अक्स: आईने में दिखती डरावनी दुनिया

बेहद थकावट के बावजूद वो सिर्फ डेढ़ घंटे के बाद दोबारा इसी तयशुदा वक्त पर जाग गया था. चंद लम्हे उसने दोबारा सोने की कोशिश की लेकिन वो इस में कामयाब नहीं हो सका.

By: | Last Updated: Tuesday, 11 July 2017 5:46 PM
aks by umera ahmad

शेर दिल की आंख किस वजह से खुली थी, उसे फौरी तौर पर अंदाजा नहीं हुआ. कमरे में जीरो वाट की रोशनी थी और यकीनन उसकी सुबह की हाजत (पेशाब-पाखाने की) नहीं थी जो रात के पिछले पहर उसको यूं जगाने की वजह बनी थी. अपने साथ लेटी हुई मिसाल को बहुत आहिस्तगी से हटाते हुए उसने बायां हाथ बढ़ा कर साइड टेबल पर पड़ा अलार्म क्लॉक उठा कर देखा. आज फिर 2.30 का वक्त था. उसने अलार्म क्लॉक वापस रख दिया. यह पिछले कई दिन से हो रहा था. वो कई दिन से रात के इस पहल बिल्कुल इस वक्त बगैर किसी वजह के जाग जाता और फिर उसको कोशिश के बावजूद नींद नहीं आती थी. आज रात वो एक टूर से वापस आया था और रात को तकरीबन एक बजे सोया था.

बेहद थकावट के बावजूद वो सिर्फ डेढ़ घंटे के बाद दोबारा इसी तयशुदा वक्त पर जाग गया था. चंद लम्हे उसने दोबारा सोने की कोशिश की लेकिन वो इस में कामयाब नहीं हो सका. बराबर में लेटी मिसाल का चेहरा कंबल से ढंकते हुए उसने बेड साइट टेबल लैंप ऑन किया और फिर अपने बेड पर उठ कर बैठते हुए उसने हमेशा की तरह शहर बानो को देखा. वह आज भी फिर बेड के दूसरी तरफ बिल्कुल बेड के आखिरी सिरे पर थी. एक करवट लेने पर वह बिस्तर से नीचे गिर जाती. वह आज भी कंबल से बाहर थी, नाइट शर्ट और पाजामे में एक नन्ने बच्चे की तरह सिकुड़ी सिमटी हुई…

शहर बानो नींद में उसके हाथ लगाने पर कसमसाई थी. शेर दिल ने बड़ी एहतियात के साथ उसे बेड के सिरे से दूसरी तरफ मिसाल के करीब किया फिर कंबल उसके गिर्द अच्छी तरह लपेटते हुए खुद बेडरूम से बाहर आ गया. उसका जिस्म बेहद थका हुआ था लेकिन जेहन मुकम्मल तौर पर तरोजाता था और यह एक बेहद अजीब कैफियत थी. वो कमरे से निकलते हुए एक जरसी पहन आया था. कमरे के बाहर कॉरीडोर की बंद लाइटें ऑन करते हुए वो हॉल की तरफ जाने लगा. वो स्टडी में जाकर कुछ देर काम करना चाहता था. स्टडी की तरफ जाते जाते घर के मरकजी दरवाजे के सामने से गुजरते हुए वो बुरी तरह ठिठका. बाहरी दरवाजे की चटखनी उतरी हुई थी. वो पुरानी तर्ज का डबल दरवाजा था.

