मुंबई ब्लास्टः 12 मार्च 1993 से लेकर 30 जुलाई 2015 तक क्या कब कैसे हुआ

By: | Last Updated: Thursday, 30 July 2015 1:20 AM
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नई दिल्लीः  जेल के सूत्रों के मुताबिक याकूब को फांसी दे दी गई है. यह पहली बार है जब 1993 ब्लास्ट केस में किसी दोषी को फांसी हो रही है. आज हम आपको बता रहे हैं मुंबई ब्लास्ट 12 मार्च 1993  की सिलसिलेवार घटना बता रहा है, 257 लोगों की मौत हो गई. कईयों ने अपनों को खो दिया.

 

पहला धमाका-12 मार्च की दोपहर बाम्बे स्टॉक एक्सचेंज की इमारत के बाहर दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर पहला धमाका हुआ. इसकी अवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी. 29 मंजिला बीएसई की इमारत में जो जहां था वहीं गिर पड़ा. चारों ओर लाशें बिखरी पड़ी थीं. उस समय यहां दो हजार से अधिक लोग मौजूद थे. बेसमेंट की पार्किंग में आरडीएक्स से लदी एक कार में धमाका हुआ था. इसमें 84 लोग मारे गए. 200 से ज्यादा लोग घायल हुए

 

दूसरा धमाका- दोपहर 2.15 बजे, नरसी नाथ स्ट्रीट

तीसरा धमाका- दोपहर 2.30 बजे, शिव सेना भवन

चौथा धमाका- दोपहर 2.33 बजे,एयर इंडिया बिल्डिंग

पांचवा धमाका- दोपहर 2.45 बजे, सेंचुरी बाज़ार

छठा धमाका- दोपहर 2.45 बजे, माहिम

सातवां धमाका-दोपहर 3.05 बजे, झावेरी बाज़ार

आठवां धमाका-दोपहर 3.10 बजे,सी रॉक होटल

नौवां धमाका-दोपहर 3.13 बजे,प्लाजा सिनेमा

दसवां धमाका-दोपहर 3.20 बजे,जुहू सेंटूर होटल

ग्यारवां धमाका-दोपहर 3.30 बजे,सहार हवाई अड्डा

बारहवां धमाका-दोपहर 3.40 बजे,एयरपोर्ट सेंटूर होटल

-4 नवंबर 1993 में 10,000 पन्ने की 189 लोगों के खिलाफ प्रार्थमिक चार्जशीट दायर की गई थी.

-19 नवंबर 1993 में यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा गया था.

-19 अप्रैल 1995 को मुंबई की टाडा अदालत में इस मामले की सुनवाई आरंभ हुई थी. अगले दो महीनों में अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे.

-अक्टूबर 2000 में सभी अभियोग पक्ष के गवाहों के बयान समाप्त हुए थे.

-अक्टूबर 2001 में अभियोग पक्ष ने अपनी दलील समाप्त की थी.

-सितंबर 2003 में मामले की सुनवाई समाप्त हुई थी.

-सितंबर 2006 में अदालत ने अपने फैसले देने शुरू किए.

इस मामले में 123 अभियुक्त हैं जिनमें से 12 को निचली अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई थी. इस मामले में 20 लोगों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई थी, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है और उनके वारिस मुकदमा लड़ रहे हैं. इनके अलावा 68 लोगों को उम्र कैद से कम की सज़ा सुनाई गई थी जबकि 23 लोगों को निर्दोष माना गया था.

 

नवंबर 2006 में संजय दत्त को पिस्तौल और एके-56 राइफल रखने का दोषी पाया गया था, लेकिन उन्हे कई अन्य संगीन मामलों में बरी कर दिया गया.

 

1 नवंबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरु हुई थी जो दस महीने चली.

 

अगस्त 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था. साल 2006 में मुंबई की अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए जिन लोगों को इन धमाकों के लिए दोषी पाया था. उनमें एक ही परिवार के चार सदस्य भी थे. इनके नाम थे यकूब मेमन, यूसफ मेमन, इसा मेमन और रुबिना मेमन. इन सभी को साजिश और आंतकवाद को बढावा देने के लिए दोषी पाया गया था.

 

मुंबई की टाडा कोर्ट ने अपने याकूब को फांसी की सजा सुनाई इसके बाद इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर गई, कई  विवादों और बहसों के बाद कल 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजो की बेंच ने  मौत के फैसले पर मुहर लगाई.

 

30 जुलाई 2015-6.30 मिनट पर याकूब को फांसी हुई.

 

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