महाराष्ट्र: शिवसेना को एनसीपी का नाम लेकर बीजेपी डरा रही है ?

By: | Last Updated: Sunday, 19 October 2014 1:58 PM

नई दिल्ली: महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी की सरकार बननी तय हो चुकी है. हरियाणा में बीजेपी को बहुमत मिल चुका है, जबकि महाराष्ट्र में वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं.

 

बीजेपी को हरियाणा में बहुमत, महाराष्ट्र में चाहिए गठबंधन साथी 

महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवसेना या एनसीपी का साथ लेना पड़ सकता है. हलांकि बीजेपी किसका साथ लेगी, यह तस्वीर अभी साफ नहीं हो रही है. बीजेपी का संसदीय बोर्ड बैठक चल रहा है. महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार तय है और बीजेपी ने साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री उसी का होगा. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने उद्धव ठाकरे को फोन किया .

 

महाराष्ट्र में क्या हैं आंकड़ें?

 

महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में बीजेपी (गठबंधन )123, शिवसेना 63, कांग्रेस 42, एनसीपी 41, एमएनएस 01 और अन्य 19 सीट.

 

 

हरियाणा में क्या हैं आंकड़ें ?

 

हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में बीजेपी 47, आइएनएलडी 19, कांग्रेस 15, एचजेसी 02 और अन्य को 07 सीटें मिली हैं.

 

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क्या चल रहा है सियासत में समीकरण?

 

चुनाव प्रचार में भले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निशाने पर शरद पवार रहे हों लेकिन नतीजे आने के बाद एनसीपी खुद समर्थन देने का ऑफर कर रही है. एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा है कि बीजेपी के लिए महाराष्ट्र की जनता ने जनादेश दिया है. हम स्थाई सरकार के लिए बाहर से समर्थन देने को तैयार हैं. सूत्रों के मुताबिक आरएसएस ने एनसीपी से समर्थन लेने का विरोध किया है. बीजेपी की तरफ से उद्धव ठाकरे को फोन किया गया है.

 

शिवसेना बीजेपी की स्वाभाविक सहयोगी रही है. 25 साल तक राज्य में चले रिश्तों के अलावा केंद्र में एनडीए गठबंधन में बीजेपी और शिवसेना की भागीदारी इस संभावित गठजोड़ की उम्मीदों को मजबूत करती है. शिवसेना ज्यादा मोलभाव ना कर सके इसीलिए बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह ने यह कह कर कि गठबंधन तोड़ने का फैसला उनका नहीं था, शिवसेना को कड़ा संदेश देने की कोशिश की है.

 

बीजेपी नेता लगातार एनसीपी का नाम लेकर शिवसेना को डरा रहे हैं. चुनाव के दौरान लगातार बीजेपी के नेता एनसीपी को नेशनल करप्शन पार्टी कहा करते थे. तमाम तीखे हमले करते रहे लेकिन आज जब एनसीपी ने इनको बाहर से समर्थन देने की बात कही तो बीजेपी ने इनकार नहीं किया. भले ही इसे अभी स्वीकार नहीं किया हो लेकिन इनकार भी नहीं कर रहे हैं. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी एनसीपी के बाहर से समर्थन देने की चर्चा तो की लेकिन इस समर्थन को मना नहीं किया. ऐसा प्रतीत होता है कि बीजेपी नेता शिवसेना पर लगातार दबाव बनाने के लिए यह रणनीति बना रहे हैं. वैसे बीजेपी नेता राजनाथ सिंह महाराष्ट्र के जब पर्यवेक्षक बनाए गए तो कई राजनीतिक विश्लेषक यह मानने लगे कि यह शिवसेना से संबंध मधुर करने की रणनीति है.

 

हरियाणा में हाशिए पर आईएनएलडी?

हरियाणा में पहली बार बीजेपी की सरकार बनेगी. पार्टी ने अकेले दम पर कांग्रेस और आईएऩएलडी को हाशिए पर ला दिया है. परिवर्तन की इस लहर में जहां कांग्रेस का सूपड़ा साफ हुआ है, वहीं आईएऩएलडी की भी सत्‍ता से दूरी बरकरार रही है. बीजेपी को अब मुख्‍यमंत्री तय करना है. हरियाणा में हार की मुख्य वजह जाट बहुल इलाकों में बीजेपी ने सेंध लगाई. चुनाव से दो दिन पहले डेरा सच्चा सौदा ने बीजेपी को समर्थन देने की घोषणा की. सीएम हुड्डा के विरोध में कांग्रेस के दिग्गजों ने चुनावों से पहले छोड़ा साथ. इनमें चौधरी बीरेंद्र सिंह, विनोद शर्मा, अरविंद शर्मा और अवतार सिंह भडाना प्रमुख हैं.

 

हरियाणा में सीएम के दावेदार ?

 

बीजेपी में जाट नेताओं की बात करें तो कैप्टन अभिमन्यु, चौधरी बीरेंद्र सिंह और ओमप्रकाश धनखड़ प्रमुख दावेदारों में गिने जा रहे हैं. वहीं गैर जाट नेताओं में सीएम पद की दावेदारी के लिए केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष रामबिलास शर्मा, अनिल विज, कृष्णपाल गुर्जर के नाम चर्चा में हैं.

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