यहां पढ़ें : बिहार में नकल के नायाब तरीके

By: | Last Updated: Friday, 20 March 2015 5:21 PM
what is going on i bihar

बिहार: बिहार के स्कूलों में हो रहो धड़ल्ले से नकल जो तस्वीरों सामने आई हैं उनसे ये सवाल उठता है कि काबिलियत के आधार पर मिलने वाली नौकरियां क्या बिहार के इन छात्रों को नसीब हो पाएंगी. ये सवाल इसलिए क्योंकि बिहार में 10 वीं की परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ उनके अभिभावकों के नकल कराने की तस्वीरें बता रही हैं कि बिहार नकल करने और कराने वालों का अड्डा बना हुआ है.

 

10वीं के छात्रों के अभिभावक जान जोखिम में डालकर बेखौफ नकल कर रहे हैं . क्या यही है नीतीश कुमार का सुशासन?

 

बिहार में नकल का आम तरीका भी बेहद आम है. पुर्चियां लेकर छात्र बड़े आराम से नकल करते रहते हैं और कक्ष निरीक्षकों की कान पर जूं नहीं रेंगती. यहां तक की छात्र तो मोबाइल लेकर ही परीक्षा में शामिल हुए. अरे इतना ही नहीं कुछ बच्चों के पासपास पूरी किताब भी मौजूद थी. आलम ये था कि कोने में बैठी एक छात्रा के कपड़ों से तो पूरी गेसबुक ही निकल आई लेकिन क्या हुआ कोई कार्रवाई नहीं.

 

नकल की पर्चियां और किताबें छात्र तो छिपा कर लाते ही हैं लेकिन क्या गारंटी है कि जो पर्ची वो लाए हैं उसी से जुड़ा सवाल पूछा जाए. तो इसका उपाय ये है पूरे बिहार में स्कूलों की दीवारें बन जाती हैं नकल कराने वालों का सहारा खुद अभिभावक दीवारों पर चढ़ कर नकल कराते हैं. वो भी तब जब परीक्षा केंद्रों के बाहर धारा 144 लगा दी जाती है यानी कोई भी भीड़ नहीं लगा सकता. लेकिन किसी सुपर हीरो की तरह छात्रों के अभिभावक दीवारों पर चढ़ जाते हैं. मौका मिला तो परीक्षा कक्ष की खिड़कियों तक भी.

खिड़कियों से काम ना बने तो रोशनदान तक पहुंचने की कोशिश की जाती है. फुर्ती भी चाहिए और सही निशाना भी. यानी नकल का माल सीधे उस तक पहुंचे जिस तक पहुंचना है. ये साहब इसके माहिर दिखते हैं.

 

पुलिसवाले भी नकल के इस धंधे में शामिल हैं. पुलिसवाले ने गली में पहरा बिठा रखा है दरअसल गली में परीक्षाकेंद्र की खिड़कियां हैं जहां से नकल पहुंचाई जा सकती है. ऐसे में पुलिसवाले बाकायदा वसूली कर रहे हैं जो पैसे देगा वो नकल का सामान अंदर पहुंचाने के लिए गली में जाएगा वरना भगा दिया जाएगा.

 

सिर्फ एक जगह ऐसा नहीं हो रहा है. आगे की जिम्मेदारी इनकी. यानि पुलिसवाले पैसे लेकर कुरियर की तरह नकल अंदर पहुंचा देते हैं.  नवादा में तो महिला कर्मचारी पॉलीथीन बैग में पुर्जी लेकर वहां पहुंच गई जहां परीक्षा हो रही है.

 

कुछ और तमाशे नजर. देखिए यहां कैसे बांस के सिरे पर नकल की पर्ची सीधे तीसरी मंजिल पर पहुंचाई जा रही है.

 

अभिभावक चार मंजिला इमारत पर छिपकली की तरह चढकर पर्चियां पहुंचा रहे हैं . नकल करवाने वाले प्रोफेशनल खिलाड़ी की तरह दीवारों से चिपके हुए हैं . किसी सवाल का जवाब नीचे छूट गया तो देखिये कैसे रस्सी लटकाकर नीचे बैठे लोग पर्चियां ऊपर भेज रहे है .

