याकूब की फांसी पर आमने-सामने जज, 'क्या हम फांसी पर रोक का सामूहिक आदेश दे दें?'

By: | Last Updated: Tuesday, 28 July 2015 11:30 AM

नई दिल्ली: याकूब की सजा पर जजों की राय बंट गई और फैसला बुधवार तक के लिए टल गया. सोमवार को जस्टिस अनिल दवे ने मामले के तथ्यों की दोबारा समीक्षा से इनकार किया था जबकि जस्टिस कुरियन जोसेफ ने क्यूरेटिव पीटिशन पर विचार के लिए अपनाई गई प्रक्रिया की कमी की तरफ इशारा किया था और सुनवाई की दिलचस्पी जताई थी.

 

मंगलवार को याकूब के वकील राजू रामचंद्रन ने क्यूरेटिव पेटिशन की दोबारा सुनवाई की मांग की लेकिन जस्टिस अनिल दवे ने उस मांग को सिरे से ख़ारिज कर दिया. फिर भी राजू रामचंद्रन ने जिरह करना जारी रखा. जस्टिस जोसेफ पूरी दिलचस्पी से इसे सुनते रहे.

 

राजू रामचंद्रन ने दलील दी कि याकूब की रिव्यू पेटिशन जस्टिस दवे, जस्टिस जोसेफ और जस्टिस चेलमेश्वर की बेंच ने की थी. क्यूरेटिव पेटिशन पर विचार के लिए तीन वरिष्ठतम जजों के साथ ही जस्टिस जोसेफ और जस्टिस चेलमेश्वर को भी बुलाया जाना चाहिए था. प्रक्रिया की इस कमी की वजह से क्यूरेटिव को दोबारा सुना जाना चाहिए. लेकिन सरकार के वकील अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने इसका पुरज़ोर विरोध करते हुए कहा कि अब मामले को दोबारा नहीं खोला जा सकता. क्यूरेटिव पर विचार के लिए मुख्य मामले को सुनने वाले जजों को आमंत्रित किया जाता है. रिव्यू सुनने वाले जजों को नहीं. मामले को लटकाने की कोशिश की जा रही है.

याकूब की क्यूरेटिव पिटीशन SC की बड़ी बेंच के हवाले, लेकिन फांसी पर रोक नहीं  

 

इसके बाद जस्टिस अनिल दवे ने फैसला सुनाया और इस मांग पर विचार के लायक न मानते हुए याचिका ख़ारिज कर दी. जस्टिस दवे की नाखुशी का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने कहा, अब मेरे भाई बोलेंगे… चिंता मत कीजिए वो याकूब को बचाने के लिए हर प्रयास करेंगे.

 

जैसा कि लग रहा था जस्टिस कुरियन जोसेफ ने क्यूरेटिव पेटिशन पर विचार के तरीके को गलत माना. जस्टिस जोसेफ ने ये भी कहा कि मामला बड़ी बेंच के पास भेजा जाए. बड़ी बेंच ये तय करे कि क्यूरेटिव पेटिशन पर दोबारा विचार किया जाए या नहीं. तब तक फांसी पर रोक लगी रहेगी.

 

बाद में दोनों जजों ने मामले को चीफ जस्टिस के पास भेजने का सामूहिक आदेश दिया. चीफ जस्टिस नयी बेंच का गठन.. कल होगी सुनवाई.

 

इसके बाद, जस्टिस कुरियन जोसेफ ने मामले की पैरवी कर रहे वकीलों से पूछा कि दो जजों में से एक ने फांसी पर रोक लगाई है, एक ने नहीं. इसका व्यवहारिक असर क्या होगा?

 

सभी वकीलों ने कहा कि ऐसी स्थिति में फिलहाल फांसी पर रोक नहीं मानी जाएगी. इस पर जस्टिस जोसेफ ने कहा कि क्या हम फांसी पर रोक का सामूहिक आदेश दे दें.

 

जस्टिस दवे ने ऐसा आदेश देने से मना कर दिया. अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने भी कहा कि आज ही चीफ जस्टिस से नयी बेंच के गठन का आग्रह किया जा सकता है. कल नयी बेंच सुनवाई कर सकती है.

 

याकूब के वकील ने कहा कि अगर किसी वजह से कल सुनवाई नहीं हुई तो 30 जुलाई को फांसी हो सकती है. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अगर कल सुनवाई नहीं हो पाई तो हम रोक की मांग के आड़े नहीं आएंगे. फिलहाल हमें सुनवाई का इंतज़ार करना चाहिए.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: yakub memon
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: Yakub Memon
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017