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अंदरूनी तरफ लकड़ी का दरवाजा और बाहरी तरफ जाली के दरवाजे और इस वक्त अंदरूनी दरवाजे की चटखनी नीचे थी. शेर दिल रात को सोने से पहले किचन के पिछले दरवाजे से और मरकजी दरवाजे को खुद अंदर से बंद किया करता था और यह आदत उसे हमेशा से थी. वो सुबह सवेरे जॉगिंग के लिए निकलते हुए मरकजी दरवाजा खोलता था. खानसामां या घर का कोई दूसरा मुलाजिम रात को दरवाजे बंद हो जाने के बाद अंदर नहीं आ सकते थे जब तक वो अंदर से दरवाजा न खोल देता…और अब वो दरवाजे खुले थे. उसने अंदरूनी दरवाजा खोला, जाली के दरवाजे की दोनों चटखनियां भी खुली थीं, वो कुछ घबराहट के आलम में बाहर निकला. बाहर हल्की धुंध और तेज सर्दी थी लेकिन राउंड लेते हुए गार्ड ने घर के अंदर जलने वाली लाइट्स देखी थीं और वो चौकन्ना हो गया था. शेर दिल जब तक बाहर निकला, एक गार्ड उसे ड्राइव वे के पास ही मिल गया था.

“सर खैरियत है?” रात के पौने तीन बजे इस तरह बाहर निकलने पर शेर दिल उससे यही सवाल की उम्मीद कर सकता था. फौरी तौर पर उसकी समझ में नहीं आया कि वह गार्ड को क्या कहे या उससे क्या पूछे. वो सब जानते थे कि शेर दिल पहले अफसरों के बरअक्स किचन के पिछले दरवाजे को मुलाजिमों के लिए खुला नहीं छोड़ता था और रात को पिछले और मरकजी दरवाजे खुद बंद करके सोता था. अगर वो घर से किसी मुलाजिम को रात को निकलते देखते तो यह मुमकिन नहीं था कि वह उसे नजरअंदाज कर देते.

“घर से आज कोई बाहर तो नहीं निकला?” शेर दिल ने लहजा नॉर्मल रखते हुए गार्ड से पूछा.
“किस वक्त सर…?” गार्ड ने कुछ हैरान होकर पूछा.
“अभी रात को.”
“नहीं सर…मैंने तो किसी को निकलते नहीं देखा…खैरियत तो है सर?”
“कुछ नहीं…दरवाजा खुला था अभी जब मैंने देखा…और मैं रात को दरवाजा बंद करके सोया था.” शेर दिल ने उससे कहा.
“सर मैं अंदर चेक करता हूं.” गार्ड एकदम मुस्तैद हो गया.
“नहीं, मैं खुद देख लेता हूं शायद मैं ही रात को दरवाजे बंद करना भूल गया.” शेर दिल ने उसे रोक दिया. गार्ड को कुछ दूसरी हिदायतें दे कर शेर दिल वापस पलट आया था. उसने अंदर आकर बारी बारी तमाम कमरे बड़ी एहतियात से चेक किए थे. अंदर कोई नहीं था और बजाहिर सब कुछ ठीक था. शेर दिल कुछ उलझ कर हॉल में आकर खड़ा हो गया. वो खुद को यकीन दिलाना चाहता था कि दरवाजे बंद करना वो शायद भूल गया था औऱ यह एक इत्तेफाक था लेकिन उसका लाशऊर यह मानने पर तैयार नहीं था.

उसे बहुत अच्छी तरह दरवाजे बंद करना याद था क्योंकि वो रात को किसी टूर से बहुत लेट वापस आया था. उसकी आमद पर शहर बानो ने अंदरूनी दरवाजा खोला था. शेर दिल अगर खुद कभी घर पर न होता या उसे लेट वापस आना होता तो शहर बानो डिनर के बाद मुलाजिमीन के किचन साफ करने के बाद घर अंदर से बंद कर लेती थी. यह शेर दिल की हिदायतें थीं और शेर दिल क्यों इस मामले में इस कदर एहतियात पसंद करता था कि यह शहर बानो को कभी समझ नहीं आया लेकिन वो उसकी हिदायतों पर अमल करने की आदी हो चुकी थी.

दरवाजे में खड़े होकर शेर दिल ने ड्राइवर को अपने कल के किसी विजिट के लिए हिदायतें दी थीं और उसके जाने के बाद उसने दरवाजे बंद किए थे. शहर बानो उससे बातें कर रही थी जब शेर दिल ने उससे पूछा था.
“किचन का दरवाजा बंद कर लिया?”

