प्यार अनलिमिटेड: और रूममेट्स से प्यार हो गया, लड़कियों के पंखों को काबू करना कठिन है

By: | Last Updated: Thursday, 6 July 2017 10:21 PM
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दिल्ली में पीजी छिन जाने के बाद अक्षित ने रागिनी को अपने यहां पनाह दी. लेकिन उसके मन में यह कशमकश चलती रही कि वो उसे प्यार करती है या नहीं.
रूममेट्स
बिजली
और देखते देखते ही वे सब लड़कियां सड़क पर आ गईं. रागिनी तो रो ही पड़ी थी. अब कहां जाए? क्या करे? बड़ी मुश्किल से तो यह फ्लैट मिला था. अब वह भी छूट गया, अब क्या करेगी वह? वह कहां जाएगी? रागिनी रो रही थी.
दिल्ली में एक तो अकेली लड़की को घर नहीं मिलता और जब मिल गया तो तमाम तरह के “इफ्स एंड बट्स” होते हैं. आखिर इतने “इफ्स एंड बट्स” लेकर कोई क्या करेगा? मगर दिल्ली में लड़कियां करती हैं.
अब वे पांचों लोग आज पीजी से निकाले जाने पर रो रही हैं. बाकी निशा की कज़न रहती है दिल्ली में, वह तो वहां चली गई, रोशनी अपने बॉयफ्रेंड के साथ, इसी तरह रोहिणी और राधिका का भी इंतज़ाम हो गया, कोई रह गया तो बस रागिनी. अब रागिनी क्या करे? वह बाहर निकलते हुए सोच रही है.
उसे अपनी बदमाश साथियों पर गुस्सा आ रहा है. उसके तमाम बार मना करने के बाद भी सामने रहने वाले पांचों लड़कों को कितना इशारा किया करती थीं.
“ऐ, लड़कियों, हम को सब कुछ दिख रहा है, तुम लोग ओवरस्मार्ट नहीं बनना.”
साउथएक्स में बने उस बंगले में बने हुए पीजी के गार्ड ने उन लड़कियों से कहा था. उस पीजी के गार्ड को मालिक का एकदम स्ट्रिक्टइंस्ट्रक्शन था कि कुछ भी हो, लड़के नाम की प्रजातियों से लड़कियों को दूर रखना है. दिल्ली में पीजी चलाना हंसी खेल नहीं है. कब क्या हो जाए? उस पर लड़कियों का पीजी? खुदा बचाए! खिलखिलाती तितलियों से घिर कर शांत रह पाना बहुत कठिन. उन लड़कियों के पंखों को काबू करना कठिन है. पीजी चलाने वालों पर कभी भी केस हो सकता है. लड़की कहां क्या कर ले? पीजी वाले बहुत डरते हैं और काबू करने की कोशिश में कब वे लड़कियों पर स्ट्रिक्ट होते चले जाते हैं उन्हें ही नहीं पता चलता. लड़कियां एक जेल से निकलकर दूसरी में बंद हो जाती हैं.
इस बड़े बंगले के हर कमरे में चार या पांच लड़कियां रहती हैं. जो सबसे बड़ा कमरा है उसमें पांच लड़कियों में एक रागिनी भी थी. रागिनी घर से भागकर दिल्ली आई थी. दिल्ली में न किसी से जान न पहचान, बस एक लड़की से उसके शहर में हल्कीसी मुलाक़ात हुई थी, और वह उससे ही जुड़कर चली आई थी.
उसे बहुत अच्छी तरह से ध्यान है, कि किस तरह उसके चाचा चाची उसकी शादी एक अंधे लड़के से कर रहे थे कि उसकी सारी दौलत हड़प लें, और वह किसी तरह अपनी जान बचाते हुए वहां उनकी कैद से भाग आई थी. दिल्ली में रहना हालांकि बहुत कठिन था, मगर यहां पर बहुत ही जल्द वह मैगीकल्चर और कढ़ी कल्चर दोनों के मिले-रूप में घुल गयी.
रीना ने उसकी नौकरी दिलाने में मदद की और उसके बाद यह पीजी दिलाने में. इस पीजी में किराया थोड़ा ज़्यादा था, मगर लड़की सुरक्षित थी, सीसीटीवी थे, गार्ड था सब कुछ था.
मगर अब तो बाकी लड़कियों की शरारत के कारण वह भी छिन गया. अब तो वह बाहर बैठी है. अब क्या करे?
