1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट: 30 जुलाई को फांसी पर लटकाया जाएगा दोषी याकूब मेमन

By: | Last Updated: Wednesday, 15 July 2015 2:15 AM

नई दिल्ली: 1993 के मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को 30 जुलाई को फांसी दी जाएगी. मुंबई की टाडा कोर्ट ने 53 साल के याकूब की फांसी का वारंट जारी कर दिया है. उसे नागपुर की सेंट्रल जेल में 30 जुलाई की सुबह सात बजे फांसी दी जाएगी.

हालांकि, सरकारी सूत्रों ने एबीपी न्यूज़ से कहा कि खुफिया रिपोर्ट के आधार पर कि फांसी की तारीख और जगह बदली जा सकती है.

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21 जुलाई के अंतिम फैसले का इंतजार

हालांकि इस केस की दया याचिका को दोबारा सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया है, जिस पर फैसला 21 जुलाई को आना है. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस केस  में सजा को लेकर दायर की गई पहली दया याचिका को अप्रैल महीने में ही  खारिज कर दिया गया है, और राष्ट्रपति की ओर से भी इस सजा पर मुहर लगा दी गई है.  अगर दूसरी बार भी सुप्रीम कोर्ट ये याचिका खारिज कर देती है तो मेमन को फांसी मिलनी तय है.

 

अगर याकूब मेनन को फांसी होती है तो 1993 के सीरियल ब्लास्ट केस में ये पहली फांसी होगी.

 

याकूब मेमन की दया याचिका सुप्रीम कोर्ट से लेकर राष्ट्रपति तक ने खारिज कर दी है.

 

इस पूरी प्रक्रिया में 22 साल लग गए. टाडा कोर्ट ने 27 जुलाई 2007 को याकूब को आपराधिक साजिश का दोषी करार देते हुए सजा-ए-मौत सुनाई थी. इसके बाद उसने बॉम्बे हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति तक के पास अपील की. लेकिन उसे राहत नहीं मिली. अब उसके पास क्यूरेटिव याचिका ही एकमात्र रास्ता है, जिस पर फांसी से पहले सुनवाई हो सकती है.

 

डेथ वारंट की पुष्टि

 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणवनीश के दफ्तर ने इस डेथ वारंट की पुष्टि कर दी है.

 

बताया जा रहा है कि फांसी देने के लिए हर जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई है और मुख्यमंत्री तक ने अपनी हरी झंडी दे दी है.

 

याकूब मेमन के परिवार को भी फांसी की तारीख के बारे में बता दिया गया है.

 

27 जुलाई 2007 को टाडा कोर्ट ने मेमन को फांसी की सजा सुनाई थी. वर्ष 1993 में मुंबई में भीड़ भरे 13 स्थानों पर हुए इन विस्फोटों में करीब 260 लोग मारे गए और 700 से अधिक घायल हो गए थे. इस केस में 123 आरोपियों में से 100 लोगों को सजा सुनाई गई थी.

 

क्या  है 1993 का पूरा मामला

12 मार्च 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार तरीके से 12 जगहों पर धमाके किए गए. धमाकों में 257 की मौत हो गई थी. जबकि 713 लोग बुरी तरह जख्मी हुए थे. बॉम्बे स्टॉक एक्सेंज की 28 मंज़िला इमारत की बेसमेंट में दोपहर 1.30 बजे धमाका हुआ जिसमें लगभग 50 लोग मारे गए थे.

 

इसके आधे घंटे बाद एक कार धमाका हुआ और अगले दो घंटे से कम समय में कुल 13 धमाके हो चुके थे. इस धमाके में करीब 27 करोड़ रुपए की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था. 4 नवंबर 1993 में 10,000 पन्ने की 189 लोगों के खिलाफ पहली चार्जशीट दायर की गई थी. 19 नवंबर 1993 में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था. 19 अप्रैल 1995 को मुंबई की टाडा अदालत में इस मामले की सुनवाई शुरु की . अगले दो महीनों में अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए गए.अक्टूबर साल 2000 में सभी अभियोग पक्ष के गवाहों के बयान समाप्त हुए. अक्टूबर साल 2001 में अभियोग पक्ष ने अपनी दलील समाप्त की. सितंबर 2003 में मामले की सुनवाई पूरी हुई. सितंबर 2006 में अदालत ने अपने फैसले देने शुरु किए.
 

इस मामले में 123 आरोपी हैं जिनमें से 12 को निचली अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई थी. इस मामले में 20 लोगों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई थी जिनमें से दो की मौत हो चुकी है और उनके वारिस यह मुकदमा लड़ रहे हैं. इनके अलावा 68 लोगों को उम्र कैद से कम की सज़ा सुनाई गई थी जबकि 23 लोगों को निर्दोष माना गया था.
 

नवंबर 2006 में संजय दत्त को पिस्तौल और एके-56 राइफल रखने का दोषी पाया गया, लेकिन उन्हे कई अन्य संगीन मामलों में बरी भी कर दिया गया. नवंबर 1, 2011 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरु हुई जो दस महीने चली. अगस्त 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था.

 

दाऊद, संजय दत्त हैं दोषी

इन धमाकों के मुख्य अभियुक्त दाऊद इब्राहम को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है. पुलिस का यह कहना रहा है कि यह धमाके भारत से बाहर रहने वाले दाऊद ने कराए थे.

 

साल 2006 में मुंबई की अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए जिन लोगों को इन धमाकों के लिए दोषी पाया था उनमें एक ही परिवार के चार सदस्य भी थे. इनके नाम थे यकूब मेमन, यूसफ मेमन, इसा मेमन और रुबिना मेमन. इन सभी को साजिश और आंतकवाद को बढा़वा देने के लिए दोषी पाया गया था.
 

ये सभी टाइगर मेमन के रिश्तेदार थे जिन्हें भी पकड़ा नहीं जा सका था. इस मामले में बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को गिरफ्तार किया गया और उन्हें 18 महीने जेल में बिताने पड़े थे. इसके बाद आरोप सही पाए जाने के बाद संजय जत्त को पांच साल की सजा दी गई है और इस वक्त वह जेल में अपनी सजा काट रहे हैं.

 

टाइगर मेमन के बारे में यह माना जाता है कि वो मुंबई में एक रेस्तरां चलाते थे और दाऊद के करीबी थे. इन धमाकों के मकसद के बारे में कहा गया था कि यह उन मुसलमानों की मौत का बदला लेने के लिए किए गए थे जो पिछले कुछ महीनों में हुए दंगों में मारे गए थे.

 

1993 मुंबई ब्लास्ट: 30 जुलाई को होगी याकूब मेमन को फांसी 

 

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