व्यक्ति विशेष: ISIS की वो कहानी जिसे जानकर आपकी रूह कांप जाएगी

व्यक्ति विशेष: ISIS की वो कहानी जिसे जानकर आपकी रूह कांप जाएगी

26 नवंबर 2008 को मुंबई पर पाकिस्तान से आए 10 आतंकियों ने हमला किया था. जिसमें 166 लोग मारे गए थे.. हमले के मास्टरमाइंड ज़की उर रहमान लखवी और उसके 6 साथियों अब्दुल वाजिद, मज़हर इकबाल, हमाद अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज़, जमील अहमद और यूनिस अंजुम को गिरफ्तार किया था...आगे जानिए...

नकाब ओढ़ कर वो सभ्य समाज को चुनौती देता है. धर्म के नाम पर वो अधर्म का पूरी दुनिया में साम्राज्य स्थापित करना चाहता है. महिलाओं को वो अपना सेक्स गुलाम बनाता है. बच्चों को फिदायीन बनाने के लिए वो पाठशाला चलाता है. इंसान की रूह में खौफ पैदा करने के लिए वो खूनी वीडियो बनाता है. अपनी बर्बरता से वो इंसानियत को बार-बार थर्राता है. एक बार फिर उसने इंसानियत को चुनौती दी. और इस बार निशाने पर था यूरोप का एक जाना-माना शहर ब्रसेल्स. 22 मार्च को इस्लामिक स्टेट आईएसआईएस ने ब्रसेल्स में आतंकवादी हमला करके एक बार फिर दुनिया को बता दिया है कि उसके इरादे कितने खौफनाक हैं. बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में हुए आतंकवादी हमले में 30 से ज्यादा लोगों की जान चली गई. सौ से ज्यादा लोग बुरी तरह से जख्मी हैं. आखिर आईएसआईएस ने यूरोप के शहर ब्रसेल्स में क्यों खेला खूनी खेल? क्या चाहता है आईएसआईएस यानी इस्लामिक स्टेट? कब और कैसे बना इस्लामिक स्टेट? इस्लामिक स्टेट के आतंक से कितनी दूर है भारत?

तारीख- 22 मार्च 2016. भारत से करीब साढ़े 6 हजार किलोमीटर दूर बेल्जियम की राजधानी ब्रसल्स. भारतीय समय के मुताबिक दोपहर का वक्त था. ज़ेवेंटेम एयरपोर्ट पर विमानों की आवाजाही जारी थी. तभी एक के बाद एक हुए दो धमाकों से ब्रसल्स एयरपोर्ट दहल उठता है. करीब एक घंटे बाद बेल्जियम के सेंट्रल मेट्रो में तीसरा धमाका होता है. कुछ ही समय के भीतर आतंक की ये खौफनाक तस्वीर दुनिया के सामने आती है.

ज़ेवेंटेम एयरपोर्ट पर आतंकवादी हमले के कुछ देर बाद एक महिला को खून में सनी हुई हालत में देखा गया. धमाके की वजह से महिला का चमकीला पीला जैकेट फट गया था, और उनके बिखरे बाल और चेहरे पर ख़ून दिखाई दे रहा था. अगले दिन अख़बारों में छपी इस महिला की ये तस्वीर हमले की भयावहता की तस्वीर बन गई. बाद में पता चला कि ये महिला कोई और नहीं भारत की निधि चापेकर हैं. 40 साल की निधि जेट एयरवेज में फ़्लाइट अटेंडेंट हैं और दो बच्चों की मां हैं. निधि चापेकर जेट एयरवेज़ की फ़्लाइट के दो कर्मचारियों में एक थीं जो अमरीका में नेवार्क जा रही थी. ब्रसल्स एयरपोर्ट पर हुए आतंकी हमले में वो बुरी तरह से ज़ख़्मी हो गईं. जेट एयरवेज़ के लिए क़रीब 20 साल से काम कर रही चापेकर का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

ब्रसल्स में हुए आतंकवादी हमले में 31 लोग मारे गए और सौ से ज्यादा गंभीर रूप से घायल हो गए. इस आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी दुनिया के सबसे खूंखार आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट आईएसआईएस ने ली है. आईएसआईएस ने ब्रसेल्स को क्यों अपना निशाना बनाया? आखिर क्या चाहता है आईएसआईएस?

