अब बड़े रक्षा सौदों में सीधे तौर पर शामिल होंगे दलाल: रक्षा मंत्री

By: | Last Updated: Wednesday, 31 December 2014 7:25 AM

नई दिल्ली: बड़े रक्षा सौदों में अब दलाल सीधे तौर पर शामिल हो सकेंगे. मोदी सरकार जल्द ही रक्षा सौदों में बिचौलियों को मंजूरी देनी वाली है. इस बात का खुलासा खुद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने किया है. पत्रकारों से बातचीत करते हुए मनोहर पर्रिकर ने कहा, “एजेंट सिर्फ विदेशी कंपनियों से होने वाले रक्षा सौदों के लिए होंगे (यानि देशी कंपनियों से होने वाले सौदों में बिचौलिए नहीं होंगे). लेकिन शर्त यह है कि इन कंपनियों को सौदे से पहले ही इन एजेंट्स के बारे में खुलासा करना पड़ेगा. साथ ही ये दलाल कंपनी से ‘फीस’ लेंगे और उनका सौदे में कोई शेयर यानि हिस्सा नहीं होगा.”

 

रक्षा मंत्री ने कहा कि कंपनियों को इस फीस का खुलासा भी सौदे से पहले ही करना पड़ेगा. रक्षा मंत्री के मुताबिक रक्षा सौदों में बिचौलियों की मंजूरी के लिए जल्द ही डीपीपी (DEFENCE PROCUREMENT POLICY) यानि रक्षा खरीद प्रकिया में बदलाव करना पड़ेगा. साथ ही सीवीसी यानि केन्द्रीय सर्तकता आयोग से भी इसके लिए मंजूरी लेनी पड़ेगी. पर्रिकर के मुताबिक इस पूरी प्रकिया (यानि रक्षा दलालों को मंजूरी) में अभी एक-दो महीने लग सकते हैं. उसके बाद इन बिचौलियों को कानूनी मान्यता दे दी जाएगी.

 

मीडिया से बातचीत में पर्रिकर ने यह भी खुलासा किया कि कई ऐसी ब्लैकलिस्टेड कंपनियां हैं जिनसे ‘आंशिक रुप से बैन’ हटाया जा सकता है. उदाहरण देते हुए मनोहर पर्रिकर ने कहा कि अगर किसी कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया है तो जरुरी नहीं कि उस कंपनी से जुड़ी और कंपनियों से भी कोई सौदा नहीं किया जाए. साथ ही अगर एक कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया है तो जरुरी नहीं है कि उसकी मुख्य कंपनी पर भी बैन लगा दिया जाएं.

 

पर्रिकर ने बताया कि हाल ही में टाट्रा-ट्रक बनाने के लिए बीईएमएल ने UK-Tetra से स्पेयर पार्टस खरीदे हैं जबकि उसपर (UKTetra) बैन लगा हुआ है. रक्षा मंत्रालय के रिकॉर्ड्स के मुताबिक, अभी तक कुल 13 कंपनियां हैं जिनको ब्लैकलिस्ट किया गया है. इनमें से छह कंपनियों को 10 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया हैं और बाकी सात कंपनियों पर अनिश्चितकाल के लिए बैन लगा हुआ है.

 

इसके अलावा रक्षा मंत्री ने कहा कि वे रक्षा बजट को बढ़ाने की भी मांग करेंगे. साथ ही तीनों सेनाओं में दुर्घटनाओं को पूरी तरह से रोकने की कोशिश करेंगे. उन्होंने कहा कि नौसेना के जहाज और पनडुब्बी के डूबने, वायुसेना के एयरक्राफ्ट क्रैश होने, सेना में होने वाली दुर्घटनाओं की भी पूरी तरह से रोकने की जरुरत है. उन्होंने कहा कि इसके लिए जिम्मेदारी भी तय की जायेगी. उन्होंने कहा कि जो दुर्घटना के लिए जिम्मेदार लोग होंगे उनकी जवाबदेही भी तय होगी.

 

सैनिकों (और पूर्व-सैनिकों) के खिलाफ आर्म्ड ट्राइब्यूनल चल रहे मुकदमों को कम करने की कोशिश करेंगे. इस वक्त अलग-अलग ट्राइब्यूनिलस में सैनिकों से जुड़े कुल 10 हजार मुकदमें लंबित पड़े हैं. उनको जल्द ही पूरी तरह से रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कर दिया जाएगा. अभी बीआरओ रक्षा मंत्रालय के साथ-साथ भूतल परिवहन मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है, जो सड़क बॉर्डर के बेहद करीब होंगी वे ही बीआरओ द्वारा बनाई जायेंगी. जो थोड़ी दूर होंगी, वे एनएचएआई (नेशनल हाइवे ऑथोर्टी ऑफ इंडिया) बनाएगा.

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Web Title: Will legalise defence agents by mid-February, says Manohar Parrikar
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