HIGHLIGHTS: याकूब की फांसी से लेकर अबतक का पूरा घटनाक्रम, जानें

By: | Last Updated: Thursday, 30 July 2015 5:37 AM
Yakub memon

नागपुर/नई दिल्ली: 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट में आज सुबह पहली फांसी हो गई. आज सुबह सात बजे याकूब मेमन को नागपुर सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई. याकूब की फांसी रोकने के लिए रात भर कानूनी दांवपेंच चलते रहे-लेकिन सुबह पांच बजे सुप्रीम कोर्ट की तरफ से याकूब की फांसी पर मुहर लगने के बाद उसे सुबह सात बजे फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया गया. कोर्ट से लेकर फांसी देने तक का पूरा अपडेट यहां पढ़ें

 

1. छ: अधिकारियों की मौजूदगी में दी गई फांसी

  • याकूब को फांसी दिए जाने के वक्त नागपुर सेंट्रल जेल में 6 अधिकारी मौजूद रहे. महाराष्ट्र की एडीजी जेल मीरम बोरवणकर, जेलर योगेश देसाई, नागपुर के कलेक्टर सचिन कुर्ने, मजिस्ट्रेट गिरीश जोशी, सीएमओ तिवारी और मेडिकल कॉलेज के डीन सावधिया.

  • फांसी देने के बाद इन सभी अधिकारियों ने याकूब की आत्मा की शांति के  लिए दो मिनट का मौन रखा. जिस वक्त फांसी दी जा रही थी उस समय फांसी यार्ड में उपस्थित सभी अधिकारियों का फोन जब्त कर लिया गया था.

 

2. कल रात से सुबह फांसी तक याकूब ने क्या किया
 

  • नागपुर सेंट्रल जेल के प्रशासन ने सुबह तीन बजे याकूब को जगाया, लेकिन खबर ये भी है कि वो रात भर सोया ही नहीं
  • उसे नहलाया गया, उसके बाद नाश्ते दिया गया-लेकिन उसने कुछ भी नहीं खाया.
  • याकूब की आखिरी इच्छा पूरी: जेल अधिकारियों ने याकूब से उसकी आखिरी इच्छा पूछी तो उसने बेटी से बात करने की इच्छा जताई जिसे तुरंत पूरा किया गया. फांसी से पहले याकूब ने बेटी से बात की
  • सुबह सात बजे याकूब मेमन को फांसी के फंदे पर लटकाया गया- सात बजकर दस मिनट पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया
  • फांसी के लिए बाहर से कोई जल्लाद नहीं बुलाया गया. दो कांस्टेबल ने इस काम को अंजाम दिया

 

3. नागपुर जेल में दी गई 22वीं फांसी है
 

  • आपको बता दें कि याकूब मेमन की फांसी 1947 के बाद महाराष्ट्र में दी गई 57वीं फांसी है, जबकि नागपुर सेंट्रल जेल में दी गई ये 22वीं फांसी है.
     
  • महाराष्ट्र की दो जेलों नागपुर की सेंट्रल जेल और पुणे की यरवदा जेल में ही फांसी देने का इंतजाम है. याकूब मेमन की फांसी के बाद 1993 के मुंबई बम धमाकों में पहला इंसाफ हो गया है.
  • 1993 में 257 लोगों की मौत के कई गुनहगार देश के बाहर हैं.


4. डेथ वारंट पर रोक लगाई तो न्याय के साथ मजाक होगा: जज

  • मेमन के वकीलों ने उसे फांसी के फंदे से बचाने का आखिरी दम तक प्रयास किया और मुख्य जज एच एल दत्तू के घर पहुंचे तथा फांसी पर रोक लगवाने के लिए उनके समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए अर्जी पेश की. इस अर्जी में कहा गया कि मौत की सजा पा चुके दोषी को अपनी याचिका खारिज किये जाने को चुनौती देने और दूसरे कुछ कामों के लिए उसे 14 दिन का समय दिया जाना चाहिए.
     