नाम- सालेह अब्देलसलाम
उम्र- 26 साल
यूरोप का मोस्टवांटेड आतंकी
पिछले साल नवंबर में फ्रांस में जबरदस्त आतंकी हमला हुआ था. आतंकवादियों ने पेरिस पर मुंबई के 26/11 की तरह ही अटैक किया था. पेरिस में हमला करने आए आतंकी आईएसआईएस के स्लिपर सेल से थे. हमले में 130 लोगों की जान गई थी. पेरिस हमलों की जिम्मेदारी भी आईएसआईएस ने ली थी. और इस हमले के साजिशकर्ताओं में से एक था सालेह अब्देलसलाम. इसी सिलसिले में सालेह को 18 मार्च को ब्रसल्स में गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी के चार दिन बाद ही उसी ब्रसल्स में हुआ भयानक सीरियल ब्लास्ट.

दुनिया के सबसे खूंखार आंतकी संगठन आईएस से जुड़ा सालेह सलाखों के पीछे है लेकिन शक है कि इसी आईएस के आतंकियों ने सालेह की गिरफ्तारी का बदला लेने के लिए ब्रसल्स धमाकों को अंजाम दिया है.

यूरोप का एक अहम देश है बेल्जियम. बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्सब में कई अंतरराष्ट्री य संगठनों के दफ्तर हैं. इनमें यूरोपियन यूनियन का दफ्तर भी शामिल है. ब्रसल्स में धमाके कर आतंकी पूरे यूरोप को डराना चाहते हैं. आतंकी इस बात से भी नाराज हैं कि बेल्जियम सरकार ने इस्लापमिक स्टेंट पर हमला करने के लिए लड़ाकू विमान भेजे थे.

हाल के वर्षों में बेल्जियम में इस्लामिक कट्टरवादियों की संख्या तेजी से बढ़ी है. कई शहर इस्लामिक कट्टरपंथियों के पनाहगाह के रूप में उभरकर सामने आये हैं. इनमें एक अहम शहर है मोलेनबीक. हाल के कई बड़े आतंकी हमलों में मोलेनबीक शहर का नाम सामने आया है. पेरिस हमले के मुख्य आरोपी सालेह अब्दसलाम को मोलेनबीक से ही पकड़ा गया था. इतना ही नहीं अब्दसलाम के अलावा पेरिस हमले के सात आरोपियों को भी यहीं से गिरफ्तार किया गया था. इतना ही नहीं फ्रांसीसी व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो के एडिटर की हत्या का कनेक्शन भी मोलेनबीक से था.

बेल्जियम के कई शहर इस्लामी कट्टरपंथियों के गढ़ माने जाते हैं, जिसमें सबसे ज़्यादा सक्रिय ब्रसल्स और उसका दक्षिण-पश्चिम का उपनगरीय इलाक़ा मोलेनबीक है. मोलेनबीक में मोरक्को के लोगों की बड़ी आबादी रहती है. बेल्जियम सरकार कई सालों से यहां इस्लामी कट्टरपंथियों से जूझ रही है.

मोलेनबीक के सैंकड़ों लोग सीरिया और इराक़ में लड़ाई के लिए आईएस में शामिल हो गए हैं. यहां की कुल आबादी लगभग एक लाख है. इसमें करीब 80 फीसदी मुसलमान है. एक अनुमान के मुताबिक़ मोलेनबीक के 40 फ़ीसद लोग बेरोज़गार हैं. इल्ज़ाम है कि बेल्जियम के गोरे नागरिकों ने कई दशक पहले मोरक्को से आए लोगों की अगली पीढ़ियों को भी समाज और कारोबार में आगे बढ़ने के मौक़े नहीं दिए. पिछली पीढ़ियां भी टैक्सी चलाने और रेड़ी पर दुकान लगाने जैसे काम करती थी और बेल्जियम में पैदा हुई पीढ़ी भी उसी तरह के काम करने को मजबूर है. आरोप है कि पहले अपराध और ड्रग्स की दुनिया ने मोलेनबीक के युवाओं को आकर्षित किया, अब आईएसआईएस जैसे संगठन आतंक की तरफ़ इनको खींच रहे हैं.