“हां, डिनर के बाद ही कर लिया था.” शहर बानो ने उससे कहा था लेकिन शेर दिल फिर भी उसको वहीं छोड़ कर खुद अंदर एक बार दरवाजा देखने गया था तो कम से कम यह सवाल कहीं नहीं पैदा होता था कि वो दरवाजा खुद बंद करना भूल गया था और वो अब हैरानी की बात यह भी थी कि किचन का दरवाजा बंद था लेकिन घर का मरकजी दरवाजा खुला था.

हॉल में खड़े इस गुत्थी को सुलझाने की कोशिश में शेर दिल को एक सिगरेट की तलब हुई. वो हॉल से अपने बेड रूम में चला आया. मिसाल और शहर बानो दोनों उसी तरह गहरी नींद सो रही थीं. शेर दिल ने अपना सिगरेट का पैक और लाइटर उठाया और वहां से दोबारा हॉल में वापस आ गया और तभी उसे पहली बार याद आया कि उसने सिर्फ घर के ग्राउंड फ्लोर को चेक किया था. वो ऊपर वाली मंजिल पर नहीं गया था. एक सिगरेट सुलगा कर पैक और लाइटर वहीं मेज पर छोड़ते हुए शेर दिल सीढ़ियां चढ़ कर ऊपर आ गया. उसने ऊपर वाले फ्लोर की लाइट्स ऑन करना शुरू कर दी थीं. तमाम दरवाजों के बाहर उसी तरह ताले मौजूद थे. जिस तरह वो हमेशा देखता था.

सिगरेट के कश लेते हुए वो कुछ इत्मीनान से दरवाजों को देखते हुए मास्टर बेड रूम के सामने से गुजरा और फिर वो छत के दरवाजे को देखने उससे ऊपर वाली सीढ़ियां चढ़ने लगा और आधी सीढ़ी में ही वो जैसे करंट खा कर रुका था. छत का दरवाजा मुकम्मल तौर पर खुला था. शेर दिल के किसी बदतरीन अंदेशे की जैसे तस्दीक होती नजर आ रही थी. उसने छत को साफ भी करवा लिया था और उसकी मरम्मत भी करवाई थी शिफ्ट होने से पहले. छत पर अब वह लॉक नहीं लगाया जाता था क्योंकि शेर दिल कभी कभार छत का चक्कर लगाया करता था. सर्दियों में वहां धूप ही नहीं बल्कि वहां से शहर का नजारा भी बहुत शानदार होता था लेकिन शहर बानो की नापसंदीदगी की वजह से यह काम कभी कभार ही होता था. वो उस छत से खौफ खाती थी और छत आम तौर पर बंद रहती थी. लॉक न होने के बावजूद यह मुमकिन नहीं था कि कोई मुलाजिम छत पर जाता और फिर दरवाजा इस तरह चौपट खुला छोड़ आता.

शेर दिल बिजली की रफ्तार से आधे रास्ते से नीचे आ गया था. हॉल कमरे के इंटरकॉम से उसने गेट पर मौजूद गार्डों को अंदर आने की हिदायत दी. उनके आने तक वो अपने बेडरूम में आकर साइड टेबल की दराज में रखा अपना रिवॉल्वर निकाल लाया था. बेडरूम से निकलते हुए उसने बेड रूम के दरवाजे का बोल्ट बाहर से चढ़ा दिया.

