भोपाल गैस त्रासदी: मरने से पहले एंडरसन को नहीं मिली एक दिन की भी सजा, हुए प्रदर्शन

By: | Last Updated: Saturday, 1 November 2014 3:02 AM
Warren Anderson died unpunished, survivors of Bhopal gas tragedy say

भोपाल: भोपाल गैस त्रासदी में वांछित यूनियन कार्बाइड के पूर्व प्रमुख वारेन एंडरसन के निधन की खबर मिलने के बाद पीड़ितों के कल्याण के लिए काम कर रहे पांच संगठनों ने कल यहां उसे ‘एक दिन’ की भी सजा न दिला पाने के विरोध में प्रदर्शन किया .

 

इन संगठनों का नेतृत्व कर रहीं ‘भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉमेशन एंड एक्शन’ की कार्यकर्ता रचना ढ़ींगरा ने बताया, ‘पांचों संगठनों ने भोपाल गैस पीड़ितों के साथ मिलकर एंडरसन को इस त्रासदी के लिए एक दिन की भी सजा न दिला पाने के विरोध में बंद पड़ी यूनियन कार्बाइड के समक्ष प्रदर्शन किया और सरकार की इस असफलता के लिए निंदा की.’

 

संगठनों ने आरोप लगाया, ‘एंडरसन को अमेरिकी सरकार द्वारा संरक्षण दिया गया जबकि भारत सरकार द्वारा उसे न्याय के कठघरे में लाने में जानबूझकर लापरवाही की गई.’ भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की कार्यकर्ता रशीदा बी ने कहा, ‘एंडरसन पर मानव समूह की हत्या तथा पशुओं को जहर खिलाने के आरोप थे. यदि उस पर हत्या के आरोप सिद्ध हो जाते तो उसे आजीवन कारावास भुगतना पडता . जिस व्यक्ति के चलते 25 हजार से भी अधिक लोगों की जान गयी तथा पांच लाख लोग जहर से प्रभावित हुये, वह अमेरिका के संरक्षण के चलते एक दिन के लिये भी जेल नहीं गया.’

 

वहीं, भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ता बालकृष्ण नामदेव ने अमेरिका से एंडरसन के प्रत्यर्पण न करा पाने के लिए भारत की उन सभी सरकारों को दोषी ठहराया है, जो इस दौरान सत्ता में थीं.

 

उन्होंने कहा, ‘भारत सरकार ने एंडरसन के प्रत्यर्पण के लिए पहला अनुरोध भेजने में ग्यारह साल लगा दिए और उसके बाद तब कुछ नहीं किया, जब अमेरिकी सरकार ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया था. इस बारे में दूसरा अनुरोध भी अभी तक ‘यूएस स्टेट एंड जस्टिस डिपार्टमेंट्स’ में विचाराधीन है और भारत सरकार द्वारा पिछले तीन सालों में उसका प्रत्यर्पण करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया.’

 

जिन पांच संगठनों ने इस त्रासदी से पीड़ित लोगों के साथ भर्त्सना की है, उनमें ‘भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ’, ‘भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा’, ‘भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा’, ‘भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉमेशन एंड एक्शन’ और ‘चिल्ड्रन अगेंस्ट डाउ कॉर्बाइड’ शामिल हैं.

 

भोपाल त्रासदी 2-3 दिसंबर 1984 की मध्यरात्रि को उस समय हुई, जब कीटनाशक बनाने वाले संयंत्र से जहरीली गैस का रिसाव हो गया, जिससे 3,787 लोगों की मौत हो गई थी.

 

इस कांड में पांच लाख से ज्यादा लोग पीड़ित हुए थे, जिनमें से बाद में कई लोगों की मौत फेफड़ों के कैंसर, किडनी के फेल होने और लीवर से जुड़ी बीमारी के चलते हुई .

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