What is the truth behind dancing daughters on father's funeral? जानें- क्या है पिता के शव के साथ बाजा बजाकर नाचती बेटियों का सच?

जानें- क्या है पिता के शव के साथ बाजा बजाकर नाचती बेटियों का सच?

पान की दुकान से अपना कारोबार शुरू करने वाले हरिभाई लालवानी 1990 के दशक में गुटखा किंग के नाम से मशहूर हुए थे.

By: | Updated: 13 Nov 2017 11:36 PM
What is the truth behind dancing daughters on father’s funeral?
नई दिल्ली: इन दिनों तस्वीरों और वीडियो के जरिए एक दावा किया जा रहा है कि कुछ लड़कियां अपने पिता की मौत पर बैंड बाजा बजाकर जश्न मना रही हैं और शव की अंतिम यात्रा निकाल रही हैं. सवाल ये है कि क्या वायरल वीडियो में वाकई पिता की मौत का जश्न मनाया जा रहा है? जानें क्या है सच?

पिता की मौत का जश्न क्यों मनाया गया?

दरअसल वीडियो में जो शव यात्रा दिखाई गई है वो शव यात्रा मशहूर गुटखा कारोबारी हरिभाई लालवानी की थी. हरिभाई लालवानी का जिंदगी और मौत के बारे में कहना था, ‘’ईश्वर ने भेजा है और ईश्वर ने ही बुलाया है, इसलिए मातम कैसा?’’ उनकी अंतिम यात्रा के दिन उनकी तस्वीर के साथ मौत के लिए उनकी सोच क्या थी ये भी लिखा था-

‘’मैं बदलकर रूप चला हूं

आंसू ना बहाना

मेरी अंतिम यात्रा है ये

इसका जश्न मनाना’’

हरिभाई की अंतिम इच्छा थी कि उनकी मौत पर मातम के बजाय जश्न मनाया जाय और उनकी बेटियां उनकी अर्थी को कंधा देने के साथ-साथ मुखाग्नि भी दें. हरिभाई की चारों बेटियों ने उनकी इसी अंतिम इच्छा को पूरा किया था.

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हरिभाई लालवानी कौन हैं?

दरअसल हरिभाई लालवानी एक मशहूर उद्योगपति और प्रिंस गुटखा कंपनी के संस्थापक थे. पान की दुकान से अपना कारोबार शुरू करने वाले हरिभाई लालवानी 1990 के दशक में गुटखा किंग के नाम से मशहूर हुए थे. हरिभाई लालवानी की चार बेटियां हैं, जिन्हें उन्होंने बेटों की तरह पाला है.

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हमारी पड़ताल में पिता के शव के साथ बैंड बाजे के साथ नाचती बेटियों का वीडियो सच साबित हुआ है.

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