अब मलनबीक मोहल्ले में 22 मस्जिदें बन गई हैं. पांच वक्त नमाज़ की मुअज़्ज़िन की आवाज़ लगभग हर गली में सुनी जा सकती है. कुल आबादी लगभग एक लाख है. इसमें मुस्लिम कितने हैं इसका अलग-अलग लोग अलग-अलग अंदाज़ा लगाते हैं लेकिन कई गलियों में यक़ीनन 80 फ़ीसद मुस्लिम आबादी देखी जा सकती है. कई दुकानों के साइनबोर्ड अरबी भाषा में हैं. गोश्त यहां पर हलाल मिलता है. बुर्के में महिलाएं इतनी दिख जाती हैं जितनी इस्तानबुल में दिखती होंगी.

मोलेनबीक अब इतना बदनाम हो चुका है कि इस एक मोहल्ले को यूरोप में कट्टर इस्लाम और आतंकवाद की पनाहगाह माना जाने लगा है हालांकि यहां के निवासी इस तमगे को दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं. अफ़ग़ानिस्तान में एक तालिबान-विरोधी नेता की हत्यारे को मोलेनबीक का बताया गया था. 2004 में स्पेन के मैड्रिड में धमाके करने वाले भी मोलेनबीक के बताए गए थे. बेल्जियम के प्रधानमंत्री तक को कहना पड़ा कि जब-जब इस्लाम के नाम पर आतंकी घटना होती है, मोलेनबीक का नाम आता है.

ब्रसल्स पर बड़े आतंकी हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी सगंठन ISIS यानी इस्लामिक स्टेट फार ईराक एंड सीरिया ने ली है. कहा जा रहा है बेल्जियम पर हमला करके उसने सीरिया और ईराक में उसके खिलाफ हो रहे हवाई हमलों का बदला लिया है. ISIS के आंतक से जूझ रहे सीरिया और ईराक की ये दर्दनाक कहानी भी हम आपको बताएंगे आगे लेकिन पहले आईएसआईएस के बारे में वो खुलासा जिसने दुनिया को हिला कर रख दिया था.

हाल ही में दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस का एक विवादित और बेहद घिनौना फतवा सामने आया था. रिपोर्ट के मुताबिक यह फतवा इस बात को लेकर था कि गुलाम बनाई गई महिलाओं और लड़कियों के साथ किस प्रकार बलात्कार किया जाना चाहिए. बगदादी के फतवे से खुलासा हुआ कि आईएसआईएस के खूंखार आतंकी गर्भवती महिलाओं से भी बलात्कार करते हैं. आईएसआईएस के दरिंदे न सिर्फ अप्राकृतिक यौन संबंधों के शौकीन हैं बल्कि बाप और बेटे साथ-साथ मिलकर करते हैं बलात्तकार. इतना ही नहीं बगदादी के हरम में बीमार महिलाएं भी हर रोज बलात्कार की शिकार होती हैं. अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने खुलासा किया है कि आईएसआईएस के आतंकी सेक्स के लिए महिलाओं को बुरी तरह से प्रताड़ित कर रहे हैं.

आईएसआईएस के आतंकी अपनी हवस को मिटाने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर रहे हैं. रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आईएसआईएस के आतंकी अपनी जिस्म की भूख को मिटाने के लिए गर्भवती महिलाओं के गर्भ से बच्चे को गिराने में भी गुरेज नहीं करते हैं.

