जासूसी कांड पर गडकरी की चुप्पी बरकरार, सुब्रमण्यम स्वामी ने की श्वेतपत्र जारी करने की मांग

By: | Last Updated: Tuesday, 29 July 2014 9:24 AM
Who is bugging at union Minister Nitin Gadkari’s residence?

नई दिल्ली: केंद्रीय परविहन मंत्री नितिन गडकरी जासूसी विवाद में सवाल बना हुआ है कि गडकरी के घर की जासूसी हुई या नहीं. हुई तो मुंबई के घर पर हुई या फिर दिल्ली के घर पर. आज फिर गडकरी से जासूसी को लेकर सवाल पूछा गया तो बिना जवाब दिये वो निकल गये. इसके पहले भी उन्होंने जवाब नहीं दिया था. हालांकि दो बार ट्विटर पर उन्होंने जासूसी की खबर का खंडन किया है.

 

नितिन गडकरी तो कुछ नहीं बोल रहे हैं लेकिन उन्हीं की पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी जासूसी कांड के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. आज सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मामले में श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है.

 

गडकरी की जासूसी का मामला पेचीदा होता जा रहा है, विपक्ष सरकार पर जासूसी कांड की जांच को लेकर सवाल उठा रही है लेकिन गडकरी इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं कि उनके घर से कोई जासूसी का उपकरण बरामद हुआ है .

 

नितिन गडकरी भले ही जासूसी की खबर से इनकार कर रहे हैं. लेकिन सूत्रों के मुताबिक गडकरी ने पार्टी को बड़े नेताओं को जासूसी की जानकारी दी है. सूत्रों के मुताबिक गडकरी के मुंबई वाले इस घर पर अक्टूबर महीने में जासूसी हुई .

 

सूत्र बता रहे हैं कि गडकरी के मुंबई के घर के बेडरूम से लिसनिंग डिवाइस यानी आवाज रिकॉर्ड करने की एक मशीन साफ सफाई के दौरान मिली. लेकिन गडकरी ने एक बार फिर जासूसी की खबर से इनकार करते हुए ट्विटर पर लिखा, “जैसा कि मैं पहले भी कह चुका है मेरे किसी भी घर से जासूसी की कोई मशीन बरामद नहीं हुई है.”

सबसे पहले द संडे गार्डियन अखबार ने जासूसी की खबर दी थी . विरोधी पार्टी के नेता जासूसी की जांच की मांग कर रहे हैं. लेकिन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि जब गडकरी ने खुद इस घटना से मना किया है तो जांच का सवाल ही नही उठता.. पीएमओ भी यही बात कह रहा है.

 

लेकिन बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी जासूसी का ठीकरा तत्कालीन यूपीए सरकार पर फोड़ रहे हैं. सवाल ये है कि अगर गडकरी के घर जासूसी हुई तो किसने करवाई.

 

पहला शक – अमेरिका
अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी से जुड़े रहे स्नोडन ने खुलासा किया था कि साल 2010 में अमेरिका ने बीजेपी समेत दुनिया की पांच राजनीतिक पार्टियों की जासूसी की थी. पिछले महीने इस खुलासे के बाद बीजेपी ने अमेरिका से अपना विरोध भी जताया था.

 

दूसरा शक – भारत सरकार

जिस वक्त जासूसी की बात सामने आ रही है उस वक्त देश में मनमोहन सिंह की सरकार थी . और उस वक्त गडकरी लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति बनाने वाली टीम के अहम सदस्य थे. हो सकता है बीजेपी खेमे की रणनीति जानने के लिए जासूसी करवाई गई हो .

 

तीसरा शक – बीजेपी

शक के घेरे में बीजेपी इसलिए है क्योंकि पार्टी में गडकरी के बहुत सारे विरोधी माने जाते हैं. पिछले साल ही गडकरी को अध्यक्ष की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी. ऐसे में पार्टी के भीतर से भी जासूसी के शक को दरकिनार नहीं किया जा सकता.

 

फिलहाल शक की  सुई इन तीन दिशाओं में घूम रही है. लेकिन खुद गडकरी ही जासूसी की खबर खारिज कर रहे हैं. ऐसे में बड़ा सवाल ये कि अगर जासूसी हुई तो फिर इसके पीछे कौन था और उसका मकसद क्या था?

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