर्गा को पंजाब कॉडर दिया गया तो वो प्रोबेशन पर मोहाली चली आई. 2010 बैच की आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल की यूपी में ये पहली पोस्टिंग करीब 10 महीने पहले ही हुई थी. दुर्गा के पति भी 2011 बैच के आईएएस अधिकारी है औऱ वो भी उत्तर प्रदेश में ही तैनात है लिहाजा दुर्गा ने भी अपना कॉडर पंजाब से बदलवाकर यूपी करवा लिया औऱ जिसके बाद उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में 15 सितंबर 2012 को एसडीएम के पद पर उनकी पहली तैनाती हुई.

निलंबन की गाज़

लेकिन 27 जुलाई 2013 को सरकार ने दुर्गा शक्ति को निलंबित कर दिया. उन पर आरोप लगा कि उन्होंने ग्रेटर नोएडा के कादलपुर गांव में बन रही एक मस्जिद के निर्माण को अवैध करार देकर उसकी दीवार को गिरा दिया. जिससे इलाके में धार्मिक सदभाव बिगडने का खतरा पैदा हुआ. लेकिन इस निलंबन के पीछे क्या कोई साजिश है.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस निलंबन को सही ठहराया है. अखिलेश के मुताबिक,” उन गांव के लोगों से आपको जानकारी करनी चाहिए. जो मुस्लिम परिवार के गरीब लोग जो चंदा लेकर के अपनी मस्जिद बनाना चाहते थे दीवाल बनी थी औऱ बिना किसी के राय मशवरे के और आपने पूरा का पूरा निर्णय ले लिया. औऱ वहां पूरा का पूरा माहौल खत्म कर दिया. और मान लीजिए तमाम ऐसे प्रयास कर रही है ताकतें. कि उत्तर प्र्देश में माहौल खराब हो वो आप लगातार जानते हैं कुछ उसको माहौल को खराब करते हैं. और कुछ उस माहौल में आगे बढकर के उसको और आग देते हैं. तो कही ना कही कोई ऐसा अधिकारी… और शुरु से हम लोग कहते आए हैं. कि जितनी जिम्मेदारी सरकार की है उसके साथ साथ उतनी जिम्मेदारी अधिकारियों की भी है जो जमीन पर हैं. उनको भी जिम्मेदारी से काम करना पडेगा. और कार्रवाई हुई है सरकार ने ठीक कार्रवाई की है.”

एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन का आधार एलआईयू यानी लोकल इंटेलीजेंस यूनिट की रिपोर्ट को बताया गया था. लेकिन यूपी सरकार पर आरोप लगे कि उसने एसडीएम दुर्गा शक्ति को रेत माफिया के दबाव में निलंबित किया है क्योंकि वो अवैध खनन के खिलाफ अभियान चला रही थी.

ग्रेटर नोएडा के कलेक्टर ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में दावा किया है कि कादलपुर में मस्जिद की दीवार गिरने के वक्त दुर्गा मौके पर तो मौजूद थी लेकिन मस्जिद की दीवार गांव वालों ने खुद गिराई. और ऐसा गांव वालों ने दुर्गा के समझाने बुझाने पर किया. लेकिन कादलपुर गांव के लोगों का ये कहना है कि मस्जिद की दीवार खुद सामने खडे रहकर दुर्गा शक्ति नागपाल ने गिरवाई है जो 26 जुलाई को पुलिस बल के साथ कादलपुर गांव पहुंची थी.

मंत्री जी का रोल

हांलाकि दुर्गा शक्ति के निलंबन की कहानी के ये हिस्से अभी तक सवालों औऱ जांच का हिस्सा बने हुए थे. लेकिन इस निलंबन को लेकर साजिश की शंका तब पैदा हुई जब दुर्गा के निलंबन के दो दिन बाद ही सामने आया इलाके के विधायक नरेंद्र भाटी का बयान.

यूपी एग्रो के चैयरमेन नरेंद्र भाटी ने भरी सभा में दावा किया कि,”मैंने माननीय मुलायम जी से बात की है. 10.30 बजे माननीय अखिलेश जी से बात की और 11 बजकर 11 मिनट पर एसडीएम का सस्पेशन ऑर्डर कलेक्टर के यहां रिसीव हो गया. ये है लोकतंत्र की ताकत. मैं ये आप लागों को बताने आया हूं जिस औरत ने इतनी बेहूदगी दिखाई वो उस डंडे को चालीस मिनट नहीं झेल पायी. 10.30 से लेकर 11 बजकर 11 मिनट में,41 मिनट में सस्पेंशन का आर्डर छप कर लखनऊ से यहां क्लेक्टर के यहां तामील हो गया. और उसको पता चल भी गया 11 बजकर 11 मिनट पर कि तुम सस्पेंड हो चुकी हो.”

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि दुर्गा शक्ति का निलंबन एलआईयू की उस रिपोर्ट के आधार पर हुआ जिसमें मस्जिद की दीवार गिरने से इलाके में सांप्रदायिक सदभाव बिगडने की बात कही गई थी. लेकिन नरेंद्र भाटी के इस बयान से साफ हो रहा है कि सरकार ने निलंबन का फैसला किसी रिपोर्ट पर नहीं बल्कि नरेंद्र भाटी के कहने पर किया है. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर नरेंद्र भाटी को दुर्गा शक्ति से क्या दुश्मनी थी?

आपको याद होगा वो नाम. ओमेंद्र खारी. एसडीएम दुर्गा शक्ति ने रेत के अवैध खनन के खिलाफ जब अपना अभियान चलाया था तब अवैध खनन के एक मामले में ओमेंद्र खारी के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था. बताया जा रहा है कि ओमेंद्र खारी नाम का ये शख्स इलाके के विधायक और सूबे के मंत्री नरेंद्र भाटी का बेहद करीबी है.

अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि अपने करीबी ओमेंद्र खारी के खिलाफ केस दर्ज होने से नरेंद्र भाटी दुर्गा शक्ति से नाराज हो गए और उन्होने एसडीएम दुर्गा शक्ति को हटाने के लिए ये साजिश रची.

हांलाकि एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को लेकर आईएएस लॉबी सरकार के खिलाफ है. ग्रेटर नोएडा के डीएम ने भी जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी उसमें दुर्गा को क्लीन चिट दी गई है. इलाहबाद हाईकोर्ट ने भी दुर्गा के निलंबन पर राज्य औऱ केंद्र सरकार से रिपोर्ट मांगी है. उधर दुर्गा शक्ति ने भी इस पूरे मामले में खुद को निर्दोष बताया हैं लेकिन राजनीतिक पार्टियों के तमाम विरोध के बावजूद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने निलंबन के आदेश पर अटल है. सवाल ये है कि दुर्गा के निलंबन पर कौन बोल रहा है सच?  निलंबन का वो पूरा सच देश भी जानना चाहता है क्योंकि ये एक महिला अधिकारी की इज्जत और उसकी ईमानदारी का सवाल है.

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