  • याकूब मेमन के वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर और युग चौधरी ने कहा कि अधिकारी उसे दया याचिका खारिज करने के राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती देने के अधिकार का उपयोग करने का अवसर दिए बिना फांसी देने पर तुले हैं. ग्रोवर ने कहा कि मौत की सजा का सामना कर रहा दोषी उसकी दया याचिका खारिज होने के बाद 14 दिन की मोहलत का हकदार है.

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  • इसके बाद मुख्य जज ने उसी तीन सदस्यीय पीठ का फिर से गठन किया जिसने पहले देर रात मौत के वारंट मुद्दे पर फैसला किया था.
     

  • इस मामले में आदेश जारी करने वाली न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा, ”मौत के फरमान पर रोक न्याय का मजाक होगा. याचिका खारिज की जाती है.” इस आदेश के साथ ही याकूब को मृत्युदंड निश्चित हो गया. मेमन की याचिका का विरोध करते हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने यह दलील दी कि उसकी ताजा याचिका व्यवस्था का दुरूपयोग करने के समान है. रोहतगी ने कहा कि तीन जजों द्वारा 10 घंटे पहले मौत के फरमान को बरकरार रखने को निरस्त नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि पूरे प्रयास से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उसका मकसद जेल में बने रहने और सजा को कम कराने का है.
     

  • पीठ का आदेश जारी करते हुए न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा 11 अप्रैल 2014 को उसकी पहली दया याचिका खारिज किये जाने के बाद पर्याप्त मौके दिये गए जिसके बारे में उसे 26 मई 2014 को सूचित किया गया. पहली दया याचिका याकूब मेमन की ओर से उसके भाई द्वारा दायर की गई थी.
     

  • न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि पहली दया याचिका खारिज किये जाने के बाद  आखिर बार परिवार से मिलने और  दूसरे कामों के लिए याकूब को पर्याप्त समय दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ”हमें रिट याचिका में कोई दम (मेरिट) नजर नहीं आता.’

 

5. इन नेताओं ने याकूब की फांसी पर दुख जताया

 

  • शशि थरुर का याकूब की फांसी पर ट्विट, ‘ सरकार ने एक इंसान को फांसी पर चढ़ा दिया इससे दुखी हूं,  सरकार प्रायोजित हत्याएं हमें नीचा दिखाती हैं, जिसने हमे हत्यारे के स्तर पर ला कर खड़ा कर दिया है.’
     

  • याकूब  की फांसी पर बोले दिग्विजय सिंह-  ‘याकूब को फांसी दी गई , सरकार और न्यापालिका ने त्वरित फैसले से पूरे देश के ,सामने मिसाल कायम की है, उम्मीद है आतंक के सभी मामले में जाति धर्म से ऊपर उठकर फैसले होंगे, हालांकि मुझे शक है ऐसा होगा, चलिए देखते हैं. सरकार और न्यायपालिका की विश्वशनीयता दांव पर है. ‘

     

  • समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने याकूब के फांसी पर अफसोस जताया. उन्होंने कहा कि ‘फांसी नहीं होनी चाहिये थी.

    उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण कमिशन के रिपोर्ट में लिखा है कि ‘1992 के मुंबई दंगो में मारे ढाई हजार लोगो को इंसाफ नहीं मिला. इसीलिए एक्शन का रिएक्शन हुआ. मैं दोनों को गलत मानता हूं लेकिन रिएक्शन पर सजा हो गई एक्शन पर सजा नहीं हुई.’
     

कल क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने

  • आपको बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले फांसी की सजा पर रोक लगाने की याकूब की याचिका पर आदेश जारी करते हुए कल कहा था, ”टाडा अदालत द्वारा 30 जुलाई को फांसी देने के लिए 30 अप्रैल को जारी किए गए डेथ वारंट में हमें कोई खामी नहीं दिखी.” कोर्ट ने कहा, ”इसे स्वीकार करके हम अपने कर्तव्य में विफल होंगे.”
     

  • कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में याकूब मेमन की ओर से पेश दलील आकषर्क प्रतीत होती है लेकिन इस पर बारीकी से विचार करने पर कोई खास वजन नजर नहीं आता है.
     

  • आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए याकूब के वकील ग्रोवर ने कहा कि यह एक दुखद और गलत फैसला है. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का समापन हो गया है और जीत का कोई सवाल नहीं है.

 

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