देश को दाल क्यों नहीं दे पाए मोदी?

By: | Last Updated: Monday, 19 October 2015 3:41 PM
why pm modi did not stopped inflation?

नई दिल्ली: 100 ग्राम अरहर की दाल खाने से शरीर को 32 ग्राम प्रोटीन मिलता है. लेकिन दाल जब 200 रुपए किलो हो तो इस 32 ग्राम प्रोटीन पर भी आफत हो जाती है. पीएम की कुर्सी संभालने से पहले नरेंद्र मोदी ने दावा किया था कि वो देश में दाल की कमी होने की असली वजह जानते हैं जिसे वो बहुत जल्द दूर कर देंगे लेकिन सत्ता संभालने के 17 महीने बाद तक दाल के मर्ज का इलाज नहीं कर पाए प्रधानमंत्री मोदी.

 

हर-हर मोदी का नारा अरहर मोदी में क्यों बदल गया ये जानने के लिए 17 महीने पीछे चलना होगा.

 

अप्रैल 2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले आपके चैनल के पसंदीदा कार्यक्रम घोषणापत्र में मोदी से सवाल हुआ था कि वो महंगाई कैसे दूर करेंगे? जवाब में मोदी ने कहा था कि हमारे देश में खेती से पैदा होने वाली चीजों का रियल टाइम डाटा ही नहीं है. डाटा नहीं होने की वजह से पहले हम कम दाम में अपने खेत में उपजी दाल बाहर बेच देते हैं बाद में ख्याल आता है कि देश के पास तो दाल है ही नहीं तो फिर चार गुना दाम देकर वापस मंगा लेते हैं. पहले हम चीनी देश से बाहर बेचते हैं और फिर विदेश से खरीदते हैं 8 रुपए में बेचते हैं 80 रुपए में लाते हैं. सब उलझा हुआ है.

 

सवाल- लेकिन मोदी जी ये तो लॉन्ग टर्म है? ये लॉन्ग टर्म नहीं है ये तो तुरंत करने वाले काम हैं. पूरे 17 महीने हो चुके हैं प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता संभाले हुए. 17 महीनों पहले मोदी ने जो कहा था फिलहाल उसका असर होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है. अरहर की दाल 200 रुपए किलो तक पहुंच चुकी है.

 

जयपुर- 200-220 रुपये / किलो बिक रही है दाल

लखनऊ और छत्तीसगढ़ में 180 रुपये किलो

तो भोपाल में 210 रुपये किलो पहुंच गए हैं दाल के दाम

 

शायद आप ये नहीं जानते कि दुनिया में सबसे ज्यादा दाल भारत में पैदा की जाती है और सबसे ज्यादा दाल खाई भी जाती है. 100 ग्राम दाल खाने से 32 ग्राम प्रोटीन मिलता है. भारत में एक आदमी एक दिन में 42 ग्राम दाल खाता है.

 

हमारे आपके लिए प्रोटीन कितना जरूरी है इसे ऐसे समझ लीजिए हमारा शरीर एक इमारत है और प्रोटीन उस इमारत की मजूबत ईंट की तरह हैं क्योंकि बिना प्रोटीन के शरीर का कोई भी हिस्सा ठीक से काम नहीं कर सकता.

 

जो अमीर हैं या जिनकी जेब में ठीक ठाक पैसे हैं वो प्रोटीन का इतंजाम कर लेंगे लेकिन जिस गरीब आदमी की थाली से दाल की कटोरी ही गायब हो गई उसे प्रोटीन कैसे मिलेगा?

 

अब जरा दाल का हिसाब-किताब भी समझ लीजिए कितनी देश में है और कितनी मंगानी पड़ेगी. देश में हर साल 2300 करोड़ किलो दाल खाई जाती है. जबकि देश में दाल की पैदावार 1740 करोड़ किलो हुई है. सरकार 460 करोड़ किलो दाल का आयात कर रही है.

 

देश में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, और म्यांमार से दाल का आयात किया जाता है भारत को करीब 20 फीसदी दाल बाहर से खरीदनी पड़ती है वजह कि हमारे देश में जितनी दाल खाई जाती है उससे कम पैदा होती है.

 

आंकड़े बताते हैं कि देश को दाल के लिए किसी और के सामने हाथ ना फैलाना पड़े इसके लिए 2021 तक 280 लाख टन दाल की पैदावार करनी होगी. प्रधानमंत्री मोदी खुद किसानों से दाल की पैदावार बढ़ाने के लिए अपील भी कर चुके हैं.

 

सरकार क्या कर रही है?

 

लोगों को सस्ती दाल उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय भंडार के 100 स्टोर ने पिछले 4 दिनों में 120 रुपए किलो के हिसाब से 105 क्विंटल अरहर बेची है जबकि सफल ने 11 स्टोर से 99 क्विंटल अरहर की दाल पिछले 3 दिन में बेची.

 

इसके अलावा दाल के दाम पर काबू पाने के लिए जमाखोरी के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी चल रही है. भोपाल में तो करीब 5 हजार क्विंटल दाल जब्त कर ली गई है. इतना ही नहीं सरकार ने अब ये तय कर दिया है कि दाल बेचने और खरीदने वाले एक निश्चित मात्रा से ज्यादा दाल अपने पास नहीं रख सकते हैं. सरकार की इन कोशिशों के बाद दिल्ली में दाल के दाम 5 रुपए किलो कम हो गए हैं. 

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