व्यापम महज़ घोटाला नहीं, RSS का अपने लोगों को अंदर घुसाने का मामला है: दिग्विजय

By: | Last Updated: Monday, 6 July 2015 3:56 AM
vyapam scam exposed due to Shivrajs greedy family

नई दिल्ली: व्यापम घोटाले को लेकर शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने बीजेपी और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

 

दिग्विजय ने ट्विटर पर लिखा है कि व्यापम के पीछे आरएसएस और बीजेपी का हाथ है जो अपने लोगों को अंदर घुसाने में लगे थे और मध्यप्रदेश का ये घोटाला शिवसराज सिंह के परिवार की लालच की वजह से बाहर आ गया.

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दिग्विजय का कहना है कि इसे महज़ एक भ्रष्टाचार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि बीजेपी और आरएसएस के जरिए अपने लोगों को घुसाने का मामला है.

 

DEPTH INFORMATION: क्या है व्यापम घोटाला ? 

 

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि ये काम राजस्थान, छत्तीसगढ़ और गुजरात में किया गया, लेकिन मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह के लालचली परिवार की वजह से पर्दाफाश हो गया है.

 

शिवराज पर चिदंबरम  का चोट

 

इसके साथ ही व्यापम घोटाले और उसकी जांच पर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ट्विटर पर सवाल उठाए हैं.

 

चिदंबरम ने सीबीआई जांच के लिए शिवराज सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए कहा है कि कोर्ट की निगरानी में जांच इस बात की गारंटी नहीं है कि जांच निष्पक्ष होगी.

 

चिदंबरम ने कहा, “हम आपको बता दें कि शिवराज सीबीआई जांच के लिए तैयार नहीं है. कह रहे हैं कि जांच एसआईटी से ही होगी क्योंकि कोर्ट की निगरानी में जांच हो रही है.”

 

क्या है व्यापम घोटाला?

 

मध्य प्रदेश का व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापम घोटाले में अब तक 43 लोगों की मौत हो चुकी है. आखिर ये घोटाला है क्या? –आइये समझने की कोशिश करते हैं –

 

 

 

व्यापम के तहत सरकारी नौकरियों और मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए हुआ था एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा.

 

55 केस, 2,530 आरोपियों और 1,980 गिरफ्तारियों के साथ इसे खूनी घोटाला भी कहा जाने लगा है.

 

इस घोटाले से सबसे पहले पर्दा तब उठा जब 7 जुलाई, 2013 को मध्य प्रदेश के इंदौर में पीएमटी की प्रवेश परीक्षा में कुछ छात्र फर्जी नाम पर परीक्षा देते पकड़े गए.

 

दो हिस्सो में बंटा है व्यापम घोटाला

 

उच्च शिक्षा मंत्री के तहत काम करने वाला व्यावसायिक परीक्षा मंडल मेडिकल, इंजीनियरिंग और दूसरी व्यावसायिक पढ़ाई के साथ सरकारी नौकरियों के लिए प्रवेश परीक्षाएं करवाने और छात्रों के चयन का काम करता है. व्यापम घोटाला दो हिस्सों में बंटा हुआ है. पहला तो ये कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रवेश परीक्षाओं में धांधली हुई. वहीं दूसरा सरकारी नौकरियों के लिए हुई परीक्षाओं में भी गड़बड़ी करके नाकाबिल लोगों को नौकरी दी गई.

 

व्यापम मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के अधीन था-घोटाले के तार लक्ष्मीकांत शर्मा से जुड़ रहे थे. उन्हें भी गिरफ्तार किया जा चुका है. साथ ही घोटाले के कर्ताधर्ता उनके ओएसडी ओ पी शुक्ला, व्यावसायिक परीक्षा मंडल के नियंत्रक पंकज त्रिवेदी, ऑनलाइन विभाग के सर्वेसर्वा नितिन महिंद्रा पर शिकंजा कसा जा चुका है. इनकी ही मिलीभगत से भर्ती घोटाले का खेल चल रहा था.

 

आरोप है कि सिफारिश करने वालों में राज्यपाल रामनरेश यादव, उनके बेटे शैलेश यादव, ओएसडी धनराज यादव, केंद्रीय मंत्री उमा भारती से लेकर संघ के सुरेश सोनी, केसी सुदर्शन और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं.

 

इस बीच घोटाले से जुडे आरोपियों की संदिग्ध मौत का सिलसिला भी शुरू हो गया. एमपी के राज्यपाल रामनरेश यादव के बेटे शैलेश यादव की भी 24 मार्च को लखनऊ में संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी.

 

मामले की जांच कर रही एसटीएफ की निगरानी के लिए हाईकोर्ट ने एसआईटी बनाई है. कांग्रेस सीबीआई जांच की मांग कर रही है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मामले की जांच शुरू कराने का श्रेय खुद को देते हैं. जबकि कांग्रेस घोटाले का आरोप मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर लगा चुकी है.

 

इस बीच रतलाम के पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने व्यापम घोटाले पर ‘व्यापमगेट’ नाम से एक किताब भी लिखी है. इसमें उन्होंने घोटाले से जुड़े 250 अधिकारियों समेत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ सबूत पेश करने का दावा किया है.

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