कौन थे चौधरी चरण सिंह? कैसे उनकी विरासत गुंडागर्दी का बहाना बनी!

By: | Last Updated: Thursday, 18 September 2014 11:47 AM

नई दिल्ली: दिल्ली की नई सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह के बंगले को खाली क्या कराया, अब उनके समर्थक दिल्ली के पानी और बिजली को काट देने की धमकी दे रहे हैं.

 

अजित सिंह के समर्थक गुस्से में हैं और उन्होंने बंगले के खाली कराने को जाट समुदाय के मान सम्मान से जोड़ दिया है. उनकी मांग है कि जिस बंगले में अजित सिंह रहते हैं उसे चौधरी चरण सिंह का स्मारक घोषित किया जाए.

 

हरियाणा में चुनाव हैं, ऐसे में वहां के सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी वोट की खातिर जाट समर्थकों की हां में हां मिला रहे हैं. वह भी इसे चौधरी चरण सिंह और जाट के मान सम्मान का सवाल बता रहे हैं.

 

अजित सिंह से समर्थक जिसे चरण सिंह के लिए स्मारक की मांग कर रहे हैं उनके नाम से देश में अनेक सरकारी संस्थान हैं. फिर ये राजनीति क्यों और कौन हैं चौधरी चरण सिंह?

 

कौन हैं चौधरी चरण सिंह?

 

भारत की आजादी के बाद देश की राजनीति में चौधरी चरण का सिंह नाम एक कद्दावर किसान नेता, समाजसेवी और स्वतंत्रता सेनानी के तौर लिया जाता है, लेकिन समय बदलने के बाद उन्हें ‘जाट नेता’ के तौर पर जाना गया और अब नई पीढ़ी उनसे करीब-करीब अनजान हो चली है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आज भी उनके नाम पर राजनीति की जाती है.

 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के नूरपुर गांव के जाट परिवार में 1902 में जन्म लेने वाले चौधरी चरण सिंह देश के चौथे प्रधानमंत्री भी बने, लेकिन वह इस पद पर महज़ पांच महीने और 17 दिन ही रह सके. दुर्भाग्य की यह है कि वह अकेले ऐसे पीएम हैं जिन्होंने एक दिन भी लोकसभा का सामना नहीं किया.

 

स्वतंत्रता आंदोलन के रास्ते राजनीति में घुसने वाले चौधरी चरण सिंह 1950 के दशक में पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू के विरोध के कारण जाने जाते थे. उन्होंने किसानों की लड़ाई को बड़ी मज़बूती के साथ रखा और यही वजह है कि उन्हें किसान नेता के तौर पर जाना जाता है. 1967 तक कांग्रेस में रहने के बाद उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बना ली थी.

 

चौधरी चरण सिंह का निधन 1987 में हुआ. दिल्ली में यमुना के किनारे उनकी समाधि है जिसे किसान घाट के तौर पर जाना जाता है. उनके निधन के बाद लोक दल का नया अध्यक्ष उनके बेटे अजित सिंह को बनाया गया. इसी लोक दल के सहारे उनके बेटे आज राजनीति के मैदान में हैं.

 

देश में अनेक सरकार संस्थान चौधरी चरण सिंह के नाम से हैं. लखनऊ का अमौसी एयरपोर्ट को भी चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कहा जाता है. मेरठ में भी उनके नाम से चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय है.

 

कहां पहुंची विरासत

 

चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत उनके परिवार तक सिमट गई और उन्हें आज महज़ एक जाट नेता के तौर पर जाना जाता है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह जिलों में जाटों की खासी तादाद है और राजनीति नफा नुकसान के लिए चरण सिंह का नाम लिया जाता है.

 

अजित सिंह पर जब कोई राजनीतिक संकट आता है, वह जाट मान सम्मान का ऐसा खेल खेल जाते हैं कि बड़ी संख्या में जाट उनके समर्थक में कूद जाते हैं. इस बार भी मामला कुछ ऐसा ही है.

 

बीजेपी की लहर में लोकसभा चुनाव में अजित सिंह को बड़ी हार का सामना करना पड़ा. चुनाव हारने के बाद उन्हें सरकारी बंगला खाली करना था, लेकिन वह खाली नहीं करने पर अड़ गए, जिसके बाद उनके बंगले के पानी, बिजली को काटा गया, जिसके बाद उन्हें वहां से जाना पड़ा. अब उनके समर्थक इसे जाट मान सम्मान से जोड़ रहे हैं, तोड़फोड़ पर उतारु हैं. मौजूदा स्थिति से साफ है कि चौधरी चरण सिंह जैसा बड़ा नेता अब महज़ अजित के समर्थकों की गुंडागर्दी का बहाना बन गए हैं.

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Web Title: Who was chaudhary charan singh?
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