आईएसआईएस के आतंकी एक साथ कई लड़कियों के साथ घिनौनी करतूतों को अंजाम देते हैं. किसी बीमार लड़की के साथ वो हमदर्दी दिखाने की बजाय उन्हें अपनी हवस का शिकार बनाते हैं. आईएस के आतंकियों की गुलाम बनी लड़कियां नर्क से भी बद्तर जिंदगी जी रही हैं. लड़कियां तड़प रही हैं, रो रही हैं लेकिन उनकी इस हालत पर किसी को तरस नहीं आ रहा है. वो इसलिए क्योंकि आईएस के आतंकियों के लिए लड़कियां सिर्फ उनके जिस्म की जरूरत को पूरा करने का जरिया है.

आईएस की कैद में गुलाम महिलाएं किस तरीके की जिंदगी जी रही हैं इसका खौफनाक खुलासा तब हुआ जब अमेरिका के स्पेशल फोर्स सीरिया में आईएसआईएस के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी. उस दौरान उनके हाथ लगा एक फतवा…जिसे जारी किया था आईएसआईएस के सरगना अबू बक्र बगदादी ने.

फतवे में लिखा गया था कि गुलाम बनाई गई महिलाओं और लड़कियों के साथ किस प्रकार रेप किया जाना चाहिए. इसी फतवे से ये खुलासा हो गया कि अब तक आईएसआईएस की कैद में महिलाओं के साथ कैसा सलूक हो रहा था. फतवे में लिखा गया है कि बाप-बेटा एक ही औरत के साथ शारीरिक संबंध न बनाए. इससे जाहिर होता है कि अब तक बाप-बेटे मिलकर किसी भी घिनौनी करतूत को अंजाम से देने से पीछे नहीं हटते थे. फतवे में लिखा गया है कि अब सेक्स के लिए गुलाम बनाई गई महिला के गर्भवती हो जाने के बाद उसका मालिक उसका सौदा नहीं कर सकता. फतवे की इस लाइन से साफ होता है कि अब तक आईएसआईएस के आतंकी महिला के गर्भवती होने के बाद उसका धड़ल्ले से सौदा कर रहे थे. आईएसआईएस का फतवा कहता है कि गुलाम महिला के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध न बनाया जाए. इससे जाहिर होता है कि अब तक किस तरीके से महिलाओं के साथ सलूक किया जाता रहा है. अंतरराष्ट्री य अखबार न्यूकयॉक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस्लाईमिक स्टेट के आतंकियों के महिलाओं को सेक्स गुलाम बनने के लिए मजबूर करने की रिपोर्ट सामने आई थी. खबर में कहा गया था कि महिलाओं को इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के सामने लड़ाई के तोहफे के तौर पर रखा जाता है. इस्लामिक स्टेट के मुताबिक उसके कब्जे में हजारों महिलाएं और बच्चे हैं और इनमें से ज्यादातर यजीदी और कुर्दिश महिलाएं और लड़कियां हैं.

इराक के अल्पसंख्यक यजीदी समुदाय के लोगों को इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने पिछले साल जुलाई महीने में बंधक बना लिया था. बाद में आईएस आतंकियों ने यजीदी समुदाय के दो सौ से अधिक लोगों को रिहा कर दिया था. रिहा की गई महिलाओं ने अपनी जो आपबीती सुनाई, उसे सुनकर सबकी रूह कांप गई थी. इन आतंकियों ने अपनी घिनौनी हरकत से मानवता की सारी सीमा लांघ दी थी.

सवाल उठता है कि क्या हम आईएसआईएस के आतंक से सुरक्षित हैं? क्या हमारी सुरक्षा एजेंसियां दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी का मुकाबला करने को तैयार है?

हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि आईएसआईएस के खतरे को भारत नजरअंदाज नहीं कर सकता है. गृहमंत्री राजनाथ सिंह का ये बयान तब सामने आया था जब करीब तीन हजार किलोमीटर दूर बैठे ISSI के तार भारत से जुड़ते नजर आए थे. कई युवकों को आईएसआईएस में शामिल होने के लिए भारत छोड़ने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया जबकि कुछ युवकों को सीरिया से लौटने के बाद गिरफ्तार किया गया. 2014 में मेहदी नाम के एक शख्स को जो एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था उसे आईएसआईएस के प्रचार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. साल 2014 में ही मुंबई का अरीब अपने कुछ दोस्तों के साथ ISIS में भर्ती होने इराक जा पहुंचा था. उसने ISIS में शामिल होकर हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी ली थी लेकिन जब वो घायल हालत में भारत वापस लौटा तो इसी के साथ ये राज भी खुला कि ISIS भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती बन चुका है. जानकारों का मानना है कि बेल्जियम जैसे देश से करीब 400 लोगों ने आईएसआईएस ज्वाइन किया है जबकि भारत की जनसंख्या को देखते हुए सिर्फ इक्का दुक्का घटनाएं ही सामने आई हैं. भारत की सुरक्षा और खुफिया एजेंसी दुरुस्त हैं. ऐसे में भारत में आईएसआईएस के पांव पसारने की आशंका काफी कम है.

पहले पेरिस पर आईएसआईएस का हमला हुआ और फिर उसके बाद ब्रसल्स पर आतंकियों ने अटैक किया. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप की हालत काफी खराब हो चुकी है. आईएसआईएस से सहानुभूति रखने वाले लोगों की संख्या यूरोप में काफी ज्यादा है ऐसे में भविष्य के लिए भी खतरा बनने की आशंका बनी रहेगी. आईएसआईएस ने ब्रसल्स पर बड़ा आतंकी हमला किया है लेकिन उसके आतंकवाद का केंद्र बिंदू ईराक और सीरिया है जहां आईएसआईएस का जन्म हुआ था.

भारत से करीब 4 हजार 2 सौ किलोमीटर दूर मेडीटेरियन समुद्र के किनारे सीरिया और ईराक देश बसे है. सीरिया की राजधानी दमिश्क है जो पुराने वक्त से ही एक मशहूर शहर रहा है, लेकिन ईराक और सीरिया के शहर इन दिनों खंडहरों में तब्दील हो चुके हैं. यहां कई शहरों पर आतंकवादी संगठन आईएसआईएस ने कब्जा जमा लिया है. ईराक में मलिक अल नूरी की सरकार है तो वही सीरिया के राष्ट्रपति बसर अल असद है जो लगातार आतंकवादी सगंठन आईएसआईएस के हमलों से जूझ रहे है.

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार और आतंकवादी संगठन आईएसआईएस यानी इस्लामिक स्टेट ऑफ ईराक एंड सीरिया के बीच ये शहर भी जंग का मैदान बना हुआ है. सीरिया मध्यपूर्व का एक अहम देश है लेकिन आईएसआईएस की दरिंदगी से यहां हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि पिछले पांच साल में करीब 60 लाख सीरीयाई देश छोड़ चुके हैं. आतंकवादी संगठन आईएसआईएस कितना और कैसे इतना बड़ा खतरा बन चुका है ये समझने से पहले मध्यपूर्व के देशों की भौगोलिक और राजनीतिक हालात को समझना जरूरी है.

भारत से करीब 4 हजार 2 सौ किलोमीटर दूर मेडीटेरियन समुद्र के किनारे सीरिया बसा है. सीरिया के एक तरफ समंदर है तो दूसरी तरफ इसकी सीमाएं लेबनान, इजराइल, जॉर्डन, इराक और टर्की के साथ लगी हुई है. यही वजह है कि भौगोलिक तौर पर सीरिया बेहद अहम देश माना जाता है. इराक और सीरिया में आईएसआईएस के आतंकवादियों ने कहर बरपा रखा है. सीरिया के काफी बड़े हिस्से पर उसका कब्जा भी हो चुका है. आईएस के आतंकवादियो के खौफ ने सीरिया के करीब 65 लाख लोगों को बेघर कर दिया है इनमें से करीब 30 लाख लोग सीरिया छोड़ कर आस-पास के मुल्कों में शरण ले चुके हैं.

सीरिया में गृहयुद्ध के हालात हैं लेकिन इस समस्या की जड़ में वो आईएसआईएस संगठन है जिसमें पश्चिमी देशों के जेहादी भी शामिल हैं. दरअसल शुरुआत में आईएसआईएस आतंकवादी संगठन अलकायदा का ही एक हिस्सा था जिसे अब इराक और सीरिया में लड़ रहे जेहादी सुन्नी लड़ाकों का संगठन माना जाता है.

