व्यक्ति विशेषः अयलान, आईएस और सरहद का सितम!

By: | Last Updated: Saturday, 12 September 2015 1:35 PM

तीन साल के अयलान ने लाल रंग की टी शर्ट और नीले रंग का निक्कर पहनी थी. वो अपने नन्हें पैरो में जूते पहन कर एक महफूज दुनिया की तलाश में निकला था. एक ऐसे जहान की तलाश में जहां सुकून और शांति हो. एक ऐसी दुनिया की तलाश में जहां उसका भविष्य सुरक्षित हो लेकिन अयलान ने अपने छोटे कदमों से इस बड़े सफर की शुरुआत की ही थी कि मौत के समंदर ने उसकी सांसे छीन लीं.

समंदर की ताकत के आगे नन्हे अयलान की कश्ती को किनारा ना मिल सका. लेकिन समंदर भी अयलान को अपनी आगोश में ना रख सका. उसका शव लहरों पर सवार होकर उसी किनारे लौट आया जिस जमीन से उसने एक सुनहरे सफर की शुरुआत की थी. तीन साल का मासूम अयलान कुर्दी अब इस दुनिया में नहीं है. लेकिन उसकी ये तस्वीर उसके देश सीरिया के सच का एक ऐसा दस्तावेज बन चुकी है जिसमें जंग और बेवतनी की वो दर्दनाक कहानियां भी दर्ज है जो सुनने वालें की रुह तक को झकझोर देती हैं.  

 

आज हम आपको बताएंगे क्यों सीरिया में मरने को मजबूर हो रहे हैं हजारों अयलान. साथ ही आपको ये भी बताएंगे कि आखिर कौन हैं मासूम अयलान कुर्दी की मौत के असली गुनहगार. ये भी बताएंगे कि कैसे दुनिया के एक अहम हिस्से में आतंकवाद तबाही मचा रहा है.

 

तुर्की के बोडरम समुद्र तट पर एक सिंतबर को सीरियाई बच्चे अयलान कुर्दी का शव मिला था. लहरों के साथ बह कर किनारे पर पहुंचे अयलान के शव की इस तस्वीर ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है. तुर्की की समाचार एजेंसी दोगान ने इस तस्वीर को जारी किया था. और दुनिया भर में लोग इसे ट्विटर और दूसरी सोशल साइट्स पर शेयर कर रहे हैं.

 

 तीन साल के मासूम अयलान की ऐसी तस्वीर और उसकी मौत की दर्दनाक कहानी जिसने भी सुनी उसने इस दर्द को शिद्दत से महसूस किया है. स्वतंत्र पत्रकार पीटर लिखते हैं कि ,”मुझे जिस बात ने सबसे ज्यादा आहत किया है वो हैं उसके छोटे छोटे जूते जो उसके माता पिता ने उस खतरनाक सफर से पहले उसे बड़े प्यार से पहनाए होंगे. मेरी अपनी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल वो होता है जब मैं सुबह अपने बच्चों को तैयार करता हूं और उन्हें जूते पहनाता हूं. उस तस्वीर को देखकर मुझे एहसास हो रहा है कि जैसे मेरे ही बेटे उस समंदर के किनारे पर पड़े हैं जहां आयलान है.”

 

यूं तो सीरिया से दूसरे देशों में अवैध तरीके से जाने की कोशिश में इसी साल सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं लेकिन समंदर के किनारे औंधे मुंह गिरे इस बच्चे की मौत ने पूरी दुनिया के अहसास को हिला कर रख दिया है.  नन्हें अयलान की मौत उस वक्त हुई जब वो अपने परिवार के साथ तुर्की से पलायन करके पड़ोसी देश ग्रीस जा रहा था. अयलान का परिवार जिस नाव पर सवार था वो बीच समंदर में डूब गई. नाव में सवार 12 लोगों के साथ अयलान उसकी मां रिहान और उसके पांच साल के भाई गालिप की भी मौत हो गई. हांलाकि इस हादसे में अयलान के पिता अब्दुला बच गए. उनकी जिंदगी में अब एक ऐसा अंधेरा छा गया है जो उन कब्र के अंधेरे से भी ज्यादा भयावह है जिनमें उनके बेटे अयलान और गालिप दफन हैं.

