लव थेरेपी: किस ज़माने के गाने सुनती हो यार? | Read Bijali's story Love Therapy

लव थेरेपी: किस जमाने के गाने सुनती हो यार?

चंद्रभान और वो दोनों ही गुड़गांव में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं. वे दोनों कश्मीरी गेट पर मिलते हैं, वहां से मेट्रो का सफर खुद तय करते हैं. दोनों को इस रिश्ते में दो साल हो गए हैं और अब वे दोनों शायद शादी करना चाहते हैं.

By: | Updated: 14 Nov 2017 08:03 PM
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ऑफिस ख़त्म होते ही लीना ने फिर से अपने कान में इयरफोन लगा लिया और मेट्रो में एक तरफ बैठ गई. यह उसकी रोज़ की आदत थी. मेट्रो में एक तरफ बैठ जाना और गाने सुनते जाना. फिर उसे दीन दुनिया से कोई मतलब नहीं रहता था, उसे कोई मतलब नहीं होता था कि उसके पास कोई खड़ा है या नहीं, वह भली या उसका फोन भला!


“अरे, फिर तुम बैठ गईं ये गाने लेकर? यार मुझे प्रेम में उदास होना, आहें भरना बिल्कुल पसंद नहीं. सारे सैड सॉन्ग की डीवीडी उठा के फेंक दूंगा. क्या ऑफिस से आते ही कोने में बैठ जाती हो? किस ज़माने के गाने सुनती हो यार?”


लीना मुस्कराई, “नए जमाने के भी सुनती हूं. अरिजीत सिंह के, और तुम खूब डीवीडी फेंक दो. क्या क्या फेंक दोंगे. पेन ड्राइव में भरे हैं गाने. मोबाइल पर गाने के सारे एप डाउनलोड कर रखे हैं.”


चंद्रभान और वो दोनों ही गुड़गांव में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं. वे दोनों कश्मीरी गेट पर मिलते हैं, वहां से मेट्रो का सफर खुद तय करते हैं. दोनों को इस रिश्ते में दो साल हो गए हैं और अब वे दोनों शायद शादी करना चाहते हैं. वह चाहती है, शादी करना और चंद्रभान भी, मगर समस्या क्या है?


“हां, तो तुम्हें बहुत शौक है उदास रहने का. हांय?”


चंद्रभान ने अमिताभ बच्चन की नक़ल उतारते हुए लीना को घेरा.


“अभी, तुम ऐसा करेगा तो आगे क्या होगा? हांय?”


अब चंद्रभान उसकी बगल में खाली हुई सीट पर बैठ गया था. लीना ने अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया. लीना को उसकी धड़कनें सुनना बहुत पसंद था. वह सुनती रहती थी उसकी धड़कनें. उसे लगता कि इनमें उसका नाम ही तो बजता है.


“नहीं यार. मैं नहीं चाहती, मगर क्या करूं? मैं शाम होते ही अजीब सी उदासी से घिर जाती हूं. पता नहीं क्यों. जब तुम्हारे साथ होने का वक्त होता है. सब अपने अपने घरों में लौटते हैं, मगर मैं क्या करूं? मैं घर जाना भी चाहती हूं और नहीं भी. मुझे अच्छा नहीं लगता. मां मुझे डराती रहती हैं.”


लीना उसके सीने पर सिर रखे रखे ही बोलती जा रही है, “देख ले. अभी तो बहुत प्यार जता रहा है. बाद में क्या हाल करेगा. सोच ले...पता नहीं क्या क्या बोलती रहती हैं. मैं तुम्हारे साथ तुम्हारी लाइफ में एंटर करना चाहती हूं, मगर एक तरफ मां है और मां की लव के बारे में टर्म्स एंड कंडीशन, अब तुम बताओ मैं क्या करूं?”


लीना बोलती जा रही थी, “वे नहीं चाहती कि मैं लव मैरिज करूं. उनका कहना है कि अजनबी से शादी करूं, जिससे उसे कुछ साल तक जानूं, बूझूं, मतलब लड़ाई करने के लिए समय रहे. कुछ साल जानने समझने में गुज़र जाएंगे.”


“हद है यार! तुम्हारी मां का लॉजिक! इस तरीके से तो अरेंज मैरिज में डिवोर्स होने ही नहीं चाहिए. मगर उनमें भी होते हैं, मेरी बुआ का ही हुआ.” चंद्रभान को गुस्सा आ गया.


“आई कैन अंडरस्टैंड यार, बट क्या किया जाए? उनका खुद का एक्सपीरिएंस बहुत ही खराब रहा है यार! इसीलिए वे कहती हैं कि पूरा जानने मत देना खुद को. उसके लिए थोड़ी अबूझ बनी रहना. थोड़ी अप्राप्य. प्रेम विवाह में तो सिर्फ मोहभंग है. लव मैरिज में केवल सपने टूटते हैं, जिनका दर्द मैं सह नहीं पाऊंगी.”


“ओह ठीक है, तुम्हारी मां पापा का असफल प्रेम विवाह हुआ तो क्या सबका होगा...बहुत डिप्रेसिंग है यह सब. उनको समझाओ. या मैं समझाऊं?”


“चलो अभी तो, कश्मीरी गेट आ गया, यहां से मेरे और तुम्हारे रास्ते अलग. मैं इधर तो तुम उधर!” लीना ने कश्मीरी गेट पर उतरते हुए छेड़ा.


एस्केलेटर पर उसका हाथ चंद्रभान ने कस कर पकड़ा हुआ था.


“यार, तो यह उदास संगीत तुम्हारी मम्मी की पसंद है. वही आदत तुम्हें लग गई. कम ऑन यार. बी स्पोर्टी!” चंद्रभान उसे समझाता रहा था. वह उसे सहलाता रहा, और ऊपर आकर वो रिठाला वाली मेट्रो में चला गया और लीना दिलशाद गार्डन वाली पर.


घर आते समय लीना केवल अपनी मां के बारे में सोचती रही थी. आखिर उन्हें प्यार से इतना ऊब क्यों हो गई थी. ठीक है उन्होंने घर से भागकर लव मैरिज की, और वह फेल हो गई, मगर इसमें उनका कसूर क्या और लव क्या लोगों के अरेंज मैरिज भी फेल हो जाती हैं, तो? लीना बहुत ही परेशान थीं. लीना की मां का बस चलता तो उसे कभी भी प्यार व्यार के लफड़े में नहीं पड़ने देती. शादी तो बहुत दूर की बात है. मगर अब प्यार तो उसे हो ही गया है, चंद्रभान ने उसे उस दर्द से तो बाहर निकाल ही दिया है. पहली बार एचआर में मिलने से लेकर अब तक का सफर काफी लंबा हो गया है और अब यह सफर एक पहचान मांगता है, लीना भी चाहती है कि अब वह रुक जाए. मगर मां का क्या करें? हर समय प्यार को लेकर उनके एक्सपीरिएंस परेशान करते हैं.


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(बिजली की कहानी लव थेरेपी का यह अंश प्रकाशक जगरनॉट बुक्स की अनुमति से प्रकाशित)

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