कहां और क्या कर रहे थे राहुल गांधी?

By: | Last Updated: Thursday, 16 April 2015 4:45 PM
where was rahul gandhi ?

नई दिल्ली: 59 दिन के अज्ञातवास के बाद राहुल गांधी घर वापस लौटे हैं. अब तक उनकी एक झलक देखने को नहीं मिली है लेकिन सबसे ज्यादा इंतजार इस सवाल का है कि 59 दिनों तक कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी कहां थे और क्या कर रहे थे. इस सवाल का जवाब एबीपी न्यूज के पास है. राहुल गांधी के 59 दिनों का पूरा ब्योरा. वो कहां गए. क्यों गए और 59 दिनों तक क्या कर रहे थे.

59 दिनों बाद जैसे ही कांग्रेस उपाध्यक्ष के घर लौटने की खबर मिली. दस जनपथ से लेकर 12 तुगलक लेन तक गाड़ियों का काफिला दौड़ने लगा. कभी मां सोनिया गांधी बेटे से मिलने पहुंची. तो कभी बेटा मां के घर पहुंचा. कार्यकर्ताओं को पता चला तो वो दीवाली मनाने लगे.

 

कांग्रेस में खुशी की लहर दौड़ गई कि पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी वापस आ गए हैं लेकिन जश्न और परिवार से मेल-मिलाप के इस सिलसिले के बीच सवाल ये है कि राहुल गांधी 59 दिनों तक आखिर थे कहां.

 

जिस सवाल के जवाब का इंतजार सबको है वो जानकारी एबीपी न्यूज के पास मौजूद है. अभी तक कहा जा रहा था कि राहुल गांधी बजट सत्र से एक दिन पहले छुट्टी पर गए लेकिन ये है वो टिकट जो बता रहा है कि राहुल गांधी 16 फरवरी को सुबह साढ़े तीन बजे थाई एयरवेज की फ्लाइट से बैंकॉक गए थे. और 59 दिन बाद 16 अप्रैल की सुबह राहुल गांधी ने सुबह 7 बजकर 35 मिनट पर बैंकॉक से फ्लाइट ली और सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर राहुल गांधी दिल्ली पहुंच गए.

 

ABP न्यूज ने दो मार्च को ही ये खबर दिखाई थी कि राहुल गांधी थाईलैंड गए हैं . जहां उबान के पास एक बौद्ध मॉनेस्ट्री में मौजूद हैं और वो विपश्यना यानि ध्यान का कोर्स कर रहे हैं.

 

राहुल गांधी बुद्ध के जिस आश्रम में मौजूद थे वहां उन्हें हर रोज सुबह 3 बजे उठना होता था. सुबह साढ़े तीन बजे राहुल बौद्ध भिक्षुओं के साथ ध्यान करते थे. ध्यान के बाद राहुल गांधी आश्रम के किचन और सफाई के काम में हाथ बटांते थे. सुबह 8 बजे खाने का वक्त होता था लेकिन नियमों के मुताबिक दिन में सिर्फ एक बार कटोरे में खाना खाना होता था. दस बजे से फिर ध्यान का कार्यक्रम और शाम साढ़े चार बजे कुछ पीने के बाद सवा 6 बजे से मैडिटेशन करना होता था.

 

जो जानकारियां मिल रही हैं उसके मुताबिक पिछले दो महीनों से राहुल गांधी के दिन ऐसे ही बीत रहे थे. और इतना ही नहीं नियमों के हिसाब से राहुल गांधी वहां मनोरंजन का कोई साधन इस्तेमाल नहीं कर सकते थे. ना टीवी ना फोन ना इंटरनेट. सोने के लिए गद्दे या पलंग का इस्तेमाल भी नहीं कर सकते.