 

मेरे बच्चे दुनिया के सबसे खूबसूरत बच्चे थे. वो रोज सुबह मुझे उठाते थे, और मेरे साथ खेलते थे लेकिन सब खत्म हो गया. मै अब सिर्फ इतना करना चाहता हूं कि मैं अपनी पत्नी और बच्चों की कब्र पर बैठे बैठे जिंदगी बिता दूं.

 

सीरिया के अब्दुल्ला अपने परिवार के साथ पड़ोसी देश ग्रीस जा रहे थे लेकिन अब्दुल्ला अकेले शख्स नहीं है. सीरिया, तुर्की और लीबीया जैसे कई देशों से पलायन कर यूरोप देशो में जाने वालों के बारे में लगातार खबरें आतीं रही हैं. दूसरे देशों में अवैध तरीकों से जाने की कोशिश में इस साल ही सैकड़ों लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं. लेकिन अयलान कुर्दी की इस तस्वीर के सामने आने के बाद मध्यपूर्व में हो रहे पलायन को लेकर बहस तेज हो गई है.

 

सीरिया, मध्य पूर्व का एक अहम देश है लेकिन पिछले करीब पांच सालों से यहां लोग अपना वतन छोड़ कर दूसरे देशों में जा रहे है. यूरोप में शरण लेने के लिए सीरियाई जान खतरे में डाल कर जोखिम भरा सफर भी कर रहे हैं. आखिर किस डर से और किन वजहों से सीरिया के लाखों लोग अपना देश छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं. ये दर्दनाक दास्तान भी हम आपको बताएंगे आगे लेकिन उससे पहले कहानी सुनिए नन्हें अयलान कुर्दी के सफर की. मौत के उस आखिरी सफर की.

 

भारत से करीब 4 हजार 2 सौ किलोमीटर दूर मेडीटेरियन समुद्र के किनारे सीरिया देश बसा है. सीरिया की राजधानी दमिश्क है जो पुराने वक्त से ही एक मशहूर शहर रहा है. राजधानी दमिश्क से करीब 516 किलोमीटर दूर पूर्वी सीरिया का शहर कोबेन है. ये शहर सीरिया और तुर्की की सीमा पर बसा है. और इसी कोबेन शहर में तीन साल का अयलान कुर्दी अपने पिता अब्दुल्ला, मां रिहान और भाई गालिप के साथ रहता था. 

  

 

कोबेन की ये तस्वीरें चंद महीने पुरानी है. लेकिन ये तस्वीरें इस शहर के हालात साफ बयान कर रही है. सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार औऱ आतंकवादी संगठन ISIS यानी इस्लामिक स्टेट ऑफ ईराक एंड सीरिया के बीच ये शहर भी जंग का मैदान बना हुआ है. मौत और जिंदगी के बीच झूलते ऐसे हालात की वजह से ही अयलान कुर्दी के परिवार ने कोबेन शहर ही नहीं देश भी छोड़ देने का फैसला किया था.  इसीलिए अयलान के पिता अब्दुल्ला ने सुरक्षित ठिकाने की तलाश में पड़ोसी मुल्क ग्रीस के शरणार्थी कैंप का रुख किया था.  

 

कोबेन छोड़ने के बाद अब्दुल्ला ने परिवार के साथ पहले सीरिया की राजधानी दमिश्क का रुख किया और फिर वो सीरिया के ही अल्लेप्पो नाम के एक कस्बे में आ गए थे जहां उन्हें जानकारी मिली कि पड़ोसी देश ग्रीस जाने के लिए उन्हें दक्षिणी- पश्चिमी टर्की में बोडरम की समुद्री सीमा तक पहुंचना होगा जहां से ग्रीस की समुद्री सीमा का शहर कोस आईलैंड बेहद नजदीक है.