अंदर आने वाले गार्ड्स में से एक को वो वहीं छोड़ते हुए दूसरों के साथ ऊपर चला आया था. छत का खुला दरवाजा देख कर गार्ड्स भी उसी तरह हैरान हुए थे. धुंध में लिपटी हुई वो लंबी-चौड़ी छत बिल्कुल खाली थी. गार्ड्स ने टॉर्च के साथ छत का एक एक हिस्सा चेक कर लिया था. वहां कोई नहीं था और छत पर खड़ा शेर दिल खुद को जैसे उस वक्त दुनिया का सबसे अहमक इंसान महसूस कर रहा था. एक गार्ड ने छत का दरवाजा दोबारा बंद कर दिया. सवालो-जवाब के किसी तबादले के बगैर शेर दिल वापस नीचे आया. नीचे वाला गार्ड बरामदे नुमा मेहराबी कॉरीडोर में उसी चक्कर काट रहा था. चंद रस्मी हिदायतों के बाद उन्हें भेज कर शेर दिल दरवाजे बंद करता हुआ रिवॉल्वर रखने अपने बेडरूम की तरफ आया और कुछ देर पहले ही की तरह वो एक बार फिर शॉक्ड हुआ. बेडरूम के दरवाजे का बोल्ट उतरा हुआ था. वो सोचे-समझे बगैर दीवानों की तरह कमरे में दाखिल हुआ. मिसाल और शहर बानो उसी तरह बिस्तर पर सुकून से सो रही थीं.

शेर दिल की जैसे जान में जान आई थी. चंद लम्हों के लिए बेमकसद कमरे में खड़े वो बिस्तर पर लेटी मिसाल और शहर बानो को देखता रहा फिर उसने बाथरूम और बराबर वाला कमरा चेक किया. रिवॉल्वर वापस साइड टेबल की दराज में रख कर शेर दिल कमरे में रखे सोफे पर बैठ गया. पूरे घर में सब कुछ ठीक था. इसके बावजूद शेर दिल यह मानने को तैयार नहीं था कि उसे दो दरवाजों पर लगी हुई चटखनियों के बारे में गलतफहमी हो सकती थी. खास तौर पर अपने बेडरूम के दरवाजे के बोल्ट के बारे में.

उस रात पहली बार वहां बैठ कर उसने उस घर के बारे में सुने हुए तमाम किस्से जेहन में दोहराए थे और घर की तारीख याद की. फिर पता नहीं क्या ख्याल आने पर वो दोबारा कमरे से निकल आया. हॉल में आकर उसने ऊपर जाने वाले कमरों की चाबियां निकालीं और दोबारा ऊपर के फ्लोर पर आ गया. उसकी जगह कोई और होता तो इस तरह के वाकए के बाद रात के किसी वक्त दोबारा ऊपर वाली मंजिल पर अकेला मौजूद न होता लेकिन वो अपने नाम का एक था.

उसने मास्टर बेड रूम के ताले को सारी चाबियां लगा लगा कर देखना शुरू किया. एक चाबी से दरवाजा खुल गया. शेर दिल ने दरवाजा खोल दिया. तारीक कमरे में उसे एक अजीब सा अहसास हुआ था. यों जैसे बहुत सी आंखें उसे देख रही हों. दरवाजे के पीछे स्विच बोर्ड को टटोल कर उसने कमरे की लाइट्स ऑन कर दीं. कमरे को बंद रखने के बावजूद बाकायदगी से साफ किया जा रहा था तो दरवाजा खुलने पर भी उसे वहशत नहीं हुई थी जो पहली बार उस कमरे का दरवाजा खुलने पर अंदर का बदतर हाल देख कर हुई थी. कमरे में अब भी बहुत पुराना फर्नीचर था और वो भी न होने के बराबर…शेर दिल आगे बढ़ आया. वो वहां क्या देखने आया था, वो नहीं जानता था लेकिन उसके बावजूद वो वहां मौजूद था. वो चंद कदम और आगे बढ़ा था जब एकदम अपने कदमों के करीब पड़ी किसी चीज ने उसे रोक दिया. पहली बार खौफ की लहर उसे सुन कर गई थी.

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(उमेरा अहमद की किताब अक्स का यह अंश प्रकाशक जगरनॉट बुक्स की अनुमति से प्रकाशित)

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