 

राहुल गांधी के अचानक गायब होने के बाद खबर आई कि कांग्रेस उपाध्यक्ष आत्मचिंतन करने गए हैं. दरअसल इससे पहले भी राहुल गांधी साल 2012 में रंगून के धम्मा ज्योति विपश्यना सेंटर में दस दिनों का कोर्स कर चुके हैं राहुल को रंगून में एस एन गोयनका ने विपश्यना सिखाई थी.

 

विपश्यना यानी जो जैसा है, उसे ठीक वैसा ही देखना और समझना विपश्यना है. विपश्य़ना में दस दिनों तक मौन धारण करना होता है. राहुल गांधी की बहन प्रियंका पहले से विपश्यना करती रही हैं प्रियंका के कहने पर ही राहुल ने 2012 में म्यांमार में विपश्यना का दस दिन का कोर्स किया था. लेकिन साल 2013 में राहुल गांधी 9 से 15 मार्च तक बौद्ध मॉनेस्ट्री में ध्यान के लिए आए थे. हालांकि राहुल गांधी की इस छुट्टी पर विरोधी तीखा हमला कर रहे हैं.

 

राहुल गांधी जब पहली रैली करने सामने आएंगे तब ही पता चलेगा कि 59 दिनों के इस ध्यान का क्या असर हुआ है.

 

 

पार्टी की दिशा और दशा कैसे बदलेंगे राहुल

राहुल कहां थे और क्या कर रहे थे इसका जवाब तो आपको मिल गया लेकिन राहुल गांधी के वापस आने के बाद वो क्या करेंगे. पार्टी की दिशा और दशा कैसे बदलेंगे.

 

राहुल गांधी छुट्टी पर थे और इधर मेघालय के सीएम मुकुल संगमा राहुल गांधी की तुलना Alfred the Great से कर रहे थे. करीब 1100 साल पहले का एक राजा जो युद्ध में हारने के बाद रहस्यमय तरीके से गायब हो गया था लेकिन जब वापस आया तो हर मोर्चे पर जीत हासिल की. लोकसभा से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस की करारी हार के बाद राहुल गांधी भी गायब हुए थे लेकिन वापसी के बाद क्या करेंगे इसके तो सिर्फ कयास लगाए जा रहे हैं.

 

विदेश दौरे से लौटने के बाद राहुल का पहला कार्यक्रम 19 अप्रैल को होने वाला है. रामलीला मैदान में पार्टी ने किसान रैली का आयोजन किया है जिसमें नए सिरे से केंद्र के खिलाफ राहुल आंदोलन का बिगुल बजाएंगे. सवाल पूछे जा रहे हैं क्या राहुल गांधी बीजेपी से लोहा ले पाएंगे.

 

दरअसल बदलाव की सबसे बड़ी चर्चा तो खुद पार्टी के अंदर है सबसे पहले खबर ये आई थी कि राहुल गांधी नाराज होकर छुट्टी पर गए थे. राहुल की छुट्टी के बीच ही उनके कई करीबियों का कद भी बढ़ाया गया था. सबसे ज्यादा चिंता कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को है क्योंकि कथित रूप से राहुल कमान वरिष्ठों लेकर यंग ब्रिगेड को देना चाहते हैं.

 

राहुल गांधी की 59 दिनों की छुट्टी के बीच काफी कुछ हुआ. शीला दीक्षित, संदीप दीक्षित, अमरिंदर सिंह जैसे पार्टी के बड़े नेताओं ने राहुल को नेतृत्व नहीं दिये जाने की आवाज उठाई. प्रियंका गांधी के महासचिव बनने की चर्चा हुई . मनमोहन और भूमि अधिग्रहण के सवाल पर सोनिया खुद सक्रिय हुईं.

 

इसलिए वजह कुछ भी रही हो राहुल गांधी को इतनी लंबी छुट्टी पर नहीं जाना चाहिए क्योंकि राजनीति महीने के तीसों दिन. हफ्ते में सातों दिन और दिन में चौबीस घंटों का काम है. खासकर उस पार्टी के लिए जिसे शून्य से शुरु करना है.

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