ABP स्पेशल: क्या है कालाधन, कहां से आया 800 खाताधारियों के नाम और सरकार को नाम बताने में क्या है दिक्कत?

By: | Last Updated: Friday, 24 October 2014 4:20 PM
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नई दिल्ली: काले धन का मुद्दा गरमाता जा रहा है. सरकार के पास 800 विदेशी खाताधारकों के नाम जब मौजूद हैं तो सिर्फ 136 लोगों के नाम क्यों बताए जाएंगे? बाकी लोगों के नाम बताने में क्या मुश्किल हैं. आखिर क्या है काले धन का सच? और क्या है काला धन?

 

क्या है काला धन?

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनैंस ऐंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी) के मुताबिक, काला धन वह आय होती है जिस पर टैक्स की देनदारी बनती है, लेकिन उसकी जानकारी टैक्स डिपार्टमेंट को नहीं दी जाती है. इसी वजह से सबसे ज्यादा काला धन पैदा होता है.

 

आपराधिक गतिविधियों से भी काला धन बनता है. सरकारी अफसर की रिश्वतखोरी और चोरी,  अवैध माइनिंग, जालसाजी और घोटाले की वजह से काला धन तेजी से बढ़ा है.

 

कहां से आया 800 खाताधारियों के नाम

 

विदेशी बैंकों में जिन 800 खाताधारियों के नाम सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है आखिर उनका नाम भारत में आया कैसे.

 

भारत से काला धन इकठ्ठा कर विदेशी बैंकों में जमा करने वालों के राज़ धीरे-धीरे खुलना शुरू हुआ. जेनेवा में फ़्रांस सरकार ने भारत को 700 बैंक खातों की सूची सौंपी, जिसके बाद सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज इन खातों की जांच में जुट गया. जर्मनी ने भी भारत सरकार को उन लोगों के नाम की सूची सौंपी जिनके विदेशी खातों में पैसे जमा हैं.

 

136 नाम ही क्यों बता जाएंगे?

 

सरकार 136 खाताधारियों का नाम कोर्ट को बता सकती है. सवाल उठ रहा है आखिर 136 नाम ही क्यों.

 

भारत सरकार के पास यूं तो विदेशी बैंकों के 800 भारतीय खाताधारकों के बारे में जानकारी है पर सरकार का कहना है कि वो सिर्फ इनमें से 136 लोगों के नाम ही बता सकती है.

 

सरकार का कहना है कि जिन खाताधारकों के खिलाफ भारतीय अधिकारी आरोप दायर कर रहे हैं, सरकार उनके नाम अदालत के सामने उजागर कर देगी. सभी खाता धारकों का नाम इसलिए नहीं बताया जा सकता क्योंकि जरूरी नहीं कि सभी खाताधारी काला धन रखते हों.

 

वरिषठ वकील राम जेठमलानी ने पहले प्रधानमंत्री को पत्र लिखा और अब उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली को चिट्ठी लिख कर सवाल पूछा है कि आखिर सभी 800 विदेशी खाताधारकों के नाम बताने में क्या परेशानी है. बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी सवाल किया है.

 

राम जेठमलानी और स्वामी क्या चाहते हैं?

 

भारत सरकार को यूरोप के देशों से 800 भारतीयों के बैंक खातों की सूची मिली थी. राम जेठमलानी और सुब्रमण्यम स्वामी उन लोगों के नाम सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं जिनके नाम यूरोप से दी गई सूची में शामिल हैं. बीजेपी जब विपक्ष में थी तब उसने मनमोहन सरकार से लिस्ट को सार्वजनिक करने की जोरदार मांग की थी.

 

हर जगह से सवाल हो रहा है. लिस्ट को सार्वजनिक करने में जो समस्या यूपीए सरकार बताती थी वही मुश्किल बीजेपी सरकार बता रही है.

 

आखिर क्या दिक्कत है सरकार को नाम बताने में?

 

काला धन रखने वालों के नाम सार्वजनिक करने की हमेशा से मांग करने वाली बीजेपी सत्ता में आते ही पलट गई. मोदी सरकार की तरफ से बताया गया कि डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस ट्रीटी के चलते सरकार काला धन रखने वालों का नाम नहीं बता सकती.

 

कांग्रेस ने तुरत सरकार पर हमला बोल दिया. कांग्रेस का कहना था कि यूपीए सरकार ने भी अपनी इसी मजबूरी के चलते नामों को सार्वजनिक नहीं किया था. कांग्रेस ने बीजेपी पर चुनाव दौरान जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया. अपने खिलाफ विरोध बढ़ता देख वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सफाई दी. विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वालों के नाम शीघ्र सार्वजनिक कर दिए जाएंगे. जिन खाताधारकों के खिलाफ भारतीय अधिकारी आरोप दायर कर रहे हैं. सरकार उनके नाम अदालत के सामने उजागर कर देगी.

 

जेटली ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में यहां तक कह दिया कि विदेश में काला धन रखने वालों के नाम उजागर हो गए तो कांग्रेस को ही शर्मिंदा होना पड़ेगा. जेटली के इस बयान के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया.

 

आखिर क्या है डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस ट्रीटी?

 

यूपीए सरकार जिस तरह नाम बताने में डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस ट्रीटी को बाधा बता रही थी वैसा ही बीजेपी सरकार कह रही है.

 

भारत का दुनिया के 80 देशों के साथ एक समझौता है. इस समझौता के तहत मान लीजिए अगर एक भारतीय जर्मनी में कारोबार करता है और अगर वो भारत में टैक्स देता है तो फिर उसे जर्मनी में टैक्स देने से छूट मिल जाएगी. अगर डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस ट्रीटी नहीं होती तो कारोबारी को दोनों जगह टैक्स देना पड़ता. पर इस सुविधा के साथ गोपनीयता की शर्तें भी जोड़ दी गई हैं.

 

कैसे बना काला धन मुद्दा?

 

काला धन लंबे समय से एक बड़ी समस्या रही है फिर कब और कैसे काला धन बन गया बड़ा मुद्दा.

 

2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के तत्कालीन पीएम उम्मीदवार लाल कृष्ण आडवाणी ने काला धन को बहुत बड़ा मुद्दा बनाया था.

 

आडवाणी ने कहा था कि अगर उनकी सरकार बनी तो विदेशों में रखा काला धन वापस लाया जाएगा. 2011 में योग गुरु बाबा रामदेव ने काला धन को वापस लाने की मांग को लेकर दिल्ली में अनशन किया था. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर काला धन का बड़ा मुद्दा बनाया.

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