जेडीयू की लड़ाई अब चुनाव आयोग पहुंची, नीतीश गुट का दावा-हम हैं असली

जेडीयू की लड़ाई अब चुनाव आयोग पहुंची, नीतीश गुट का दावा-हम हैं असली

नीतीश कुमार की तरफ से आज पार्टी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला. पार्टी के वरिष्ठ नेता के सी त्यागी, आरसीपी सिंह, ललन सिंह और संजय झा इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे.

By: | Updated: 08 Sep 2017 05:39 PM
नई दिल्ली: असली जेडीयू कौन है, इसको लेकर झगड़ा बढ़ता जा रहा है. पहले शरद यादव गुट ने चुनाव आयोग में दावा किया कि वही असली जेडीयु हैं. और अब नीतीश कुमार गुट भी अपनी याचिका लेकर चुनाव आयोग पहुंच गया है. नीतीश गुट का कहना है कि पार्टी के ज़्यादातर सांसद, विधायक और पदाधिकारी नीतीश कुमार के साथ हैं लिहाज़ा उन्हीं का गुट असली पार्टी है.

नीतीश कुमार की तरफ से आज पार्टी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला. पार्टी के वरिष्ठ नेता के सी त्यागी, आरसीपी सिंह, ललन सिंह और संजय झा इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे. दरअसल शरद यादव गुट पार्टी पर अपनी दावेदारी ठोंकते हुए पहले ही चुनाव आयोग में याचिका दे चुका है. उसी याचिका के ख़िलाफ़ आज नीतीश कुमार गुट आयोग पहुंचा.

नीतीश कुमार गुट ने आयोग को दिए ज्ञापन में दावा किया है कि पार्टी के कुल 12 में से 9 सांसद, बिहार के सभी 71 विधायक और 30 विधान पार्षद समेत पार्टी के 98 फ़ीसदी पदाधिकारी उनके समर्थन में हैं. उनका ये भी दावा है कि चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त पार्टी की सभी 5 राज्य इकाई का समर्थन भी उनके पास है.

अब असली जेडीयू कौन है इसको लेकर गेंद चुनाव आयोग के पाले में है. प्रतिनिधिमंडल में आए जेडीयू के महासचिव और नीतीश कुमार के क़रीबी संजय झा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि साक्ष्यों के आधार पर चुनाव आयोग नीतीश गुट के पक्ष में ही फैसला करेगा. झा ने दावा किया कि शरद यादव गुट ने अपनी याचिका में अपने दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज़ नहीं दिया है लिहाजा उनका दावा खोखला है.

जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महागठबंधन छोड़कर एनडीए के साथ जाने के बाद से ही शरद यादव पार्टी से नाराज़ चल रहे हैं. दोनों के बीच ख़टास इतनी बढ़ गयी है कि नीतीश कुमार ने शरद यादव की राज्य सभा सदस्यता ख़त्म करने के लिए राज्य सभा सभापति वेंकैया नायडु को आवेदन भी दे दिया है.

प्रतिनिधिमंडल में शामिल राज्य सभा में जेडीयू के नेता आरसीपी सिंह ने कहा, 'अपनी सदस्यता बचाने के लिए शरद यादव बेचैन हैं और इसलिए समय को टालने के लिए ही उनके लोगों ने आयोग में याचिका दी है.'

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