याकूब की क्यूरेटिव पिटीशन SC की बड़ी बेंच के हवाले, लेकिन फांसी पर रोक नहीं

By: | Last Updated: Tuesday, 28 July 2015 8:20 AM

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने याकूब मेमन की वह याचिका बड़े बेंच को भेज दी है जिसमें उसने 1993 के मुंबई बम विस्फोट मामले में 30 जुलाई को तय अपनी फांसी की सजा की तामील पर रोक लगाने की मांग की है.

 

मेमन की याचिका पर विचार करने के मुद्दे पर जस्टिस एआर दवे और जस्टिस कुरियन जोसेफ के बीच मतभेद होने के बाद ये केस बड़ी बेंच को रेफर किया गया है.

 

जस्टिस दवे ने जहां 30 जुलाई के लिए जारी मौत के वारंट पर रोक लगाने से इनकार किया,  वहीं जस्टिस कुरियन ने कहा है कि मौत की सजा पर तामील नहीं होनी चाहिए.

 

साझे आदेश में मामला प्रधान न्यायाधीश को भेज दिया गया जो मुद्दे पर शाम चार बजे विचार करेंगे.

 

जस्टिस दवे ने याकूब की याचिका खारिज करते हुए उसके जरिए मांगे गए क्षमादान का मुद्दा विचार के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल पर छोड़ा है.

 

जस्टिस कुरियन ने कहा कि मेमन की क्यूरेटिव पिटीशन पर नए सिरे से विचार होना चाहिये क्योंकि इसे उचित प्रक्रिया अपनाए बिना और इस अदालत के जरिए तय नियमों का पालन किए बिना खारिज कर दिया गया था.

 

जस्टिस कुरियन ने कहा कि क्यूरेटिव पिटीशन पर फैसला करने में कमी को सुधारे जाने की जरूरत है, नहीं तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए दोषी के जीवन के अधिकार का खुला उल्लंघन होगा.

 

जस्टिस कुरियन ने कहा कि क्यूरेटिव पिटीशन पर फैसला करने में कमी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है.

 

जस्टिस कुरियन का कहना है कि संविधान के तहत यह न्यायालय किसी व्यक्ति का जीवन बचाने के लिए है, यह असहाय नहीं है और उच्चतम न्यायालय जैसी अदालतों को शक्तिहीन नहीं होना चाहिए.

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Web Title: Yakub Memon case refer to larger bench
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