यादव सिंह की रिश्वत का ट्रस्ट कनेक्शन!

By: | Last Updated: Saturday, 6 February 2016 1:55 PM
yadav singh trust

नई दिल्ली: नोएडा प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह की मुश्किलें औऱ बढ गई है. सीबीआई ने यादव सिंह से जुडे पीजीपी चैरिटेबल ट्रस्ट की जांच शुरू कर दी है. शुरुआती जांच में पता चला है कि इस ट्रस्ट में जब तक यादव सिंह पद पर रहे करोडों रुपया दान के तौर पर आय़ा.

ट्रस्ट को साल 2009-10 में एक करोड 60 लाख का दान मिला तो साल 2010-11 में लगभग तीन करोड रुपया दान में मिला औऱ साल 2013-14 में कुल दान की रकम 5 करोड 63 लाख से ज्यादा पहुंच गई. अब यादव सिंह दानकर्ताओं के बारे में ट्रस्ट कोई जवाब नहीं दे पाया. इस ट्रस्ट की शुरुआती ट्रस्टी यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता और साले की पत्नी विधा देवी थी. सीबीआई को शक है कि इस ट्रस्ट में रिश्वत की रकम खपाई जाती थी. सीबीआई हिरासत में पूछताछ के दौरान यादव सिंह रिश्वत के ट्रस्ट में आई राशि के बारे में कोई जवाब नहीं दे पा रहे है.

सीबीआई की गिरफ्त में आए नोएडा प्राधिकरण के चीफ इंजीनियर यादव सिंह मीडिया से अपना मुंह छिपा रहे है औऱ साथ ही वो सीबीआई के जांच अधिकारियो के सामने भी बहुत से राज छुपाने की कोशिश कर रहे है लेकिन सीबीआई जांच के सामने उनकी सारी पोल खुलने लगी है. सीबीआई ने यादव सिहं से जुडे पीजीपी चैरिटेबल ट्रस्ट की जांच भी शुरू कर दी है. इस ट्रस्ट को साल 2009 में स्वास्थय औऱ शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए शुरू किया गया था औऱ इसकी शुरूआती ट्रस्टी यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता और साले की पत्नी विधादेवी थी.

yadav singh trustएबीपी न्यूज के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक इस ट्रस्ट में 2009 से 2014 तक जब तक यादव सिंह अपने पद पर रहे जम कर पैसा आया करोड़ों रूपयों की इस रकम को दान बताया गया लेकिन जब इस मामले की जांच शुरू हुई तो एक के बाद एक घोटाले की परते खुलने लगी.

दस्तावेज में साफ तौर पर दिखाया गया है कि ट्रस्ट को साल 2009-10 में एक करोड 60 लाख का दान मिला तो साल 2010-11 में लगभग तीन करोड़ रुपया दान में मिला औऱ साल 2013-14 में कुल दान की रकम 5 करोड 63 लाख से ज्यादा पहुंच गई. दिलचस्प यह भी है कि इस ट्रस्ट को दान में मिलने वाले पैसे के लिए आय़कर छूट भी मिली हुई थी.

दस्तावेजों के मुताबिक आरंभिक जांच के दौरान जब ट्रस्ट से दानकर्ताओं के बारे में पूछा गया तो वो कोई जवाब नहीं दे पाए औऱ ना ही इतनी मोटी रकम दान देने वाले किसी शख्स को जांच एजेंसी के सामने पेश कर पाए यही नहीं जांच एजेसी के सामने साल 2012 में बनाए गए ट्रस्ट के एक ट्रस्टी ने ये बयान दे दिया कि उसे ट्रस्ट के बारे में कुछ भी पता नहीं है औऱ उसने तो यादव सिहं की दोस्ती के कारण अपने साइन किए थे.

सूत्रों के मुताबिक इस ट्रस्ट के पास दिल्ली आगरा हाईवे के पास बडे पैमाने पर जमीने भी हैं. जांच एजेंसियों को शक है कि इस ट्रस्ट में यादव सिंह को मिलने वाली रिश्वत की रकम दान के जरिए जमा कराई जाती रही होगी सीबीआई हिरासत के दौरान इस बारे में यादव सिंह से गहन पूछताछ जारी है. सीबीआई को इस मामले में अब तक जो दस्तावेज मिले है उनसे यादव सिंह का आमना सामना कराया जा रहा है लेकिन सूत्रों का कहना है कि अब तक की पूछताछ के दौरान वो सीबीआई से भी कई राज छुपाने की कोशिश कर रहे हैं. सीबीआई ने भ्रष्टाचार औऱ धोखाधड़ी के आरोप में यादव सिहं को बुधवार को गिरफ्तार किया था औऱ फिलहाल वो सीबीआई रिमांड पर है.

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