“अरे तुम? तुम बाहर कैसे?”
रागिनी ने अपना मुंह उठाया. अरे यह तो उन्हीं लड़कों में से एक है जिनके कारण उसे निकाला गया है. रागिनी ने मुंह फेर लिया.
लड़के ने हार नहीं मानी, उसने फिर कहा “क्या हुआ है, कुछ बोलोगी? और तुम्हारी बाकी सहेलियां कहां हैं? वो चारों मेरे चारों दोस्तों को खूब इशारे करती हैं.”
“साला क्या कहें, आज कल लड़कियों को!”
“क्यों क्या कमी है? क्या हर समय लड़कियां ही गलत हैं?” रागिनी ने आंखों में मोती जैसे आंसू भर कर उससे पूछा.
वह अक्षित था. अक्षित उसकी आंखों के सवाल से एकदम से चौंक गया.
“गलती मेरी रूममेट्स ने की और भुगतूं मैं? अब मैं कहां जाऊं?” वह अक्षित से बोलती जा रही थी.
“दिल्ली में मेरा कोई नहीं है और फ्लैट लेना कितना कठिन है? मैं क्या करूं अब?” रागिनी रो रही थी.
“अरे रोओ मत, देखता हूं, क्या कर सकता हूं.” अक्षित वाकई उसके दुख से दुखी हो गया था.वह उसकी परेशानी से परेशान था और चाहता था उसके लिए कुछ करे? मगर क्या? अपने किसी रिश्तेदार के घर क्या कहकर ले जाता और पीजी मिलना तो बहुत कठिन था.
बहुत देर तक सोचने के बाद वह बोला,“सुनो, तुम मेरे साथ मेरे फ्लैट में चलो, देखते हैं बाद में!”
हालांकि रागिनी बहुत कंफर्टेबल नहीं थी, मगर फिर भी वह चल दी क्योंकि उसके पास और कोई रास्ता नहीं था. रात होने लगी थी.
मगर उस फ्लैट में जाकर तो जैसे विस्फोट हो गया.
“अबे साले, किसी भी लड़की को उठा लाया!”
“अब हम कैसे रहेंगे?”
“अरे यार थ्री बेडरूम और एक सर्वेंट वाला रूम मिलाकर कुल चार ही बेडरूम हैं, मोहित दिन में आता है तो वह कहीं भी सो जाता है, अब इसे कहां सुलाएंगे? अबे दिमाग लगाता भी है या नहीं!”
अक्षित अपने साथियों की फटकार सुन रहा था, और रागिनी एक तरफ अपना बैग लेकर खड़ी थी, “यार, कुछ दिनों की ही तो बात है, फिर तो इसने चले ही जाना है, तब तक मेरे रूम में रह लेगी और मैं इस बीच में ड्राइंग रूम में सो जाऊंगा,” अक्षित ने कहा.
उस दिन फ्लैट में खूब धूम धड़ाका हुआ, खूब लड़ाई झगड़ा हुआ.अक्षित और उसके दोस्तों में जमकर बहस हुई और अंत में यह तय हुआ कि यह लड़की अक्षित के कमरे में रहेगी और बदले में उन सबके लिए चाय भी बनाएगी, और कमरे से बाहर केवल काम के लिए ही निकलेगी. इन शॉर्ट,बॉयज वाली बातों पर ध्यान नहीं देगी.
रागिनी ने हर शर्त मान ली और अक्षित को “थैंक्स” कहा.
“अरे मैडम, हम सबकोथैंक्स कहिए न.”
बाकी सब लड़के हंस पड़े.
थोड़े दिन तक लड़कों ने एडजस्ट किया.फिर उन्हें अनकंफर्टेबलफील होने लगा. क्योंकि वे लोग तौलिया लपेट कर गाना गाने वालों में से थे, कभी किसी तरह से बैठते, कभी कुछ बातें करते, मगर अब रागिनी थी, तो अब सोच समझ कर बोलना पड़ता. अपनी बॉयिश बातें रोकनी होतीं और रागिनी किसी न किसी काम से आ जाती. अब ये सिस्टम चल नहीं पाएगा. और बीच में टीवी वाले रूम में अक्षित के सोने से भी प्रॉब्लम होने लगी थी. अंत में सबने एक मत से यही कहा कि “रागिनी को जाना होगा.’’
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(बिजली की कहानी रूममेट्सका यह अंश प्रकाशक जगरनॉटबुक्स की अनुमति से प्रकाशित)

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