दिल्ली-एनसीआर में सात तीव्रता का भूकंप आया तो क्या होगा?

दिल्ली-एनसीआर में सात तीव्रता का भूकंप आया तो क्या होगा?

दुनिया में भूकंप के लिहाज से सबसे खतरनाक इलाकों को सीस्मिक जोन पांच में रखा जाता है, दिल्ली सीस्मिक जोन चार में आती है.

By: | Updated: 20 Sep 2017 10:40 PM

प्रतिकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: मेक्सिको में भूकंप ने भारी तबाही मचाई है. अब तक मेक्सिकों में 250 लोगों के मारे जाने की खबर है. राजधानी मेक्सिको सिटी में 40 से ज्यादा बहुमंजिला इमारतें जमीदोज हो गयीं. मेक्सिको ने ऐसी तबाही इससे पहले 32 साल पहले इसी दिन यानि 19 सितंबर को देखी थी. उस वक्त 10 हजार से ज्यादा लोग भूकंप में मारे गए.


7 तीव्रता वाला भूकंप देश की राजधानी दिल्ली में आ गया तो क्या होगा ?
दुनिया में भूकंप के लिहाज से सबसे खतरनाक इलाकों को सीस्मिक जोन पांच में रखा जाता है, दिल्ली सीस्मिक जोन चार में आती है. जानकारों के मुताबिक दिल्ली और उसके आस पास बन रही सभी हाई राइज इमारतें भूकंप निरोधी तकनीक से बनाई जा रही है. इसके लिए बाकायदा प्राधिकरण के नियम है जिसमें निर्माण का नक्शा तभी पास होता है जब वो भूकंप निरोधी डिजाइन का हो.


दिल्ली-एनसीआर में निर्माण के दौरान क्या ध्यान रख्ना पड़ता है?
इमारत का नक्शा बनाने से पहले सॉइल टेस्टिंग यानि मिट्टी का टेस्ट किया जाता है. इस टेस्ट के बाद तय होता है कि कितनी ऊंची इमारत बन सकती है. हाई राइज बिल्डिंग बनाने से पहले जमीन के अदंर कितना बेस बनाना होगा. जमीन की मिट्टी के टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर हाई राइज बिल्डिंग का नक्शा बनाया जाता है.


दिल्ली हिमालय के सबसे ज्यादा हलचल मचाने वाले केंद्र से महज ढाई सौ किलोमीटर दूर है. इस हिस्से में कोई बड़ी हलचल होती है तो दिल्ली में भी बड़ा नुकसान हो सकता है.


हिमालय क्षेत्र में अक्सर भूकंप आता रहता है. यहां भूकंप आने के पीछे वजह ये है कि ये जगह भारतीय और यूरोशियन टेक्टोनिक प्लेट्स के मिलने की जगह है. टेक्टोनिक प्लेट्स के टकराने से भूंकप आते हैं. इन प्लेट्स के टकराने से ही हिमालय बना है.


भूगर्भ शास्त्रियों का मानना है कि भारतीय प्लेट उतर और उतर पश्चिम की तरफ 45 मिलीमीटर प्रति वर्ष की रफ्तार से खिसक रही है और भारतीय टेक्टोनिक प्लेट यूरोशियन प्लेट के नीचे आ रही है. हिमालय के पहाड़ हर साल करीब 5 मिलीमीटर ऊपर उठ रहे हैं. पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं जो लगातार घूम रही हैं. बार बार टकराने से धऱती में हलचल होती है और भूकंप आता है.


साल 2001 में जब गुजरात के भुज में भूकंप आया था तो वहां से सवा तीन सौ किलोमीटर दूर अहमदाबाद में भी भारी तबाही हुई थी. मेक्सिको में भूकंप का केंद्र मेक्सिको सिटी से 123 किलोमीटर दूर प्यूबला के पास था लेकिन मेक्सिको सिटी की तबाही आप देख ही रहे हैं.

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