आईएसआईएस का पूरा नाम इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया है और ये संगठन इराक के शिया बहुसंख्यकों को खत्म कर देना चाहता है. गौरतलब है कि इऱाक की 65 फीसदी आबादी शिया मुसलमानों की है जबकि बाकी यहां सुन्नी मुसलमान, यजीदी, ईसाई और कुर्द जाति के लोग है.

इराक और सीरिया में जड़े जमा चुके आईएस का खौफ तस्वीरों के जरिए समय समय पर पूरी दुनिया में पहुंचता रहता है. आईएसआईएस ना सिर्फ इराक के इलाकों पर अपना कब्जा जमाने में जुटा है बल्कि इराक के पडोसी देश सीरिया में छिड़े गृहयुद्ध का फायदा भी उसे मिल रहा है. आईएसआईएस पूरी दुनिया में इस्लमामिक राज्य की स्थापना चाहता है. आईएस का मुखिया अबु बकर अल बगदादी स्वयं को खलीफा घोषित कर चुका है और वो सत्ता का केंद्र बनकर इ्स्लामिक राज्य के रूप में पूरी दुनिया को संचालित करने का ख्वाब देखता है.

पश्चिमी देशों का मानना है कि सीरिया के कई कट्टरपंथी संगठन भी छुप कर आईएसआईएस की मदद कर रहे हैं. सीरिया और इराक में खौफ का दूसरा नाम बन चुका आईएस कभी आतंकवादी संगठन अलकायदा का ही हिस्सा हुआ करता था लेकिन साल 2006 में अमेरिकी सेना ने चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी आईएस का इराक में खात्मा कर दिया था और उसके चीफ अबु मुसाफ अल जरकावी को भी मार गिराया था. अमेरिकी सेना ने आईएस के मौजूदा चीफ अबुबक्र बगदादी को भी पकड़ कर जेल में बंद कर दिया था लेकिन फिर साल 2009 में अमेरिकी सेना ने ही उसे आजाद भी कर दिया और जब साल 2011 में अमेरिकी फौज इराक से चली गई थी उसके बाद से आईएसआईएस ने एक बार फिर अपना सिर उठाना शुरु कर दिया था. साल 2014 आते तक आईएस ने खुद को अलकायदा से भी अलग कर लिया था और अपनी इस अलग पहचान के साथ उसने इराक और सीरिया को जंग के मैदान में तब्दील कर दिया है.

चरमपंथी संगठन आईएसआईएस इराक और सीरिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है. बेहद खतरनाक हो चुका ये चरमपंथी संगठन ऑटोमैटिक मशीनगनों, रॉकेट और टैंकों जैसे अत्यआधुनिक हथियारों से लैस है. आईएस आधुनिक संचार के साधनों और इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी का भी बखूबी इस्तेमाल कर रहा है और यही वजह है कि इराकी और सीरियाई सेना के लिए इनसे पार पाना अब और भी ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है. इराक और सीरिया में अपने कब्जे वाले इलाके को आईएसआईएस ने इस्लामिक स्टेट का नाम दिया है और अब इस आतंकी संगठन का नाम भी बदल कर आईएस रखा जा चुका है.

मध्यपूर्व के देश सीरिया और ईराक की ये कहानी एक ऐसी दुनिया की कहानी है जहां धरती बम धमाकों से रोज लहूलुहान हो रही है और यहां जिंदगी आईएस के आतंक से पनाह मांग रही है. कभी अलकायदा, कभी अलनुसरा तो कभी आईएस की शक्ल में आतंकवाद का खौफ हर रोज यहां लोगों के यकीन को डस रहा है और हर गुजरते दिन के साथ सीरिया की इस कहानी में दर्द का एक नया अध्याय भी जुड़ रहा है और अब बेल्जियम पर ISIS के बडे आंतकवादी हमले ने दुनिया को एक बार फिर ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कितना खतरनाक हो चुका है अबु बकर बगदादी और उसका आईएसआईएस.

Tags: isis,
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