योगेंद्र यादव, भूषण आप की पीएसी से बाहर

By: | Last Updated: Thursday, 5 March 2015 1:05 AM

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को बुधवार पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) से बाहर कर दिया गया और इस तरह पार्टी की आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गयी.

 

पार्टी की 21 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आप संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के समर्थकों ने यादव और भूषण को आठ के मुकाबले 11 वोटों से पीएसी से बाहर करने का फैसला किया. बैठक में केजरीवाल तथा अरणाचल प्रदेश से हाबुंग पायेंग मौजूद नहीं थे.

 

आम आदमी पार्टी में कुछ दिन से घमासान चल रहा था. भूषण तथा यादव ने केजरीवाल के पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक बने रहने पर सवाल खड़ा करने के साथ उनकी कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लगाया था. जिसके बाद केजरीवाल समर्थकों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रशांत और उनके पिता शांति भूषण पर पार्टी की सभी इकाइयों पर अपना नियंत्रण करने का प्रयास करने का आरोप लगाया.

 

सूत्र बताते हैं कि छह घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में माहौल काफी गर्मागर्म रहा. इसमें पार्टी के एक तबके द्वारा दी गयी जानकारियों को लीक करने में यादव की भूमिका पर विचार हुआ तो प्रशांत और उनके पिता के हाल के दिनों में आये बयानों पर भी चर्चा हुई.

 

यादव और प्रशांत को पीएसी से बाहर करने का प्रस्ताव उपमुख्यमंत्री और केजरीवाल के विश्वस्त सहयोगी मनीष सिसौदिया ने रखा. दोनों से पीएसी की सदस्यता छोड़ने के लिए कहा गया लेकिन उन्होंने वोट कराने की मांग की. इसमें केजरीवाल खेमे को 11 वोट मिले वहीं भूषण और यादव के पक्ष में आठ मत थे.

 

हालांकि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की अध्यक्षता करने वाले कुमार विश्वास ने वोट नहीं किया और कहा कि केवल समान वोट पड़ने की स्थिति में वह अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे.

 

 

योगेंद्र का बयान

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद भारी मन से योगेंद्र यादव ने कहा, “साथियों! मुझे केवल इतना ही कहना है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बहमत से जो फैसला हुआ है, उसकी अधिकारिक घोषणा राष्ट्रीय प्रवक्ता करेंगे, मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि आम आदमी पार्टी इस देश के हज़ारों हजार कार्यकर्ताओं के खून पसीने से बनी हुई पार्टी है, न जाने कितने के आशा का पूल है, और चाहे जो हो, ये आशा नहीं टूटनी चाहिए, ये आशा बनी रहनी चाहिए, और मैं अनुशासित कार्यकर्ता की तरह, पार्टी जो भूमिका देगी उसे मैं अपनी भूमिका निभाता रहूंगा.”

 

बैठक में क्या हुआ?

सूत्रों ने कहा कि पार्टी की पीएसी में दो और सदस्यों को शामिल करने का तत्काल कोई प्रस्ताव नहीं आया. यह भी साफ नहीं हुआ कि पीएसी से बाहर होने के बाद भूषण और यादव की क्या भूमिका होगी. पार्टी के एक नेता ने कहा, ‘‘फिलहाल पीएसी बाकी सदस्यों के साथ काम करती रहेगी. पीएसी के विस्तार के बारे में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है और यह अपना कार्यकाल पूरा करेगी.’’

 

कार्यकारिणी के आज के फैसले के बाद दोनों नेता बैठक से चले गये. यादव ने बैठक के बाद कहा कि वह पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता की तरह काम करते रहेंगे, वहीं भूषण यह कहते हुए निकल गये कि बहुमत से लिया गया निर्णय प्रभावी होगा.

 

राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने राष्ट्रीय संयोजक के पद से केजरीवाल के इस्तीफे की पेशकश को भी खारिज कर दिया और उनसे इस पद पर बने रहने को कहा.

 

कार्यकारिणी की बैठक के बाद उसमें लिये गये फैसलों की जानकारी देते हुए आप नेता कुमार विश्वास ने कहा कि यादव और भूषण को नयी जिम्मेदारियां दी जाएंगी.

 

विश्वास ने कहा, ‘‘पार्टी ने उन्हें पीएसी के सदस्यों के तौर पर जिम्मेदारी से मुक्त करने का निर्णय लिया है. उन्हें नयी भूमिकाएं और जिम्मेदारी दी जाएंगी.’’ उन्होंने कहा कि पार्टी की एकता के रास्ते में निजी विचार और निजी मतभेद आड़े नहीं आएंगे. पार्टी अपने वादों को पूरा करेगी और जनता के साथ विश्वासघात नहीं करेगी.

 

बैठक से पहले यादव ने पार्टी के आला पदाधिकारियों से सुलह की पेशकश करते हुए कहा था कि केजरीवाल का राष्ट्रीय संयोजक बने रहने पर सवाल का कभी मुद्दा रहा ही नहीं, वहीं भूषण ने कहा कि वह नैतिकताओं पर अडिग हैं.

 

दोनों ही नेताओं ने पिछले कुछ दिन में आरोप लगाये हैं कि तीन साल पुरानी यह पार्टी ‘स्वराज’ और पारदर्शिता के अपने मूल विचार से डिग गयी है.

 

पार्टी की पीएसी से निकाले जाने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में यादव ने कहा कि पार्टी हजारों कार्यकर्ताओं के खून और पसीने से बनी है जिनका विश्वास तोड़ा नहीं जाना चाहिए.

 

क्या अब पार्टी छोड़ेंगे योगेंद्र और प्रशांत?

आम आदमी पार्टी की पीएसी से हटाए जाने के बाद अब सवाल ये खड़ा होता है कि क्या योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण अब पार्टी छोड़ देंगे?

 

एबीपी न्यूज़ संवाददाता सरोज सिंह का कहना है कि जिस तरह से इन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया और अभी नई जिम्मेदारी नहीं दी गई है. उनके लिए पार्टी में बचा कुछ नहीं है.

 

सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या अरविंद केजरीवाल के खिलाफ़ पार्टी में आवाज़ उठाना पाप है?

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Web Title: Yadav, Bhushan dropped from AAP’s PAC
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