हमेशा खुली बहस की चुनौती देने वाले केजरीवाल आज बहस से क्यों भाग रहे हैं?

By: | Last Updated: Tuesday, 1 December 2015 12:09 PM

नई दिल्ली : दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने विधानसभा में जनलोकपाल बिल पेश कर दिया है. कभी केजरीवाल की टीम का हिस्सा रहे प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने केजरीवाल के बिल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. एफएम रेडियो पर प्रशांत भूषण ने विज्ञापन देकर बिल को लेकर केजरीवाल को बहस की चुनौती दी है लेकिन केजरीवाल चुप हैं. सवाल ये है कि  केजरीवाल बहस से क्यों भाग रहे हैं?

 

अब तक अरविंद केजरीवाल ऐसे रेडियो विज्ञापनों के जरिये विरोधियों पर हमला बोलते थे लेकिन अब उन्हीं के हथियार से उन्हीं के पुराने साथी उन्हीं पर वार कर रहे हैं. प्रशांत भूषण ने रेडियो विज्ञापन जारी करके केजरीवाल को लोकपाल बिल पर बहस की चुनौती दी है दरअसल बहस की खुली चुनौती देना केजरीवाल की आदत भी रही है और राजनीति भी. अब तक दिल्ली से लेकर केंद्र के नेताओँ को केजरीवाल बहस की चुनौती दे चुके हैं.

 

 

लेकिन इस बार केजरवाल चुप हैं हालांकि उनकी टीम से आशीष खेतान बहस के लिए तैयार हैं. सवाल सिर्फ पुराने साथियों ने ही नहीं उठाए हैं अन्ना हजारे को भी लोकपाल बिल के मौजूदा स्वरूप पर एतराज है. अन्ना को लोकपाल को चुनने की समिति और हटाने की प्रक्रिया पर एतराज है. इसके अलावा केजरीवाल के लोकपाल बिल पर जो बड़ा सवाल उठ रहा है वो जांच के दायरे का है.

 

 

दरअसल 2011 के जनलोकपाल बिल के ड्राफ्ट में था कि देश का लोकपाल केंद्रीय अधिकारियों की जांच करेगा और राज्यों के लोकायुक्त राज्य स्तर के अधिकारियों की जांच करेंगे. लेकिन केजरीवाल के जनलोकपाल बिल 2015 में प्रावधान है कि दिल्ली का लोकपाल केंद्रीय मंत्रियों की भी जांच कर सकेगा.

 

 

दिल्ली की अपनी विधानसभा होने के बावजूद दिल्ली राज्य नहीं है. केंद्र-शासित प्रदेश है. ऐसे में केंद्र के अधीन आने वाली सरकार का लोकपाल कैसे केंद्रीय मंत्रियों की जांच करेगा.

 

 

अन्ना हजारे ने इस बिल पर कहा है कि, अगर ऐसा हो गया तो केंद्र शासन क्या इस पर राजी होगा? तो मैं बोला कि वो अड़ंगा नहीं डालेंगे इसमे तो वो बोले कि आप खड़े हो जाओ तो मैं बोला कि ठीक है आप करो फिर मैं देखता हूं कि क्या करना है.

 

प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के स्वराज अभियान का आरोप है कि ये हिस्सा इसीलिए डाला गया है ताकि बिल पास न हो सके.

 

केजरीवाल की टीम ने जनलोकपाल आंदोलन के समय कहा था कि जनलोकपाल की नियुक्ति नेताओं की मर्जी से नहीं होगी. लेकिन नए बिल में प्रस्ताव है कि समिति में 4 में से 3 लोग राजनीतिक पार्टी के होंगे.

 

केजरीवाल ने पहले कहा था कि जनलोकपाल को सिर्फ सुप्रीम कोर्ट से हटाया जा सकता है. अब केजरीवाल कह रहे हैं कि जनलोकपाल को विधानसभा दो तिहाई बहुमत से हटा सकती है.

 

केजरीवाल ने पहले कहा था कि जनलोकपाल के पास स्वतंत्र जांच एजेंसी होगी. अब सरकार चला रहे केजरीवाल कह रहे हैं जनलोकपाल जांच एजेंसियों और ट्रिब्यूनल पर आश्रित होगा और इन पर जनलोकपाल का नियंत्रण नहीं होगा.

 

केजरीवाल पहले कहा करते थे कि गलत शिकायत करने वालों पर सिर्फ जुर्माना लगेगा. नए मसौदे में शिकायत झूठी निकलने पर शिकायतकर्ता पर जुर्माने के साथ-साथ जेल का भी प्रावधान है.

 

कल ही दिल्ली विधानसभा में जनलोकपाल बिल पेश होने पर जश्न मनाया गया था. विधायकों ने केजरीवाल को गोद में उठा लिया था.लेकिन अब केजरीवाल का लोकपाल बिल सवालों के घेरे में है. केजरीवाल ने बहस के सवाल पर भी चुप्पी साध रखी है.

 

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Web Title: WHY KEJRIWAL AFARID OF DEBATE
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