केजरीवाल ने मारी पलटी, बोले- 40-50% वादे ही कर पाएंगे पूरे

By: | Last Updated: Tuesday, 21 April 2015 1:09 AM

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव में बड़े बड़े वादों के दम पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले अरविंद केजरीवाल क्या पांच सालों में पचास फीसदी वादे ही पूरा कर पाएंगे? 

 

ये सवाल उठा है, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ही एक बयान से. केजरीवाल सोमवार को दिल्ली सचिवालय में सिविल सर्विसेज डे के कार्यक्रम में बोल रहे थे.

 

दिल्ली सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा “शुरू में ये डर लग रहा था कि लोगों से किए वादे पूरे होंगे कि नहीं, लेकिन अब ये लगता है कि चालीस-पचास फीसदी वादे तो जरूर पूरे होंगे. अगर पचास फीसदी वादे भी पूरे होते हैं तो भी ये बड़ी बात होगी.”

 

केजरीवाल ने अधिकारियों से आगे बढ कर  सहयोग करने का आग्रह किया ताकि वो जनता से किया वादा पूरा कर सकें.

 

क्या क्या वादे किए थे

यहां ये याद करना जरूरी है कि केजरीवाल, चुनावी भाषणों में कहते थे कि उन्होंने सारा रिसर्च करवा लिया है और वो पांच साल में सारे वादे पूरा कर के दिखाएंगे. केजरीवाल के बड़े वादों में पूरी दिल्ली में फ्री वाइ-फाइ, जगह जगह सीसीटीवी, 20 कॉलेज, 500 स्कूल,  कॉन्ट्रैक्ट की जगह पक्की नौकरी, झुग्गी की जगह 5 लाख मकान, आधे रेट पर बिजली जैसे वादे शामिल हैं. बिजली-पानी पर फिलहाल केजरीवाल सरकार ने सब्सिडी दी हुई है. 

 

इसी तरह के 70 वादे, चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी नेता आशीष खेतान की दिल्ली डॉयलॉग टीम ने तैयार किए थे. वादों को पूरा करने के लिए केजरीवाल सरकार ने दिल्ली डॉयलॉग कमीशन बना दिया है जिसके चेयरमैन खुद मुख्यमंत्री हैं.  सवाल ये है कि क्या मात्र 2 महीने में ही केजरीवाल को आटे दाल का भाव मालूम पड़ गया है या ‘50% काम तो होंगे ही’ वाला बयान उनका ‘जुमला मुमेंट’ था?

 

एक्सपर्ट बनेंगे वैट कमिश्नर!

वैसे चुनावी वादों को पूरा करने के लिए सरकार को बड़े पैमाने पर फंड की जरूरत है.  कार्यक्रम में केजरीवाल ने ये भी कहा कि सरकारी खजाना भरने के लिए वैट कमिश्नर और एक्साइज कमिश्नर जैसे पदों पर नियुक्ति के नियमों को वे बदलने की तैयारी कर रहे हैं.

 

केजरीवाल ने कहा कि नियमों के मुताबिक इन पदों पर आइएएस की ही नियुक्ति हो सकती है, लेकिन यदि उनकी उम्मीदों के लायक कोई आइएएस नहीं मिला तो वो इन पदों के लिए दानिक्स अधिकारियों में से चुनाव करेंगे जरूरत पड़ी तो किसी एक्सपर्ट को भी वैट कमिश्नर बनाया जा सकता है.

 

बशर्ते कि वो बगैर छापामारी के सामान्य से ज्यादा वैट कलेक्शन करे.  ‘जो कहा-सो किया’ कि तर्ज पर यदि केजरीवाल ने वैट कमिश्नर जैसे पद पर किसी गैर आइएएस को बिठाया तो विवाद होना तय है.

 

“नियम कानून का झंझट खत्म करो”

बहरहाल केजरीवाल से पहले कार्यक्रम में उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी इसी सुर में कहा कि नियम कानूनों के पचड़े में पड़ कर हमारा सिस्टम धीमा और निकम्मा हो चुका है.

 

उन्होंने कहा कि कर्मठ अधिकारियों के लिए ट्रांसफर के नियम तक बदले जाएंगे बस अधिकारी आम आदमी का ख्याल रखें.

 

 

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Web Title: Would not be bad if we fulfill 50 percent promises: Arvind Kejriwal
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