 

ग्रीस जाने की चाहत में अब्दुल्ला अपने परिवार के साथ सीरिया की सीमा पार कर टर्की के बोडरम समुद्र तट तक जा पहुंचे थे. यहां से उन्हें आगे समंदर के रास्ते ग्रीस के आईलैंड कोस जाना था. हादसे वाली उस रात ग्रीस बॉर्डर पर जाने के लिए उनसे गैरकानूनी तरीके से सीमा पार करवाने वाले गैंग ने कुल 6 हजार डेढ़ सौ यूरो भी वसूले थे. कनाडा में रहने वाली अयलान की बुआ तीमा कुर्दी के मुताबिक तुर्की के बोडरम समुद्र तट से सफर शुरू करते वक्त उन्हें अयलान के पिता अब्दुल्ला ने मैसेज भी किया था.

 

 

उन्होने बताया, ‘उसने मुझे मैसेज भेज कर कहा था कि हम निकल रहे हैं. और पानी बिलकुल शांत है इसलिए सफर में कोई खतरा नहीं है. आयलान तो बेहद उत्साहित है. उसे ट्रिप का मजा आ रहा है. आयलान कह रहा है कि हम मजे करेंगे डैडी. उसने बताया था कि वो यूरोप जा रहा है.

 

जाहिर है कि अब्दुल्ला अपने परिवार के साथ आगे सफर के लिए तैयार था. लेकिन उसे ये मालूम नहीं था कि ये सफर असल में एक भयानक धोखा साबित होने वाला था. दरअसल मानव तस्करों ने पैसों के बदले उन्हें जोखिम उठाने के लिए तैयार कर लिया था.  गौरतलब ये भी है कि जिस छोटी नाव में कुर्दी परिवार रवाना किया गया था. उस पर सिर्फ 5 लोग ही सफर कर सकते थे लेकिन उस रात उस नाव पर 13 लोगों को बिठा दिया गया था. खतरों भरे इस सफर की ये कहानी अब आगे आप खुद अयलान कुर्दी के पिता अब्दुल्ला की जुबानी सुनिए.

 

अयलान कुर्दी के पिता ने कहा, ”जो आखिरी बात मुझे याद है वो ये कि जब हम नाव से उतरे तो उसके एक घंटे बाद हमें एक दूसरी नाव पर बिठाया गया जिस पर टर्की का एक शख्स सवार था. हम 12 लोग थे और नाव की क्षमता से ज्यादा थे.

 

जाहिर है अब्दुल्ला अपने परिवार के साथ बीच समंदर में फंस चुका था. छोटी नाव पर सवार होने के अलावा उसके सामने अब और कोई रास्ता नहीं बचा था. इसके आगे अब्दुल्ला ये भी बताते हैं कि बीच समंदर में पहुंचकर उनके और उनके परिवार के साथ क्या कुछ घटा था.

 

उन्होने बताय ”हम समंदर में सिर्फ चार मिनट तक चल पाए थे तभी कैप्टन ने देखा कि ऊंची लहरें उठ रही हैं. उसने नाव को घुमाया लेकिन तब तक लहरें नाव को निगल चुकी थी. कैप्टन समंदर में कूदकर भाग गया. मैंने नाव को संभालने की कोशिश की लेकिन ऊंची लहरों ने नाव को पलट दिया. मैंने अपनी पत्नी और बच्चों को बाहों में भर लिया था लेकिन मुझे लगा कि तब तक बच्चों की मौत हो चुकी थी.

 

समंदर में सफर की वो रात अब्दुल्ला पर कयामत की तरह गुजरी थी. वो एक ऐसा दर्दनाक दृश्य था जब एक पिता की नजरों के सामने उसके बच्चें पानी में डूब रहे थे. एक पिता अपने बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए समंदर की ऊंची लहरों से जूझ रहा था .लेकिन देखते ही देखते समंदर जैसे उसकी पूरी दुनिया ही निगल गया. कनाडा में रहने वाली अब्दुल्ला की बहन और अयलान की बुआ तीमा कुर्दी भी हादसे वाली उस रात की भयानकता को कुछ इस तरह से बयान करती हैं. ”वो करीब 12 थे. वो स्मगलर( एजेंट ) से नाराज थे. उन्होंने कहा था कि मैं तुम्हें दोगुने पैसे दूंगा. तुम 12 लोगों को इसमें नहीं बिठा सकते. ये डूब जाएगी. स्मगलर ने कहा कि इसकी चिंता मत करो. हमने सैकड़ों लोगों को ऐसे ही पहुंचाया है. जब नाव पलट गई तो अब्दुल्ला ने दोनों बच्चों को पकड़ने की कोशिश की. उन्हें पानी से बाहर उठाने के लिए उसने जान लगा दी थी और वो चिल्ला रहा था कि सांसे लो- सांसे लो. मैं तुम्हें मरने नहीं दूंगा.

