YEAR ENDER 2017: Historical Judgments by the Supreme Court and the High Court in 2017 YEAR ENDER 2017: सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और निचली अदालतों की तरफ से सुनाए गए ऐतिहासिक फैसले

YEAR ENDER 2017: सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और निचली अदालतों की तरफ से सुनाए गए ऐतिहासिक फैसले

YEAR ENDER 2017: अदालतों की तरफ से सुनाए गए इन फैसलों ने किसी को जेल भिजवा दिया तो कई बरी हो गए. वहीं, कई फैसले ऐसे भी हैं जो आने वाले दिनों में आमजन पर बहुत असर डालेंगे.

By: | Updated: 25 Dec 2017 11:37 AM
YEAR ENDER 2017:
नई दिल्ली: साल 2017 जल्द ही अलविदा कहने वाला है. इस साल सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और निचली अदालतों की तरफ से कई एतिहासिक फैसले सुनाए गए हैं. इन फैसलों ने किसी को जेल भिजवा दिया तो कई बरी हो गए. वहीं, कई फैसले ऐसे भी हैं जो आने वाले दिनों में आमजन पर बहुत असर डालेंगे. आइए आपको एक-एक कर बताते हैं इन फैसलों के बारे में.

तीन तलाक:

सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 22 अगस्त को एक साथ तीन बार तलाक बोलकर तलाक देने की व्यवस्था यानि तलाक-ए-बिद्दत को असंवैधानिक करार दिया था. जिसके बाद भारत में सदियों से चली आ रही इस कुप्रथा का अंत हो गया. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 11 से 18 मई तक नियमित सुनवाई चली थी. अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से तीन तलाक पर कानून बनाने को कहा था. इसके तहत केंद्र अब तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए लोकसभा में बिल पेश करने वाली है.

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निजता का अधिकार:

इसी साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने  एतिहासिक फैसला सुनाते हुए निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार करार दिया. सुप्रीम कोर्ट ने 50 और 60 के दशक में आए सुप्रीम कोर्ट के दो पुराने फैसलों को पलट दिया है. 50 और 60 के दशक में एम पी शर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट के 8 जजों और खड़क सिंह मामले में 6 जजों की बेंच कहा था कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है. इस फैसले के बाद आम नागरिक को बड़ी राहत मिली. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से केंद्र सरकार को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि केंद्र सरकार ने अपनी दलील दी थी कि निजता को मौलिक अधिकार का दर्जा नहीं दिया जा सकता.

क्या होते हैं मौलिक अधिकार?

मौलिक अधिकार, संविधान से हर नागरिक को मिले बुनियादी मानव अधिकार हैं. जैसे - बराबरी का अधिकार, अपनी बात कहने का अधिकार, सम्मान से जीने का अधिकार वगैरह. इन अधिकारों का हनन होने पर कोई भी व्यक्ति हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकता है.

राम रहीम को 20 साल की जेल

इसी साल अगस्त में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ साध्वियों से रेप के दो मामलों में अलग-अलग 10 साल की सजा सुनाई. सजा के एलान के बाद राम रहीम जेल में है. जज ने रेप पीड़िताओं को 14 -14 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया था. बता दें कि राम रहीम पर पंद्रह साल पहले डेरा सच्चा सौदा की साध्वी ने बलात्कार का आरोप लगाया था. साध्वी ने प्रधानमंत्री और हाईकोर्ट को चिट्ठी लिखकर राम रहीम की पोल खोली थी. सीबीआई ने इस मामले की जांच की और इसी साल लगभग पंद्रह साल बाद राम रहीम को उसके किए की सजा मिली.

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कोपार्डी मामला:

इसी साल नवंबर में महाराष्ट्र के चर्चित कोपार्डी दुष्कर्म और हत्या मामले में विशेष अदालत ने तीनों आरोपियों बाबूलाल शिंदे, संतोष गोरख भावल और नितिन गोपीनाथ भाईलुमे को फांसी की सजा सुनाई. अदालत ने कोपार्डी गांव में पिछले साल 15 साल की लड़की से बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में बाबूलाल शिंदे, संतोष गोरख भावल और नितिन गोपीनाथ भाईलुमे को बलात्कार, हत्या और आपराधिक साजिश रचने का दोषी करार दिया था.

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प्रद्यूम्न मर्डर केस:

इसी साल दिसंबर में गुरुग्राम के बेहद चर्चित प्रद्युम्न मर्डर केस में इसी स्कूल में 11वीं में पढ़ने वाले एक छात्र को गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में जुवेनाइल कोर्ट ने आदेश दिया कि 16 साल के आरोपी के साथ बालिग की तरह बर्ताव किया जाए. बता दें कि आठ सितंबर को गुरुग्राम के रेयान स्कूल में पढ़ने वाले सात साल के छात्र प्रद्युम्न ठाकुर की हत्या कर दी गई थी. इसके तुरंत बाद हरियाणा पुलिस ने स्कूल बस के कंडक्टर अशोक को गिरफ्तार किया था. बाद में इस केस को सीबीआई को सौंप दिया गया.

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टूजी घोटाला:

21 दिसंबर को देश के सबसे बड़े घोटाले टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में दिल्ली की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया. कैग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि इस घोटाले की वजह से देश को करीब एक लाख 76 हजार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा. इस मामले में ए राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी को जेल तक जाना पड़ा था. इनके अलावा कई कंपनियां और कई कारोबारी भी इसमें आरोपी थे.

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लालू यादव को फिर जेल:

23 दिसंबर को बिहार के सबसे चर्चित चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में रांची की विशेष अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव को दोषी करार दे दिया. लालू के अलावा 15 अन्य आरोपियों को भी कोर्ट ने दोषी करार दे दिया. अब लालू यादव जेल में हैं. लालू की सजा पर बहस तीन जनवरी को होगी तब तक लालू को जेल में ही रहना होगा.

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