कौन हैं राजेन्द्र कुमार? क्या-क्या हैं भ्रष्टाचार के आरोप?

Who is Rajendra Kumar and Whats are charges?

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. केजरीवाल ने राजेन्द्र कुमार को अपने 49 दिन के पहले कार्यकाल के दौरान भी प्रधान सचिव बनाया था. राजेंद्र कुमार अरविंद केजरीवाल के कितने करीब हैं इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि इसी साल दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने मुख्य सचिव अनिंदो मजुमदार के ऑफिस में ताला डालकर उसे सील कर दिया था और दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर की अनदेखी करते हुए राजेन्द्र कुमार को अपना प्रधान सचिव बनाया था.

rajendra kumar home

दिल्ली के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के घर के बाहर सीबीआई की टीम

राजेन्द्र कुमार दिल्ली सरकार में परिवहन और माध्यमिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग में रह चुके हैं. दिल्ली में ऊर्जा सचिव रहते हुए उन्होंने बिजली कंपनियों की मनमानी रोकने को लेकर कई कदम उठाया था. सूचना प्रौद्योगिकी प्रबंधन के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए उन्हें प्रधानमंत्री एक्सलेंसी अवार्ड भी मिल चुका है.

 

एक तरफ राजेन्द्र कुमार की ईमानदार अधिकारियों के रूप में गिनती होती है वहीं दूसरी तरफ राजेन्द्र कुमार भ्रष्टाचार के कई आरोपों से भी घिरे हैं.

 

इसी साल 15 जून का मामला है. राजेन्द्र कुमार के खिलाफ दिल्ली डायलॉग के पूर्व सचिव आशीष जोशी ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उनकी शिकायत एंट्री करप्शन ब्रांच से की थी. आशीष जोशी ने एसीबी को पत्र लिखकर राजेन्दर कुमार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे जिसमें राजेन्द्र पर शिक्षा और आईटी विभाग में अपने कार्यकाल के दौरान बेनामी कंपनियां बनाकर वित्तीय धांधली किये जाने की बात कही गई थी.
जोशी ने शिकायत में लिखा है कि ‘मेरे डीयूएसआईबी का चीफ डिजिटाइलेशन ऑफिसर रहने के दौरान मुझे आईटी विभाग से जुड़े राजेन्द्र कुमार की भ्रष्ट गतिविधियों का पता चला. मुझे दिल्ली सरकार द्वार डीओपीटी के साल 2010 के आदेशों का उल्लंघन करते हुए एकाएक अपने पद से हटा दिया गया. बाद में मैंने राजेन्द्र कुमार और दूसरे लोगों के खिलाफ संसद मार्ग और आईपी एस्टेट पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी’.
आशीष जोशी ने अपने पत्र में लिखा है कि राजेन्द्र कुमार 10 मई 2002 से लेकर 10 फरवरी 2005 तक निदेशक (शिक्षा) रहे. इस दौरान उन्होंने तिमारपुर में कंप्यूटर लैब बनाते हुए अशोक कुमार नाम के शख्स को इसका इंचार्ज नियुक्त किया. बाद में राजेन्द्र कुमार ने दिनेश कुमार गुप्ता और संदीप कुमार के साथ मिलकर एंडीवर्स सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी बनाई. गुप्ता शिक्षा विभाग को स्टेशनरी के सामान की सप्लाई करते थे. संपीप कुमार, अशोक कुमार से जुड़े हुए हैं. खास बात ये है कि अशोक कुमार ने 2009 में सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था. अशोक कुमार डीएएसएस कैडर से हैं और उन्होंने राजेन्द्र कुमार के साथ लंबे समय तक काम किया है.
आशीष जोशी के पत्र के मुताबिक साल 2007 में राजेन्द्र कुमार दिल्ली सरकार के आईटी सेक्रेटरी बने और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने एंडीवर्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ कंपनी को एक पीएसयू यानी सार्वजनिक क्षेत्र की उपक्रम के साथ इंपैनल करा लिया जिससे कि उनकी कंपनी बिना किसी टेंडर के ही सरकारी विभागों के साथ डील कर सके. आरोप है कि बिना टेंडर काम आवंटित किये जान से दिल्ली सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ. जोशी ने मामले में राजेन्द्र कुमार और बाकी लोगों और इसमें शामिल कंपनियों के गठजोड़ की जांच करने की मांग की थी.

 

राजेंद्र कुमार के खिलाफ दूसरा मामला सीएनजी फिटनेस घोटाले का है. दिल्ली में भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो (एसीबी) कमर्शियल वाहनों के लिए फिटनेस टेस्ट के दौरान कथित अनियमितता के मामले में आईएएस राजेंद्र कुमार से पहले ही पूछताछ कर चुकी है. दिलचस्प है कि जिस अधिकारी एमके मीणा को निगरानी विभाग का प्रमुख बनने से केजरीवाल ने रोकने की भरपूर कोशिश की थी, उसी अधिकारी ने राजेंद्र कुमार से पूछताछ की थी. बताया जा रहा है कि उनसे इस बारे में पूछताछ हुई है कि उन्होंने सीएनजी फिटनेस घोटाला मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की थी. कहा जा रहा है कि परिवहन सचिव रहते राजेंद्र कुमार ने कार्रवाई नहीं की थी.

 

क्या है सीएनजी फिटनेस घोटाला ?

 

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल में सीएनजी किट लगाने के लिए दो कंपनियों को ठेका दिया गया था. आरोप है कि इसमें 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान दिल्ली सरकार को उठाना पड़ा था.

 

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के समय सीएनजी किट लगाने ठेका एक कंपनी को दिया गया था. इसमें कई खामियां मिलीं थी. बिना टेंडर का ठेका दिया गया था. इसमें खर्च सरकार कर रही थी और आमदनी कंपनी ले रही थी. फर्जी फिटनेस टेस्ट करके पैसा लिया जा रहा था. जांच में पाया गया कि 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान दिल्ली सरकार को उठाना पड़ा था .

 

अरविंद के केजरीवाल के सबसे प्रिय नौकरशाह कहे जाने वाले राजेन्द्र कुमार मूलत: बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले हैं. 48 साल के राजेन्द्र कुमार दिल्ली आईआईटी से बीटेक हैं. राजेन्द्र कुमार झारखंड के नेतरहाट विद्यालय में वर्ष 1979 से लेकर 1984 तक पढ़ाई की है.

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Web Title: Who is Rajendra Kumar and Whats are charges?
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