 

समंदर किनारे अयलान कुर्ती की का शव

तुर्की के समंदर की बेपनाह ताकत का मुकाबला नन्हें अयलान की नाव ज्यादा देर तक नहीं कर सकी. रात के अंधेरे में बीच समंदर में जाकर अयलान की नाव डूब गई. सुबह करीब 6 बजे उसका शव उसी बोडरम समुद्र तट पर देखा गया जहां से उसने एक अंजान मंजिल की तरफ अपने नन्हें कदम बढाए थे. सिर्फ अयलान ही नहीं उसके पांच साल के भाई गालिप का शव भी चंद कदमों के फासले पर ही बेजान पाया गया. अयलान की मां रिहान की भी मौत हो चुकी है और अब इन दर्दनाक यादों के बीच जिंदगी के सफर में तन्हा खड़े है अब्दुल्ला कुर्दी.

 

 

अपना वतन सीरिया छोड़ने को मजूबर हुए अब्दुल्ला  कुर्दी भारी मन से ये भी कहते हैं “मैं अपने परिवार के लोगों की कब्र के पास बैठ कर रोना चाहता हूं. ताकि मेरा दुख कुछ हल्का हो सके.“

 

बेहतर भविष्य की तलाश में अपने वतन सीरिया से पलायन करने वाले अब्दुल्ला अब वापस अपने उसी देश में लौट आए हैं जहां की मिट्टी में उनका परिवार दफन है लेकिन सीरिया में अब्दुल्ला कुर्दी अकेले शख्स नहीं है जो अपना देश छोड़ने के लिए मजबूर हुए. पिछले पांच सालों में करीब 60 लाख सीरीयाई देश छोड़ चुके है. लेकिन इन प्रवासियों के लिए संकट अब इसलिए बड़ा हो गया है क्योंकि यूरोप ने इन शरणार्थियों के लिए अपने दरवाजे बंद कर दिए हैं. पिछले चार साल में सीरिया से आने वाले शरणार्थियों की लगातार बढ़ रही संख्या से यूरोप के देश परेशान है. हांलाकि ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशो ने अपने यहां अगले दो सालों में कुछ हजार शरणार्थियों को लेने का ऐलान जरुर किया है लेकिन यूरोपीय देश अब और शरणार्थी नहीं चाहते है.

 

सीरिया जैसे मध्यपूर्व के देशों से आने वाले शरणार्थियों को लेकर यूरोपीय देशों में आम लोगों का नजरिया भी बंटा हुआ है. यूरोप में जहां एक तबका शरणार्थियों को खाना, पानी और जरुरत का सामान देकर उनका स्वागत कर रहा है वहीं दूसरी तरफ एक ग्रुप ऐसा भी है जो इन्हें स्वीकार करने को तैयार नहीं है. क्योंकि ज्यादातर शरणार्थी मुस्लिम समुदाय के है और यूरोप क्रिश्चियन सिविलाइजेशन का हिस्सा रहा है. इसिलिए भी शरणार्थियों को लेकर यहां लोगों का मत बंटा हुआ है. दूसरी वजह ये है कि यूरोपीयन देश छोटे है, इनकी जनसंख्या भी कम है इसीलिए और लोगों को अपने यहां रखने की इनकी क्षमता भी कम है इसके अलावा सांस्कृतिक विषमता का मुद्दा भी यूरोपियन देशों की नजर में काफी अहम है.

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