कौन बनेगा यूपी का नया डीजीपी, चर्चा में हैं तीन 'बिहारी' चेहरे!

कौन बनेगा यूपी का नया डीजीपी, चर्चा में हैं तीन 'बिहारी' चेहरे!

उत्तर प्रदेश में डीजीपी बनाए जाने में जाति का भी महत्व रहा है. रजनीकांत मिश्रा ब्राह्मण हैं जबकि ओमप्रकाश और भावेश ठाकुर जाति के हैं. यूपी के वर्तमान डीजीपी सुलखान सिंह भी ठाकुर समाज से आते हैं. ठाकुर के बदले ठाकुर हुआ तो फिर ओपी और भावेश कुमार सिंह में से किसी एक की ताजपोशी हो सकती है.

By: | Updated: 16 Sep 2017 06:15 PM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के डीजीपी सुलखान सिंह 30 सितंबर को रिटायर हो रहे हैं. सूत्रों की माने तो उन्हें सेवा विस्तार मिलने की उम्मीद बहुत कम है. ऐसे में यूपी का नया डीजीपी कौन होगा, ये चर्चा सत्ता के गलियारे में शुरू हो गई है. डीजीपी की रेस में तीन नाम अभी आगे चल रहे हैं. खास बात ये है कि ये तीनों पुलिस अफसर बिहार के रहने वाले हैं.


चर्चे में हैं ये नाम...


रजनीकांत मिश्रा इन दिनों बीएसएफ यानि सीमा सुरक्षा बल में एडीजी हैं. वे 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. इसके अलावा सीबीआई में भी लंबे समय तक काम कर चुके हैं. जावीद अहमद के बाद भी रजनीकांत को डीजीपी बनाने की चर्चा हुई थी लेकिन सबसे सीनियर होने की वजह से सुलखान सिंह को ये कुर्सी मिल गई.


जिस दूसरे नाम पर अटकलें लगाई जा रही हैं वे हैं ओम प्रकाश सिंह. अफसरों के बीच वो ओपी के नाम से जाने जाते हैं. इन दिनों वे सीआईएसएफ के डीजी हैं. 1983 बैच के आईपीएस अफसर रजनीकांत, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के करीबी माने जाते हैं.


इसके अलावा अगर गोरखपुर कनेक्शन ने काम किया तो फिर भावेश कुमार सिंह बाजी मार सकते हैं, इनका भी नाम रेस में है. अभी वे इंटेलिजेंस के डीजी हैं और योगी के करीबी माने जाते हैं. भावेश कुमार, गोरखपुर के आईजी भी रह चुके हैं. वैसे डीजी रैंक के पुलिस अफसरों में भावेश सबसे जूनियर हैं लेकिन यूपी के पिछले 35 डीजीपी में सिर्फ 7 मामलों में ही वरिष्ठता को आधार माना गया.


जाति का भी रहा है महत्व


उत्तर प्रदेश में डीजीपी बनाए जाने में जाति का भी महत्व रहा है. रजनीकांत मिश्रा ब्राह्मण हैं जबकि ओमप्रकाश और भावेश ठाकुर जाति के हैं. यूपी के वर्तमान डीजीपी सुलखान सिंह भी ठाकुर समाज से आते हैं. ठाकुर के बदले ठाकुर हुआ तो फिर ओपी और भावेश कुमार सिंह में से किसी एक की ताजपोशी हो सकती है. फैसला अगर ब्राह्मण जाति पर हुआ तो फिर रजनीकांत मिश्रा की लॉटरी निकल सकती है. वैसे डीजीपी की रेस में अगर किसी चौथे नाम पर मुहर लग गई तो कोई अचरज नहीं होगा. कानून व्यवस्था के मामले में योगी आदित्यनाथ को किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं है.


यूपी के सीएम ने पहले ही 'अपराधी प्रदेश छोड़ कर चले जाएं' का एलान कर चुके हैं. योगी राज में बदमाशों का इनकाउंटर शुरू हो चुका है. अखिलेश यादव के राज में पुलिस मुठभेड़ एक तरह से बंद हो गया था. योगी अपने लिए एक तेजतर्रार और चौबीसों घंटे अलर्ट रहने वाले डीजीपी चाहते हैं.

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