 

इन तस्वीरों के बाद बिहार के छात्रों की मार्कशीट पर चढ़े नंबरों को कौन पूछेगा?  लेकिन बिहार सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. शिक्षा मंत्री पीके शाही तो पहले ही हाथ खड़े कर चुके हैं जब मंत्री ही बेबस हैं तो प्रशासन के इन लोगों को भी बहाना मिल गया है. जिम्मेदार अभिभावक भी हैं लेकिन उन्हें अपने ही बच्चों के भविष्य की चिंता नहीं है.

 

मीडिया का कैमरा देखकर कुछ लोग भले ही भाग खड़े हों लेकिन नकल का ये बेशर्म धंधा बेदस्तूर जारी है और इस पर मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि उन्हें इस पर यकीन ही नहीं है.

 

नीतीश कुमार ने कहा, ‘बिहार में मैट्रिक की परीक्षा में नकल की जो तस्वीरें सामने आई हैं मैं उनके प्रत्येक पहलू के विरूद्ध हूं. एक, इन तस्वीरों में पूरे बिहार की कहानी नहीं है. बिहार के छात्र मेधावी हैं, और देश और दुनिया में अपनी प्रतिभा से अपनी जगह बनाते रहे हैं. नक़ल की कुछ तस्वीरें बिहार की प्रतिभा पर हावी नहीं हो सकतीं.’

 

 

नकल के मामले में बिहार की तस्वीर तो बदल नहीं पाए नीतीश कुमार. साल 2010 में जब वो दोबारा बिहार के मुख्यमंत्री चुने गए थे उस साल भी नकल की ऐसी तस्वीर एबीपी न्यूज ने आपको दिखाई थी.

 

तब भी अभिभावक ऐसे ही दीवारों पर चढ़ा करते थे. तब भी छात्र ऐसे ही नकल का सामान लेकर परीक्षा कक्ष में पहुंचते थे और ऐसे ही बांस के जरिए नकल की पर्चियां परीक्षा कक्ष में भेजी जाती थीं. तो पांच साल में क्या बदला है नीतीश कुमार के बिहार में?

 

बिहार में नकल की वजह बदल गई है. दरअसल बिहार में कुछ सरकारी योजनाएं भी नकल को बढ़ावा दे रही हैं. पहले पास होने का लालच था और अब पैसे का लालच है.

 

बिहार में दसवीं क्लास में फर्स्ट क्लास से पास करने पर लड़कियों को दस हजार की स्कॉलरशिप मिलती है. एससी-एसटी और अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को भी फर्स्ट क्लास में मैट्रिक पास करने पर 10 हजार और द्बितीय श्रेणी में मैट्रिक पास करने वाले एससी-एसटी और अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को 8 हजार रुपये दिये जाते हैं .

 

ये लालच बच्चों को कम लेकिन उनके ऐसे अभिभावकों को ज्यादा हो सकता है. पीटीआई के मुताबिक तीन दिनों में अब तक 1000 के करीब छात्रों और अभिभावकों को गिरफ्तार किया गया है लेकिन इसका ज्यादा असर दिखाई नहीं दे रहा है. बिहार में विपक्ष कह रहा है बिहार की समूची शिक्षा व्यवस्था ही चरमरा गई है

 

हालांकि अब नीतीश सरकार ने ये एलान भी कर दिया है कि जिन केंद्रों से नकल की खबर आ रही है उनकी परीक्षा रद्द कर दी जाएगी. यही नहीं दावा ये भी किया गया है कि बिहार बोर्ड की आगे की परीक्षाओं में कोई नकल नहीं होने दी जाएगी

 

परीक्षा के लिए बिहार भर में बारह सौ सेंटर बनाये गये हैं . राज्य भर में 14 लाख 26 हजार बच्चे परीक्षा दे रहे हैं . इनमें से छह लाख 59 हजार छात्राएं हैं .

 

 करीब 14 लाख बच्चों के साथ परिवार को भी जोड़ लें तो करीब 50 लाख लोग सीधे बोर्ड परीक्षा से जुड़े होते हैं. बिहार में इसी साल चुनाव होने हैं ऐसे में नीतीश सरकार से एबीपी न्यूज पूछ रहा है कुछ सवाल?

 

क्या वोट बैंक के लिए नकल की अनदेखी की गई?क्या सुशासन यही है कि बिना मेहनत छात्रों को नंबर मिलें? और क्या बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करके सरकार लोकप्रियता कमाना चाहती है?

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: what is going on i bihar
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: Bihar cheating exam school
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017