INFORMATION: कैसे होती थी व्यापम में धांधली?

By: | Last Updated: Monday, 6 July 2015 10:58 AM
vyapam scam and shivraj singh

नई दिल्ली: व्यापम घोटाले में हो रही संदिग्ध मौतों के बीच कांग्रेस ने एक बार फिर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को निशाने पर ले लिया है. इस बार कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जब घोटाले के दौरान शिवराज के पास मेडिकल एजुकेशन मंत्री थे तो उनकी जांच क्यों न की जाए?

 

चिकित्सा मंत्री अनूप मिश्रा के इस्तीफे के बाद साल 2008 से 2011 तक मेडिकल एजुकेशन मंत्रालय सीएम शिवराज सिंह के पास था. शिवराज के मंत्री रहते राज्य के मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई इस मंत्रालय के अधीन थी जबकि इन मेडिकल कॉलेजों की परीक्षा का जिम्मा तकनीकी शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के मंत्रालय के पास था. लक्ष्मीकांत शर्मा घोटाले के आरोप में जेल जा चुके हैं. अब कांग्रेस पूछ रही है कि शिवराज की जांच क्यों न हो?

 

कांग्रेस का दावा है कि सीबीआई जांच से इनकार करने के लिए शिवराज जबलपुर कोर्ट के फैसले को लेकर झूठ बोल रहे हैं. हालांकि मध्य प्रदेश सरकार सीबीआई की जांच से इनकार कर रही है. 

 

फिलहाल व्यापम की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में एसआईटी कर रही है. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या व्यापम घोटाले सच सामने के लिए शिवराज सीबीआई के हाथ में जांच सौपेंगे और उससे भी बड़ा सवाल क्या आरोपों के घेरे में आए शिवराज इस्तीफा देंगे?

 

अब आपको बताते हैं कि कांग्रसे के मुताबिक ‘‘व्यापम (मध्यप्रदेश व्यवसायिक परीक्षा मंडल) स्वतंत्र भारत के इतिहास का ‘सबसे बड़ा घोटाला’ है. व्यापम ने 2007 से 2013 के बीच व्यापम के द्वारा आयोजित 167 विभिन्न परीक्षाओं में बैठने वाले लगभग 76,76,718 विद्यार्थियों के साथ धोखाधड़ी की है.

 

कैसे होती थी धांधली?

 

1.  कांग्रेस के मुताबिक शुरू में धुंधला फोटोग्राफ लगाकर असली विद्यार्थी की जगह नकली विद्यार्थी को परीक्षा में बिठाया जाता था.

 

2. इसके अलावा परीक्षा में पहले काफी अच्छे अंक प्राप्त कर चुके योग्य विद्यार्थी को दोबारा परीक्षा में बिठाया जाता था, जो दूसरे विद्यार्थी को नकल करवाता था. इसके लिए पैसा खिलाकर दोनों के रोल नंबर पास पास रखे जाते थे.

 

3. पैसा खिलाने वाले विद्यार्थी से अपनी ‘ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन’ (ओएमआर) शीट को खाली छोड़ने को कहा जाता था, इन्हें बाद में भोपाल में व्यापम हेडक्वार्टर में सही उत्तरों से भर दिया जाता था, ताकि वह विद्यार्थी परीक्षा में पास हो जाए.

 

इस जालसाजी के पैमाने का अनुमान इस बात से हो जाता है, कि 2008 से 2013 के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने व्यापम के द्वारा 68 परीक्षाएं आयोजित कीं, जिनमें 49,44,104 विद्यार्थी बैठे और विभिन्न सरकारी विभागों जैसे पुलिस, वन, राजस्व, शिक्षा आदि में 1,40,000 लोगों की भर्ती की गई. इसी तरह 99 प्रवेश परीक्षाओं में 27,32,614 विद्यार्थी बैठे.

 

क्या है व्यापम घोटाला ?

 

उच्च शिक्षा मंत्री के तहत काम करने वाला व्यावसायिक परीक्षा मंडल मेडिकल, इंजीनियरिंग और दूसरी व्यावसायिक पढ़ाई के साथ सरकारी नौकरियों के लिए प्रवेश परीक्षाएं करवाने और छात्रों के चयन का काम करता है. व्यापम घोटाला दो हिस्सों में बंटा हुआ है. पहला तो ये कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रवेश परीक्षाओं में धांधली हुई. वहीं दूसरा सरकारी नौकरियों के लिए हुई परीक्षाओं में भी गड़बड़ी करके नाकाबिल लोगों को नौकरी दी गई.

 

व्यापम मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के अधीन था-घोटाले के तार लक्ष्मीकांत शर्मा से जुड़ रहे थे. उन्हें भी गिरफ्तार किया जा चुका है. साथ ही घोटाले के कर्ताधर्ता उनके ओएसडी ओ पी शुक्ला, व्यावसायिक परीक्षा मंडल के नियंत्रक पंकज त्रिवेदी, ऑनलाइन विभाग के सर्वेसर्वा नितिन महिंद्रा पर शिकंजा कसा जा चुका है. इनकी ही मिलीभगत से भर्ती घोटाले का खेल चल रहा था.

 

आरोप है कि सिफारिश करने वालों में राज्यपाल रामनरेश यादव, उनके बेटे शैलेश यादव, ओएसडी धनराज यादव, केंद्रीय मंत्री उमा भारती से लेकर संघ के सुरेश सोनी, केसी सुदर्शन और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं.

 

इस बीच घोटाले से जुडे आरोपियों की संदिग्ध मौत का सिलसिला भी शुरू हो गया. एमपी के राज्यपाल रामनरेश यादव के बेटे शैलेश यादव की भी 24 मार्च को लखनऊ में संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी.

 

मामले की जांच कर रही एसटीएफ की निगरानी के लिए हाईकोर्ट ने एसआईटी बनाई है. कांग्रेस सीबीआई जांच की मांग कर रही है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मामले की जांच शुरू कराने का श्रेय खुद को देते हैं. जबकि कांग्रेस घोटाले का आरोप मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर लगा चुकी है.

 

इस बीच रतलाम के पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने व्यापम घोटाले पर ‘व्यापमगेट’ नाम से एक किताब भी लिखी है. इसमें उन्होंने घोटाले से जुड़े 250 अधिकारियों समेत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ सबूत पेश करने का दावा किया है.

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